भारत की चाबी अमरीका के हाथ नही: मनमोहन

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह लगातार विपक्षी दलों के निशाने पर हैं

प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने फिर दोहराया है कि सुधारों को वापस लेने का कोई सवाल ही नही है और वो इन मुद्दो पर सहयोगियों से बात करना जारी रखेंगे.

राष्ट्रपति भवन में भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर अल्तमस कबीर के शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब दिए.

जब मनमोहन सिंह से पूछा गया कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया है कि खुदरा में एफडीआई का फैसला अमरीका को खुश करने के लिए किया गया है तो इस सवाल के जवाब में उन्होंने जोर देकर कहा कि खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश का फैसला अमरीका के दबाव में नही लिया गया.

उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और दूसरे राष्ट्र उसे अपने आदेश से नही चला सकते.

ममता बनर्जी के सवाल पर मनमोहन सिंह ने कहा कि उनके मन में किसी के प्रति कोई खटास नही है

मनमोहन सिंह ने कहा कि वो ऐसे सभी काम करेंगें जो कि भारत के लिए अच्छे हैं. सुधार एक सतत प्रक्रिया है और ये जारी रहेंगे.

चुनाव अभी दूर हैं

प्रधानमंत्री ने समय से पहले चुनावो की संभावना को भी दरकिनार कर दिया और कहा कि वो अभी दूर है.

कुछ दिन पहले ही, खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मामले पर ममता बनर्जी के समर्थन वापस लेने के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि अर्थव्यवस्था में लोगों का विश्वास खत्म न हो, इसीलिए उन्हें कड़े कदम उठाने पड़े हैं.

मनमोहन सिंह का कहना था कि ये विश्व अर्थव्यस्था के लिए मुश्किल समय है और अमरीका, यूरोप, यहाँ तक कि चीन को भी आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

मनमोहन सिंह ने जोर देते हुए कहा था , "पैसा पेड़ों पर तो लगता नहीं...यदि हम कड़े कदम न उठाते तो वित्तीय घाटा, सरकारी खर्चा खासा बढ़ जाता. निवेशकों का विश्वास भारत में कम हो जाता. वे कतराने लगते और ब्याज की दरें बढ़ जाती...बेरोजगारी भी बढ़ जाती..

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