शादी में जाइए, थोड़ा खाइए और थो़ड़ा फेंकिए...

Image caption भारतीय शादी धूमधाम से मनाई जाती है.

भारत मे शादी काफी धूमधाम से मनाई जाती है. लोग पूरी कोशिश करते हैं कि खूब सजावट की जाए, बारातियों के स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी जाती और खाने का तो क्या कहिए!

लेकिन यही शादी का खाना कहीं मुसीबत की जड़ तो नहीं बनती जा रही है?

बैंगलौर की एक संस्था ने एक शोध के बाद पाया है कि शादी के खाने में ज़बरदस्त बर्बादी होती है.

बैंगलौर के युनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंस की एक टीम ने ने शहर में शादी करवाने वाले 75 'मैरिज हॉल' का छह महीनों तक अध्ययन किया .

शोध में पाया गया कि सिर्फ बैंगलौर शहर में शादियों में करीब 950 टन खाद्य पदार्थ बर्बाद होता है.

युनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंस के कुलपति के नारायन गौड़ा ने कहा, "बैंगलौर में लगभग 530 मैरिज हॉल हैं जहां सालाना एक अनुमा के मुताबिक 84,960 शादियां होती हैं. हर शादी में औसतन एक तिहाई खाना बेकार जाता है और अगर हर थाली की कीमत चालीस रूपये भी लगाएं तो साल में 339 करोड़ रूपये का खाना शादियों में बर्बाद होता है."

गौड़ा कहते हैं कि समस्या सिर्फ खाना फेंकने की ही नहीं है, शादियों के भोजन में कैलौरी भी जरूरत से ज्यादा होती है. भारत में जहां कुपोषण की बड़ी समस्या है तो फिर ज़रूरत से ज्यादा कैलौरी वाला खाना खिलाना भी एक तरह की बर्बादी है.

बर्बादी

वो कहते हैं, "शादी के खाने में एक थाली में 1239 कैलोरी हो सकता है जो कि एक बच्चे के लिए पूरे दिन में जरूरी कैलौरी के बराबर है."

डॉ. गौड़ा कहते हैं कि समस्या पर काबू पाने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाना जरूरी है और साथ सरकार को भी जरूरी कानून बनाने चाहिए.

भारत में कुपोषण को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल ही मैं 'राष्ट्रीय शर्म' बताया था.

वहीं विश्व खाद्य उत्पादन पर एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में मजबूत आर्थिक प्रगति के बावजूद भुखमरी की समस्या से निपटने की रफ्तार बहुत धीमी है. विश्व भुखमरी सूचकांक के मुताबिक इस समस्या से निपटने में अफ्रीका दक्षिण एशिया से कहीं आगे दिखता है.

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