तेलंगाना में दिख रहा है बंद का असर

 सोमवार, 1 अक्तूबर, 2012 को 11:40 IST तक के समाचार
तेलंगाना में विरोध प्रदर्शन

अलग तेलंगाना राज्य की माँग को लेकर उस्मानिया विश्वविद्यालय में काफ़ी उपद्रव हुआ

अलग तेलंगाना राज्य के समर्थन में तेलंगाना क्षेत्र में आयोजित 24 घंटे के बंद का वहाँ व्यापक असर दिख रहा है मगर हैदराबाद में ये प्रभाव मिला-जुला है.

तेलंगाना क्षेत्र के शैक्षिक संस्थान बंद हैं और फ़िलहाल ये बंद शांतिपूर्ण तरीक़े से चल रहा है.

दरअसर रविवार को हैदाराबाद में आयोजित ‘तेलंगाना मार्च’ के दौरान काफ़ी हिंसा हुई थी और कई जगह पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे. उस्मानिया विश्वविद्यालय में भी छात्रों के उग्र प्रदर्शन पर पुलिस ने आँसू गैस छोड़ी थी.

कई जगह पुलिस और मीडिया की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था.

उस्मानिया विश्वविद्यालय के अलावा सचिवालय के नज़दीक भी तेलंगाना समर्थकों और पुलिस के बीच भिड़ंत हुई थी. लोगों को भगाने के लिए पुलिस ने लाठियाँ भी चलाईं.

उधर हुसैन सागर झील के पास रात 12 बजे के लगभग आयोजकों ने विरोध प्रदर्शन रोक दिया. वहाँ बारिश के चलते आयोजकों को ये फ़ैसला करना पड़ा.

दो दिन का अनशन

मगर जिस तरह रविवार के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई उसे देखते हुए तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने मंगलवार से दो दिन के अनशन की घोषणा की है.

इस बीच बंद के चलते तेलंगाना क्षेत्र में जहाँ औद्योगिक प्रतिष्ठान बंद हैं वहीं हैदराबाद में इस बंद का मिला-जुला असर दिखाई पड़ रहा है.

दरअसर तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से रविवार को बुलाए गए ‘तेलंगाना मार्च’ को सरकार ने हुसैन सागर से सटे नेकलेस रोड के हिस्से तक सीमित रखने की अनुमति दी थी. कार्यक्रम को केवल तीन से शाम सात बजे तक की अनुमति दी गई थी.

तेलंगाना क्षेत्र से आने वाले लोगों को दूसरे इलाकों में जाने से रोकने के लिए पुलिस ने दूसरी सभी सड़कें बंद कर दी थीं और लोगों को कई किलोमीटर लम्बा चक्कर काट कर सिकंदराबाद के रास्ते से नेकलेस रोड पर जाने के लिए कहा जा रहा था.

इस पर गुस्साई जनता ने कई जगहों पर प्रदर्शन किए और पुलिस की ओर से लगाए गए अवरोधकों को तोड़ने की कोशिश की.

इस विरोध प्रदर्शन को तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सहित कई राजनीतिक दलों और खुद कांग्रेस के तेलंगाना सांसदों का समर्थन भी प्राप्त था.

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