'मायावती के खिलाफ़ जांच के लिए स्वतंत्र है सीबीआई'

Image caption सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई, बसपा अध्यक्ष मायावती के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले की तहकीकात करने के लिए स्वतंत्र है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई, बहुजन समाज पार्टी, बसपा, अध्यक्ष मायावती के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले की तहकीकात करने के लिए स्वतंत्र है.

साथ ही अदालत ने मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला रद्द करने के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर दाखिल पुनर्विचार याचिका पर केन्द्र, सीबीआई और बसपा सुप्रीमो से जवाब मांगे हैं.

अदालत ने कहा, "हमने ये कभी नहीं कहा था कि सीबीआई की जांच करने का अधिकार नहीं है. संस्था ये कर सकती है लेकिन इसके लिए सीबीआई को राज्य सरकार से इजाज़त लेने पड़ेगी."

न्यायाधीश पी सतासिवम और दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने साफ़ किया कि अदालत इस मामले पर सिर्फ़ अपने छह जुलाई के फ़ैसले के बारे में ही स्पष्टीकरण देगी.

मायावती की रैली

इससे पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद पहली बार बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने लखनऊ में अपने समर्थकों से समय से पहले चुनाव के लिए कमर कसने रहने को कहा है.

मायावती ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यूपीए सरकार को समर्थन जारी रखने या वापस लेने पर वह बुधवार को फैसला लेंगी.

बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशी राम की छठीं पुण्य तिथि पर लखनऊ के अंबेडकर पार्क में आयोजित संकल्प रैली में हिस्सा लेने के लिए देश भर से बड़ी तादाद में लोग लखनऊ पहुँचे.

संकल्‍प महारैली में मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार पर जोरदार हमला बोला और अखिलेश सरकार को दलित विरोधी करार दिया.

दलित विरोधी सरकार

मायावती ने कहा कि कांशीराम के जन्मदिन पर छुट्टी रद्द करने का फैसला दलित विरोधी है.

अंबडकर पार्क में मूर्ति तोड़ने की घटना पर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा, 'हमने कभी लोहिया पार्क को तोड़ने जैसा गिरा हुआ काम नहीं किया.' उन्‍होंने सपा सरकार पर दलितों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्‍य में दलित अफसरों को भी तंग किया जा रहा है.

मायावती ने कहा, "छह महीने में लोग समाजवादी पार्टी को वोट देने के फैसले पर पछता रहे हैं. अखिलेश यादव कुप्रबंधन में मुलायम सिंह यादव से भी आगे निकल चुके हैं.

मायावती ने कहा, "अगर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने संविधान में आरक्षण की व्‍यवस्‍था नहीं की होती तो मुलायम सिंह यादव अपने परिवार समेत किसी बड़े जमींदार की गाय-भैंसे चराते नजर आते."

चुनाव बाद जनता के सामने

इस रैली में लोगों को लाने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने सोलह रेलगाड़ियाँ और सैकड़ों की संख्या में बसें किराए पर ली थीं. बाहर से आने वाले लोगों के ठहराने और खाने पीने का बढ़िया इंतजाम किया गया.

ये रैली इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि मायावती चुनावी हार के बाद पहली बार ऐसी बड़ी जनसभा को संबोधित किया.

अब इस सवाल का जवाब कल मिलेगा कि क्या मायावती केंद्र सरकार को समर्थन देना जारी रखेंगी या नही.

राज्य स्तर पर भी बहुजन समाज पार्टी के सभी बड़े नेता भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं. सत्ताधारी समाजवादी पार्टी ने इसे भ्रष्टाचार से घिरे नेताओं की जान बचाओ रैली करार दिया है.

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