मुसलमानों को साथ लाना होगा: गडकरी

  • 6 अक्तूबर 2012
नितिन गडकरी
Image caption नितिन गडकरी के बयान को 2014 चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है.

भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा है कि उनका दल न तो मुस्लिम विरोधी है और न ही दलितों के ख़िलाफ़ लेकिन उसके विरूद्ध इस मामले पर बहुत दुष्प्रचार हुआ है.

शनिवार को दिल्ली में आयोजित पार्टी के महिला मोर्चो के एक कार्यक्रम में बोलते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, "ये हमारा दुर्भाग्य है, ये हमारी छवि और सच्चाई का मामला है और ये ज़मीनी हक़ीक़त और नज़रिये का फ़र्क़ है. हम सामप्रदायिक, जातिवादी या मुसलमान और दलित विरोधी नहीं हैं."

उन्होंने आग कहा, "हम सभी का हित चाहते हैं. हम चाहते हैं कि आदिवासियों, दलितों और महिलाओं सभी का भला हो, लेकिन ग़लत प्रचार की वजह से हमारी छवि को नुक़सान हुआ है."

छवि बदलें

पार्टी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वो समाज के हाशिए पर रह रहे वर्गों के बीच जाकर काम करें ताकि बीजेपी की सही छवि लोगों के सामने आ सके.

नितिन गडकरी ने कहा, "हमें समाज के शोषित वर्गों को साथ लेकर चलना होगा. आदिवासियों, दलितों, अल्पसंख्यकों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों, औरतों और युवाओं के साथ काम करना होगा. हमें अपनी संगठनात्मक और राजनीतिक ज़मीन का विस्तार करने की ज़रूरत है."

जानकारों का मानना है कि नितिन गडकरी का ये बयान पार्टी समर्थकों की संख्या में इज़ाफ़ा करने की रणनीति का एक हिस्सा है.

सहयोगी दलों का दबाव

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीयता की संकीर्ण परिभाषा वाले राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से अपने जुड़ाव और हिंदूत्व की विचारधारा की वजह से बीजेपी के समर्थकों की संख्या एक वर्ग विशेष से आगे नहीं जा पा रही है और पार्टी को मालूम है कि सिर्फ़ उनके बल वो सत्ता में नहीं पहुंच सकती है.

Image caption नरेंद्र मोदी और साल 2002 के गुजरात दंगों ने पार्टी की मुस्लिम विरोधी छवि को और मज़बूत किया है.

उनका मानना है कि बीजेपी की इस छवि की वजह से उसके सहयोगी राजनीतिक दल भी असहज रहते हैं.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी

अगस्त में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान बीजेपी ने ये फ़ैसला किया था कि वो धर्म-निरपेक्षता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और उजागर करेगी.

साथ ही पार्टी ने अल्पसंख्यकों को भरोसा दिलाया था कि वो धर्म के आधार पर पक्षपाती रवैया अपनाने में यक़ीन नहीं करती है.

पिछले दिनों एक प्रेस वार्ता में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी कहा था कि वो मुस्लिम विरोधी नहीं है और विश्व हिंदू परिषद जैसी संस्थाओं की वजह से उन्हें नुक़सान उठाना पड़ा है.

लेकिन बीजेपी पर पैनी नज़र रखने वालों का मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे लोगों के प्रधानमंत्री की रेस में शामिल होने और पार्टी द्वारा बार बार उनका बचाव करने जैसे मुद्दों की वजह से बीजेपी के लिए अपनी छवि में बदलाव लाने की कोशिश किसी कारगर मो़ड़ पर नहीं पहुंचेगी.

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