नीतीश की सभा में फिर चले जूते-चप्पल

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार
Image caption मंगलवार को नवादा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनसभा में जूते-चप्पल फेंके गए.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनसभाओं में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला थम नहीं रहा है. मंगलवार को नवादा में मुख्यमंत्री की तरफ़ निशाना करके उनकी सभा में कुर्सियां फेंकी गयीं और जूते-चप्पल उछाले गये.

वहाँ नाराज़ लोगों, ख़ासकर युवाओं की भीड़ ने, शोर मचाते हुए सभा-स्थल पर घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की.

उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री को जन -विरोध से बचाने के लिए पुलिस-प्रशासन ने नवादा में दो दिनों से आपात काल जैसे प्रतिबंधों का आतंक मचा रखा है.

हर जगह पहरा

गया में निर्दलीय विधायक संजीव श्याम पर प्रशासन की तरफ़ से पहरा बिठा दिया गया था. उन पर विरोध प्रदर्शन करने वाले कुछ संगठनों को नेतृत्व देने की आशंका थी.

नवादा से गया के रास्ते में पुलिस ने काला बिल्ला लगाये हुए कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया क्योंकि वे मुख्यमंत्री की सभा की तरफ़ जा रहे थे.

गया में नीतीश कुमार के पहुँचने से पहले जमा कुछ प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाकर पुलिस ने वहाँ स्थिति को क़ाबू में किया.

खगड़िया में मुख्यमंत्री के काफ़िले पर हुए पथराव के बाद से प्रशासन का रुख़ ज़रुरत-से-ज़्यादा कड़ा दिखने लगा है.

धारा 107 के तहत लोगों को नोटिस, सभा-स्थल पर काली पोशाक पहनकर जाने पर रोक, छुट्टी के दिन भी शिक्षकों को स्कूल में रहने का फ़रमान - ये तमाम हथकंडे अपनाये जा रहे है.

मक़सद सिर्फ एक ही है कि विरोध प्रदर्शन करने वालों को मुख्यमंत्री की सभा में या उनकी 'अधिकार यात्रा' के रास्ते में आने से किसी भी तरह रोका जाए.

काले कपड़े पहनना जुर्म?

Image caption नितीश कुमार की सभाओं में पहले लोगों के काले कपड़े पहन कर जाने पर रोक लगाई गई थी लेकिन आलोचना होने के बाद इसे हटा लिया गया.

ख़ासकर ठेके पर नियुक्त स्कूल शिक्षकों पर सबसे कड़ी नज़र रखी जा रही है क्योंकि नीतीश कुमार के सामने खुलकर विरोध ज़ाहिर करने की शुरुआत इन्ही शिक्षकों ने की थी.

हद तब हो गई जब रविवार और सोमवार को 'जितिया व्रत' की छुट्टी के दिन उन महिला शिक्षकों को प्रशिक्षण के बहाने स्कूल बुला लिया गया, जो 48 घंटों के उपवास पर थीं.

इतना ही नहीं, भागलपुर में उन तमाम लोगों को नीतीश कुमार की जनसभा में जाने से पुलिस ने रोक दिया जो काली पोशाक पहने हुए थे. मंगलवार को नवादा की जनसभा में तो पुलिस ने सभा स्थल के प्रवेशद्वार पर लड़कियों के काले दुपट्टे तक उतरवा लिए. इस आशंका के तहत ऐसी रोक लगी कि कोई मुख्यमंत्री के सामने अपने काले कपड़े को काले झंडा की तरह लहरा कर ना दिखा दे.

बाद में जब इसकी ख़ूब आलोचना होने लगी तो मुख्यमंत्री ने ऐसी रोक हटा लेने का आदेश दिया.

इसी पर चुटकी लेते हुए लालू प्रसाद यादव का एक बयान आया कि लगता है अब काले बाल वाले को भी नीतीश की सभा में घुसने नहीं दिया जायेगा.

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग पर जन समर्थन जुटाने निकले नीतीश कुमार मुश्किल में फंस गये दिखते हैं.

लगता है उनकी इस 'अधिकार यात्रा' का मुद्दा उलट कर उन्हीं के ख़िलाफ़ जनाक्रोश वाला मुद्दा बन गया है.

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