बिजली के तार जोड़ते केजरीवाल पर बवाल

 सोमवार, 8 अक्तूबर, 2012 को 20:30 IST तक के समाचार

दिल्ली में बिजली और पानी की बढ़ी कीमतों के खिलाफ़ क्लिक करें अरविंद केजरीवाल ने बिजली और जल सत्याग्रह शुरु किया है. जिसके तहत वो खुद उन लोगों के घर बिजली कनेक्शन जोड़ रहे हैं जिनके घर की बिजली बिल न भरने की वजह से काट दी गई.

क्या इस तरह से कानून हाथ में लेना सही ठहराया जा सकता है या उनके इस तर्क में दम है कि जब जनता की आवाज़ सरकार के कानों तक नहीं पहुँच रही हो तो इसके सिवाय कोई चारा नहीं है.

यही सवाल हमने पूछा बीबीसी के पाठकों से अपने क्लिक करें फ़ेसबुक पेज पर और इस मुद्दे पर अच्छी खासी चर्चा हुई और लोगों ने खुलकर अपने विचार लिखे.

आदित्य कुमार कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल ग़लत कर रहे हैं वहीं मनीष अरोड़ा कहते हैं, “सुना हैं कि बिजली कंपनियों को अच्छा खासा मुनाफ़ा हो रहा है और सिफारिश थी कि बिजली के दामों को कम किया जाए, लेकिन सरकार ने दर बढ़ाने का फैसला किया आखिर क्यों.”

सुहैल आलम के अनुसार, “अरविंद केजरीवाल बिलकुल ग़लत कर रहे हैं. केजरीवाल ये सब प्रचार पाने के लिए कर रहे हैं.”

"सवाल यह है कि अत्यधिक बिजली बिल भेजना और गरीब आदमी के द्वारा पैसा जमा नहीं करने पर कनेक्शन काट देने पर सरकार क्यों पहल नहीं करती"

अरुण साथी

दीपक दुबे लिखते हैं कि अरविंद केजरीवाल लगता है चुनाव लड़ने वाले हैं और शायद इसलिए वो ऐसा कर रहे हैं.

अरुण साथी सवाल उठाते हुए कहते हैं, “सवाल यह नहीं कि केजरीवाल कानून को हाथ में ले रहे हैं, सवाल यह है कि अत्यधिक बिजली बिल भेजना और गरीब आदमी के द्वारा पैसा जमा नहीं करने पर कनेक्शन काट देने पर सरकार क्यों पहल नहीं करती? सरकार जांच तो करे कि इतना अधिक बिल कैसे आया.”

रवि तिवारी के मुताबिक़ अरविंद केजरीवाल का उद्देश्य ठीक है लेकिन रास्ता ग़लत है.

रमेश सिंह का कहना है, “क़ानून को अपने हाथ में लेना आमतौर से अपराध की श्रेणी में आता है,पर जब सरकार और क़ानून के रक्षकों के कानों में जनता की आवाज न पहुँचे तो ऐसा ही कुछ करने पर उतारू होना पड़ता है.”

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