भारत में हर हफ़्ते चार तेंदुओं का क़त्ल

Image caption भारत में तेंदुओं की संख्या में तेजी से कमी आ रही है

एक अध्ययन के मुताबिक भारत में हर हफ्ते कम से कम चार तेंदुओं का अवैध शिकार किया जाता है.

रिपोर्ट ने साल 2001 से 2010 के बीच 420 तेंदुओं की खालों, हड्डियों और दूसरे अंगों के जब्त करने संबंधी दस्तावेज पेश किेए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड तेंदुओं का सबसे बड़ा स्रोत है जबकि इसके विभिन्न अंगों की तस्करी का सबसे बड़ा अड्डा दिल्ली है.

भारत में तेंदुआ एक संरक्षित प्रजाति और उनके शरीर के किसी भी अंग का अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित है.

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में इनकी वास्तविक संख्या का अनुमान लगाने के लिए कोई विश्वसनीय आँक़ड़े उपलबंध नहीं है. लेकिन मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि भारत में करीब दस हजार तेंदुए हैं.

शुक्रवार को जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दस सालों में कम से कम 2,294 तेंदुओं का अवैध शिकार किया गया.

अध्ययन के मुताबिक तस्करी के जरिए ज्यादातर तेंदुए नेपाल के रास्ते चीन, बर्मा और लाओस जैसे देशों को भेजे गए.

चेतावनी

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि भारत में यदि तेंदुओं के अवैध शिकार और तस्करी को रोकने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो इनकी संख्या में काफी तेजी से गिरावट आ जाएगी.

अध्ययन करने वाले दल में शामिल वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर यानी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के रवि सिंह कहते हैं, “विदेशी मांग में किसी तरह की बढ़ोत्तरी भारत में तेंदुओं की संख्या में बड़े पैमाने पर कमी ला सकती है.”

वहीं इस अध्ययन दल के प्रमुख डॉक्टर राशिद रजा कहते हैं, “तेंदुओं की कमी की वजह यह भी है कि जंगलों की काफी तेजी से कटाई हो रही है.”

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को तेंदुओं का अवैध शिकार और उनके अंगों की तस्करी रोकने के लिए विशेष कार्य दल गठित करना चाहिए.

तेंदुए की खाल को फर कोट बनाने के लिए और हड्डियों को परंपरागत एशियाई दवाइयां बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

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