सलाखों के पीछे पनपा चित्रकला का हुनर

 रविवार, 7 अक्तूबर, 2012 को 06:02 IST तक के समाचार

भारत की जेलों में क़ैदियों की बढ़ती तादाद और जेल के भीतर माहौल ने क़ैदियों के सुधार कार्यक्रम को बुरी तरह प्रभावित किया है, लेकिन जयपुर के केंद्रीय कारागार ने इसी माहौल में सुधार की राह निकाली है.

जेल प्रशासन ने क़ैदियों में चित्रकला का हुनर विकसित किया है. आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रहे उन्नीस क़ैदियों ने ऐसे मोहक चित्र बनाए है कि वो अब बिकने लगे है.

जयपुर में पिछले दिनों गांधी जयंती के मौक़े पर इन चित्रों की प्रदर्शनी भी लगी है. इनमें एक चित्र लगभग तीस हज़ार रुपए में बिका है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी क़ैदियों की कूची से बने चित्रों की प्रदर्शनी में शामिल हुए.

उन्होंने कहा,"ये क़ैदियों में सुधार के भाव भरने की पहल है. महात्मा गांधी ने भी हमेशा क़ैदियों के जीवन को सुधारने पर ज़ोर दिया था. इन चित्रों से क़ैदियों की कला का पता चलता है. सरकार हमेशा इस दिशा में प्रयास करती रही है ताकि क़ैदी जब जेल से बाहर अपनी नई ज़िंदगी शुरू करे तो अच्छे नागरिक बन कर निकलें."

"ये क़ैदियों में सुधार के भाव भरने की पहल है. महात्मा गांधी ने भी हमेशा क़ैदियों के जीवन को सुधारने पर ज़ोर दिया था. इन चित्रों से क़ैदियों की कला का पता चलता है. सरकार हमेशा इस दिशा में प्रयास क्ररती रही है ताकि क़ैदी जब जेल से बाहर अपनी नई ज़िन्दगी शुरू करे तो अच्छे नागरिक बन कर निकलें."

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

क़ैदियों को चित्रकला के लिए प्रेरित करने के लिए जेल प्रबंधन ने शिक्षकों की मदद ली और उन्हें सिखाने की व्यवस्था की.

क़रीब ऐसे चालीस क़ैदी थे जिन्होंने चित्रकला सीखी. इनमें से 19 क़ैदियों ने ऐसे चित्र बनाए कि उनकी ख़ूबसूरती को देखते हुए प्रदर्शनी में जगह दी गई.

उम्मीद की किरण

इन क़ैदियों के चित्रों में क़ुदरत के नज़ारे हैं. कुछ क़ैदियो की कलाकृतियों में धर्म है और रूहानी माहौल के भी दर्शन होते हैं.

जेल के उप-महानिरीक्षक सरवर ख़ान का कहना है, “इन क़ैदियों में से एक मान बहादुर थापा ने एक अच्छे कलाकार की तरह तस्वीरों का रेखांकन किया है. क़ैदियों के इस तरह कला के हुनर में तल्ल्लीन होने से जेल के भीतर सुधार का काम तेज़ हुआ है.”

इन तस्वीरों में जीवन के रंग भरने वाले क़ैदी अभी जेल की सलाखों के पीछे है. मगर उनके हाथो बनी तस्वीरे बाहर क़ैदियों की प्रतिभा का बखान करने को मौजूद है.

जयपुर के एक चित्रकार गोपाल खेतांची इन पेंटिंग्स के बारे में कहते हैं, “अगर इनमें से कुछ को ठीक तालीम मिले तो वो बेहतर कलाकार हो सकते है. फिर कला आप में अच्छे होने का भाव पैदा करती है. ये एक अच्छी पहल है. कला इंसान में कोमलता पैदा करती है.”

क़ैदियों के हाथों बनी इन तस्वीरों में ज़िदगी के चटख़ रंग है. उनका कैनवास उम्मीद की रोशनी से सराबोर है.

कभी इन हाथों ने जुर्म की इबारत लिखी. अब मनभावन चित्र बनाते है. शायद इसीलिए कुछ लोग कहते हैं कि जुर्म के लिए हाथ नहीं हालात ज़िम्मेदार होते है.

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