नीतीश को आलोचना हज़म क्यों नहीं होती?

 शुक्रवार, 28 सितंबर, 2012 को 15:28 IST तक के समाचार
विरोध प्रदर्शन

नीतीश कुमार की जनसभाओं में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें जूते-चप्पल दिखा रहे हैं

ऐसा क्या हो गया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जूते-चप्पल दिखाए गए और उनके काफिले पर पथराव किया गया? बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए वह जन-चेतना जगाने निकले थे, लेकिन तीखे विरोध के दृश्य देख अपना आपा खो देने को विवश हो गए.

बिहार को विशेष श्रेणी वाले राज्य का दर्जा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 'अधिकार यात्रा' नाम से एक मुहिम छेड़ी है. यह विशेष दर्जा हासिल होने से राज्य में पूँजी निवेश पर विभिन्न केन्द्रीय करों में काफ़ी छूट मिलती है.

लेकिन अपने सात साल के शासन के दौरान पांच बार राज्यव्यापी यात्राएँ निकाल चुके नीतीश कुमार इस बार अपनी छठी यात्रा में 'बुरे फंसे' जैसा कष्ट झेल रहे हैं.

यह कष्ट ऐसा-वैसा नहीं है. उनकी जनसभाओं में उन्हें जूते-चप्पल दिखाए जा रहे हैं. रास्ते में काले झंडे लेकर या अधनंगे होकर 'मुख्यमंत्री वापस जाओ' के नारे लगा रहे युवा छात्रों ने उनके मंच पर अंडे फेंके हैं.

इतना ही नहीं, उनके सरकारी काफ़िले पर पथराव हुआ और वाहनों में आग लगाई गई. पुलिस के बलप्रयोग से कई लोग घायल भी हुए.

मधुबनी और दरभंगा से शुरू हुआ ये विरोध का सिलसिला बेगुसराय और खगड़िया में गुरुवार को काफ़ी उग्र हो गया. विभिन्न समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरे लोगों ने जमकर बवाल काटा.

क्यों भड़का है ग़ुस्सा?

नीतीश सरकार द्वारा ठेके पर नियुक्त किए गए स्कूल शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन से इस हंगामे की शुरुआत हुई. मात्र 6,000 रुपए या 7,000 रुपए के नियत वेतन (फ़िक्स्ड सैलरी) पर काम कर रहे इन शिक्षकों की मांग है कि उन्हें अन्य स्कूल शिक्षकों के बराबर नियमित वेतनमान (पे-स्केल) मिले.

इस मांग को नहीं मानने के कथित अड़ियल सरकारी रवैये से क्रुद्ध शिक्षकों ने 'अधिकार यात्रा' पर निकले मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ जगह-जगह रोष भरे प्रदर्शन किए.

इसी बात से नाराज़ नीतीश कुमार के तेवर मधुबनी और दरभंगा की जनसभाओं में खासे आक्रामक दिखने लगे. मधुबनी में उन्होंने शोर मचाने वालों को 'उठाकर बाहर फेंकवाने' और 'कचूमर निकलवा देने' जैसी धमकी दे डाली.

नीतीश ने आपा खो दिया

पोल खोल दूँगा!

"उद्दंडता दिखा रहे हैं? मैं ऐलान करता हूँ कि आपकी माँग मानने की बात कौन कहे, उस पर मैं विचार तक नहीं करूँगा. छुट्टी लेकर आए हैं यहाँ? खोल दूँ मैं पोल कि कौन है आप के पीछे?"

नीतीश कुमार

दरभंगा में तो नीतीश कुमार इतने आगबबूला नज़र आए कि विरोध में नारेबाजी कर रहे शिक्षकों पर उन्होंने काफ़ी सख्त जुमले ताबड़तोड़ दागने शुरू कर दिए.

कहने लगे ''उद्दंडता दिखा रहे हैं? मैं ऐलान करता हूँ कि आपकी मांग मानने की बात कौन कहे, उस पर मैं विचार तक नहीं करूंगा. छुट्टी लेकर आए हैं यहाँ? खोल दूं मैं पोल कि कौन है आप के पीछे?''

तैश में बोलते नीतीश कुमार को वहाँ लोगों ने आपा खो देने जैसी स्थिति में देखा-सुना. पहले भी कई बार नीतीश कुमार पर ऐसे आरोप लगे हैं कि वो अपनी तनिक भी आलोचना पचा नहीं पाते हैं.

चूँकि कुछ टीवी चैनलों पर ये दृश्य दिखा दिए गए, इसलिए मुख्यमंत्री के इस क़दर भड़कने की चर्चा यहाँ हर तरफ़ होने लगी.

पथराव, आगजनी और तोड़फोड़

समस्तीपुर में स्कूल भवनों की बदहाली को लेकर छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया. वहाँ से जब मुख्यमंत्री का काफ़िला बेगूसराय पहुँचा तो वहाँ बिजली संकट के ख़िलाफ़ छात्रों ने उन्हें काले झंडे दिखाए.

नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लोगों के गुस्से को देखकर कई बार अपना आपा खो बैठे

सभामंच के सामने रोषपूर्ण नारे लगा रहे लोगों ने जब अंडे फेंकते हुए हंगामा शुरू किया तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए लाठियां चलाईं. एक युवक का सिर फट गया.

लेकिन सबसे ज़्यादा उग्र विरोध खगड़िया में देखा गया. वहाँ बाढ़ पीड़ितों की समस्या दूर करने और खगड़िया को विशेष ज़िला घोषित करने संबंधी मांग लेकर लोग सड़कों पर उतरे थे.

पुलिस-प्रशासन की भारी रोक-टोक से क्षुब्ध होकर उन लोगों ने मुख्यमंत्री के काफ़िले पर पथराव कर दिया और कुछ वाहनों में आग लगा दी.

वहाँ मुख्यमंत्री की सभा तीन घंटे विलम्ब से किसी तरह हड़बडी में संपन्न हो पाई. देर रात तक पूरे खगड़िया शहर में तनाव रहा.

प्रेक्षकों के मुताबिक़ भ्रष्टाचार या घूसखोरी से लेकर क़ानून-व्यवस्था तक, कई मामलों में जनाक्रोश यहाँ बढ़ता जा रहा है. इस बाबत राज्य सरकार की विफलताओं को छिपाने के लिए इस विशेष राज्य वाले मुद्दे को आगे किया जा रहा है.

उधर आम जनता फ़िलहाल इसे बहुत आवश्यक मुद्दा नहीं मानते हुए अपनी अन्य बड़ी समस्याओं का समाधान जल्दी चाहती है. इसलिए नीतीश कुमार को इस तरह के जनविरोध का सामना करना पड़ रहा है.

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