हैदराबाद: रिंग रोड या मौत का रिंग?

 बुधवार, 3 अक्तूबर, 2012 को 12:47 IST तक के समाचार

हैदराबाद को हर ओर से घेरे हुए, लगभग 7,000 हज़ार करोड़ रूपए की लागत से बनी 159 किलोमीटर लम्बी 8 लेन की ये विश्व स्तरीय सड़क है.

लेकिन यहाँ सुरक्षा की स्थिति इतनी ख़राब है की पिछले छह महीनों में वहां 54 दुर्घटनाओं में 38 लोगों की मृत्यु हो गई और 54 लोग घायल हुए हैं.

अब यह रिंग रोड 'मौत के रिंग' के नाम से जानी जाने लगी है.

इसी मौत के रिंग का शिकार हुए भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और लोक सभा सदस्य अज़हरुद्दीन के 19 वर्षीय बेटे अयाज़ुद्दीन और उनकी बहन के 16 वर्षीय बेटे अज्मलुर रहमान.

दोनों की एक मोटर साइकिल दुर्घटना में एक वर्ष पहले मौत हो गई, पर उसके घाव अब तक परिवारवालों के दिलों में ताज़ा है.

अज़हर वैसे भी ज्यादा बात नहीं करते और अपने बेटे की दुर्घटना के बाद से तो वो और भी खामोश हो गए हैं.

इस घर से कुछ ही दूर स्थित पूर्व मंत्री के वेंकट रेड्डी के घर का दृश्य भी कुछ ऐसा ही है. वेंकट रेड्डी और उनके परिवार के दूसरे सदस्य भी अपने 19 वर्षीय पुत्र प्रतीक रेड्डी की मौत का शोक मना रहे हैं.

21 दिसम्बर 2011 को प्रतीक रेड्डी की उनके दो मित्रों के साथ एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. वेंकट रेड्डी अपने पुत्र के ग़म से अब तक संभल नहीं सके हैं.

मंत्री के एक संबंधी का कहना था, "उस दिन उनका परिवार कहीं जाने के लिए प्रतीक रेड्डी की घर वापसी का इंतज़ार कर रहा था, वो इंतज़ार आज तक पूरा नहीं हुआ. वो घर नहीं आया, उसके मरने की खबर घर आई".

खोल दी गई 'अधबनी' सड़क

वेंकट रेड्डी के पुत्र प्रतीक रेड्डी की मृत्यु उनकी स्कोडा कार के बेहद तेज़ गति से दौड़ते हुए उलटने से हुई.

साइबराबाद के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ट्राफिक) यादगिरी राव ने इन दुर्घटनाओं के कारण पर कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए बीबीसी से कहा, "अभी इस रिंग रोड के कई भागों का निर्माण चल रहा है और उस पर कई काम होने बाक़ी हैं. इस रिंग रोड की ज़िम्मेवारी कई दूसरी एजंसियों पर भी है, इसलिए मैं कुछ कैसे कह सकता हूँ. रिंग रोड का निर्माण पूरा होने के बाद ही इसका नियंत्रण पूरे तरह से हमारे हाथ में आएगा".

इस रिंग रोड का निर्माण वर्ष 2005 में शुरू हुआ. अभी तक इस रिंग रोड के जिन भागों का निर्माण पूरा हुआ है उन्हें ट्राफिक के लिए खोल दिया गया है.

अधिकारी मानते हैं की इस रिंग रोड के जिन भागों को खोला गया है उन पर भी रोशनी का पूरा प्रबंध पूरा नहीं हुआ है और कई बाधाएं लगाना भी अभी बाक़ी है.

इस सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त हो कर मरने वाले एक युवा के पिता ने अपनी पहचान न बताने की शर्त पर कहा, "सरकार को लोगों की जान की परवाह नहीं है. इसलिए केवल रिंग रोड के कुछ भागों को खोल दिया, ताकि सात वर्ष के बाद भी उसका निर्माण पूरा नो होने पर कोई आलोचना न करे".

इस सड़क का उद्देश हैदराबाद नगर के अंदर ट्राफिक के बोझ को कम करना और नगर के किसी भी भाग से जल्द से जल्द नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध करवाना था.

यह हैदराबाद से जाने वाले तीन राष्ट्रीय मार्गों और कई राज्य मार्गों को भी आपस में जोड़ती है.

संपन्न घरों के नौजवान

"अभी इस रिंग रोड के कई भागों का निर्माण चल रहा है और उस पर कई काम होने बाक़ी हैं. इस रिंग रोड की ज़िम्मेवारी कई दूसरी एजंसियों पर भी है, इसलिए मैं कुछ कैसे कह सकता हूँ."

यादगिरी राव, साइबराबाद के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ट्राफिक)

लेकिन यह भी एक अजीब बात है की इस एक्सप्रेस वे पर दुर्घटनाओं में मरने वाले अधिकतर संपन्न घरानों के सदस्य या जानी-मानी हस्तियों के नौजवान पुत्र ही हैं.

11 सितम्बर 2011 को जिस मोटर साइकल दुर्घटना में अज़हर के पुत्र की मृत्यु हुई थी वो 1000 सीसी की इम्पोर्टेड सुज़ूकी मोटर साइकिल थी जो अजहर ने अपने बेटे को जन्मदिन पर तोहफे में दी थी.

साइबराबाद पुलिस के अनुसार अयाज़ 150 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रहे थे इसलिए नियंत्रण खो बैठे और डिवाइडर से टकरा गए.

इससे पहले 20 जून 2010 को एक तेलुगु फिल्म अभिनेता और भाजपा के पूर्व सांसद कोटा श्रीनिवास राव के पुत्र और अभिनेता कोटा प्रसाद की तेज़ गति से चलने वाली इम्पोर्टेड मोटर साइकिल से इसी सड़क पर जाते हुए एक बड़े वाहन से टकराकर मौत हो गई.

लापरवाही?

एक पुलिस अधिकारी का कहना था, "इस रिंग रोड पर अगर सबसे ज्यादा सेलिब्रिटिस के युवा लड़के मर रहे हैं तो इसका करण यह है की वो अपनी शक्तिशाली मोटर साइकलों और कारों को इस रिंग रोड पर अंधाधुंध दौड़ाते हैं. इस पर ट्राफिक नहीं है, कोई बाधा नहीं है और इसकी दोनों और तार लगा देने से कोई जानवर भी यहां नहीं आता."

इसके अलावा शुरूआत में युवाओं की टोली रात में इस रिंग रोड का उपयोग "रेस ट्राक" की तरह कर रही थी.

मोटर साइकलों की रेस हुआ करती थी, एक पहिए पर बाइक चलाने, या सीट पर खड़े होकर चलाने जैसे करतब भी किए जाते थे.

अजहरुद्दीन के पुत्र की मौत के बाद जब शोर शराबा हुआ तो पुलिस ने युवाओं के रात में इस रोड पर मोटरसाइकल चलाने पर रोक लगा दी.

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