मधुबनी में गोलीबारी, एक की मौत

फाइल चित्र

बिहार के मधुबनी ज़िला मुख्यालय में उत्तेजित लोगों की भीड़ ने आगजनी की जिसके उसके बाद हुई पुलिस फ़ायरिंग में एक व्यक्ति की जान चली गई और अन्य पांच गंभीर रूप से घायल हो गए.

स्थानीय युवक की लाश न सौंपे जाने के कारण लोगों का गुस्सा भड़का. सबसे पहले मधुबनी टाउन पुलिस स्टेशन में आग लगा कर उसे पूरी तरह जला दिया गया, फिर ज़िला मजिस्ट्रेट के दफ्तर समेत सात अन्य सरकारी कार्यालयों में भी आग लगा दी गई.

बाद में उत्तेजित भीड़ पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं और स्थिति बेकाबू होते देख कई राउंड फ़ायरिंग की गई.

इस कारण घटनास्थल पर ही एक व्यक्ति की मौत हो गई. घायल हुए लगभग एक दर्जन लोगों में से पांच की स्थिति गंभीर बताई जा रही है.

राज्य सरकार के पुलिस प्रवक्ता रवींद्र कुमार ने बीबीसी को बताया कि इस घटना की वजह से मधुबनी के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक का तबादला कर दिया गया है.

वहां नए पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी की तैनाती की गयी है.

तनाव

शुक्रवार देर रात मिली सूचना के अनुसार दरभंगा क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक आरके मिश्र को भी वहां से हटा कर उनकी जगह जीएस गंगुआर को नियुक्त किया गया है.

उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस गोली कांड की न्यायिक जांच कराने का आदेश दे दिया है.

मधुबनी के नागरिकों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन ने प्रशांत झा नाम के युवक की हत्या से जुड़े हुए लोगों को बचाने की कोशिश की.

उनके मुताबिक़ जब प्रशांत झा का शव मिला तो उसकी पहचान छिपा कर मामले को दबाने की कोशिश की गई.

पुलिस का कहना है की बरामद शव इतना क्षत- विक्षत था कि ठीक से परीक्षण किये बिना उसे प्रशांत झा की लाश मान लेना सही नहीं था.

इस बीच प्रशांत झा के परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस लड़की से प्रेम सम्बन्ध की बात कही जा रही है, उसी के परिवार वालों ने प्रशांत झा की हत्या करवा दी.

इस घटना को लेकर हफ्ते भर से मधुबनी में तनाव बढ़ रहा था, जिसका हिंसक रूप शुक्रवार को सामने आया.

मधुबनी के सांसद हुकुमदेव नारायण यादव का कहना है, "इस आगजनी और हिंसा के लिए मधुबनी जिले का पुलिस- प्रशासन ज़िम्मेदार है क्योंकि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होते देख वहां के आम लोगों का रोष भड़क उठा."

मधुबनी शहर में अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. वहां हुई पुलिस फ़ायरिंग के खिलाफ विपक्षी दलों ने तीखे बयान दिए हैं .

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