अपनी 'छवि' को लेकर चौकस नरेंद्र मोदी

  • 12 अक्तूबर 2012
नरेंद्र मोदी
Image caption कपड़ों से लेकर बालों तक सब कुछ का विशेष ध्यान रखते हैं मोदी

नरेन्द्र मोदी या नमो आदर्श राजनेता हैं या नहीं इस बात पर कई किस्म की राय हो सकती है, लेकिन किसी भी फोटोग्राफर के लिए वो एक मॉडल राजनेता हैं और ऐसा केवल उनके पेशे के नज़रिए से.

भारत के करीब-करीब सभी राजनेताओं की सोते हुए, नाखून चबाते हुए या नाक या कान खोदते हुए या कुछ ऐसे ही क्षण फोटोपत्रकारों के पास संचित हैं जो उन्हें बहुत सुन्दर सँभले अंदाज़ में नहीं दिखाते.

लेकिन नरेन्द्र मोदी की ऐसी तस्वीर कहीं नहीं मिलेगी जिसमें वो उस तरह न दिख रहे हों जो उन्हें नापसंद हो. और अगर कोई ऐसे तस्वीर आई जिसका इस्तेमाल उन्हें पसंद न हो तो मोदी उस पर आपत्ति जताना भी नहीं भूलते.

अत्यधिक जागरूक मोदी

टाइम्स समूह के बड़े अंग्रेजी टैबलॉयड अहमदाबाद मिरर की संपादक दीपल शाह बताती हैं, "मैं पहले एक गुजराती दैनिक की संपादक थी जहाँ मैंने नरेन्द्र मोदी की एक तस्वीर छापी जिसमें ऐसा लगता है कि उन्होंने गुस्से में आँखें निकाल रही है. तस्वीर छपने के बाद मेरे अखबार के मालिक ने मुझे कहा कि मोदी जी ने उनसे शिकायत की है और उन्हें वह तस्वीर ज़रा भी नहीं पसंद आई है. वो नहीं चाहते की उसका दोबारा इस्तेमाल हो."

इसी तरह का एक किस्सा अहमदाबाद के फोटो पत्रकार मयूर भट्ट भी सुनाते हैं. वो कहते हैं, "एक सार्वजनिक समारोह में मोदी ने अपने हाथ की कलाई में बँधा एक धार्मिक धागा तोड़ा और उसे गोली बना कर वहीं मंच पर फेंक दिया. मैंने वो पूरा सीक्वेंस खींच लिया और अखबार ने छाप दिया. दूसरे रोज़ संपादक ने मुझे बताया कि मोदी ने इस पर नाराजगी जाहिर की है."

हमेशा चौंकन्ने

गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद में पिछले 22 साल से फोटोपत्रकारिता कर रहे मयूर भट्ट कहते हैं कि उन्होंने नरेन्द्र मोदी जैसा राजनेता दूसरा नहीं देखा, "नरेन्द्र मोदी का फोटो सेन्स कमाल का है. उन्हें पता है कि वो किस पोज़ में किस तरह के दिखेगें. वो सार्वजनिक रूप से खराब पोज़ देते ही नहीं."

भट्ट कहते हैं कि सार्वजनिक रूप से आने के पहले आम तौर पर मोदी अपने लिए अलग से बनाई एक जगह पर जाकर व्यवस्थित होते हैं उसके बाद सबके सामने आते हैं. यहाँ तक कि चुनावी सभाओं में मोदी हेलिकॉप्टर या कार से उतरने से पहले अपने पर एक नज़र डाल लेते हैं.

'रोम में रोमन की तरह'

गुजराती दैनिक दिव्य भास्कर के संपादक रहे अजय उमठ कहते हैं, "एक दिन सुबह नाश्ते के समय मैं मोदी से मिलने गया तो उन्होंने कुर्ता पाजामा पहना था. दोपहर में एक कवि सम्मलेन में उन्होंने दूसरे किस्म के कपड़े पहने थे. शाम को एक गोल्फ कोर्स के समारोह में उन्होंने गोल्फर कैप से लाकर टी-शर्ट और गोल्फर शूज़ पहन कर समारोह में शिरकत की."

अजय उमठ का कहना है कि मोदी मानते हैं कि रोम में रोमन की तरह रहना चाहिए.

साल 2001 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी का समय के साथ-साथ पहनावा, चाल-ढाल और यहाँ तक कि बाल भी बदल गए. जब वो मुख्यमंत्री बने तो उनके सिर पर बाल बहुत कम रह गए थे लेकिन आज उनके बाल लहराते हुए देखे जा सकते हैं.

प्रधानमंत्री के रूप में सोते हुए एच डी देवेगौड़ा की तस्वीर ने उनकी एक ऐसे छवि बना दी जिससे वो कभी उबर नहीं पाए.

इसी तरह राहुल गांधी की वो तस्वीर जिसमें वो प्लास्टिक का एक नया नवेला तसला लिए हैं और लोहे का एक गंदा तसला लिए एक गरीब मजदूर महिला के पीछे पीछे चले जा रहे हैं, वो उनका पीछा कभी नहीं छोड़ेगी.

जो तस्वीर राहुल की मेहनत की मिसाल बन सकती थी वो मज़ाक का विषय बन गई.

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