भारत में हुई ट्विटर पर पहली प्रेसवार्ता

  • 25 सितंबर 2012
सैम प्रिट्रोडा
Image caption केंद्र सरकार के इस कदम को लोगों से बातचीत के नए द्वार खोलने के तरीके के तौर पर देखा जा रहा है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार सैम पित्रोदा माइक्रोब्लागिंग साइट ट्विटर पर प्रेसवार्ता करने वाले पहले सरकारी अधिकारी बन गए हैं.

मंगलवार को उन्होंने करीब 45 मिनट तक पत्रकारों के सवालों के जवाब ट्विटर पर दिए.

प्रेसवार्ता का विषय था जानकारी का लोकतंत्रीकरण.

ट्विटर दुनिया भर में अपनी बातों को लोगों के सामने रखने का एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है और इसमें 140 शब्दों की सीमा होती है.

माना जाता है कि इस सीमा के कारण लोग कम शब्दों में ही अपनी बात में रखते हैं जिसे समझना आसान होता है.

सैम पित्रोदा से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गूगल हैंगआउट सेशन किया था जिसे काफी प्रचार मिला था. इस हैंगआउट सेशन में दुनिया भर के लोगों को नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने का मौका मिला था.

मंगलवार की अपनी प्रेसवार्ता से पहले पित्रोदा ने यूट्यूब पर एक संदेश में कहा, “भारत में सूचना का अधिकार है लेकिन जानकारी को नाड़े वाली फाइलों में बंद करके रखा गया है. जानकारी से खुलापन, लोकतंत्रीकरण, विकेंद्रीकरण आता है. और आज के माहौल में जानकारी सबसे बड़ा संसाधन है. सूचना शक्ति है, और शक्ति कोई नहीं बांटना चाहता है.”

केंद्र सरकार के इस कदम को लोगों से बातचीत के नए द्वार खोलने के तरीके के तौर पर देखा जा रहा है.

माना जा रहा है कि भविष्य में और भी मंत्री और नौकरशाह इस माध्यम का प्रयोग कर सकते हैं.

ट्विटर, फेसबुक और गूगल प्लस सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट हैं जिन पर लोग राजनीतिक औऱ गैर-राजनीतिक मुद्दों पर अपने विचार रखते है, और कहा जाता है कि राजनीतिक बातचीत में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

कई नेता पहले ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फेसबुक पर लगातार अपने विचार रखती हैं, और नरेंद्र मोदी फेसबुक, ट्विटर और ब्लॉग पर मौजूद हैं.

प्रधानमंत्री दफ्तर, कई मंत्रालय भी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर मौजूद हैं.

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और खेल मंत्री अजय माकन ट्विटर संदेशों के माध्यम से अपनी बात रखते हैं.

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