जो नरेंद्र मोदी की नज़र में 'दुश्मन' हैं

 शनिवार, 13 अक्तूबर, 2012 को 07:55 IST तक के समाचार
नरेंद्र मोदी

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को बहुत लोग अपने लिए ख़तरनाक मानते हैं लेकिन नरेन्द्र मोदी किसको खतरे के रूप में देखते हैं.

कौन हैं "हिन्दू हृदय सम्राट" से "विकास पुरुष" बने नरेन्द्र मोदी के सच्चे दुश्मन.

केशुभाई पटेल : गुजरात के 84 वर्षीय इस लेहुआ पटेल नेता ने इस समय अपना पूरा जीवन नरेन्द्र मोदी को सत्ता से बाहर करने में झोंक रखा है.

एक ज़माने में नरेन्द्र मोदी केशुभाई पटेल के क़रीबी हुआ करते थे. अहमदाबाद टाइम्स ऑफ़ इंडिया के संपादक भरत देसाई कहते हैं, "केशुभाई नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ अपने जीवन का आखिरी संग्राम लड़ रहे हैं."

केशुभाई ने बीबीसी से खास बातचीत करते हुए कहा, "मेरी उम्र नहीं लेकिन मेरा स्वास्थ्य देखिए. नरेन्द्र मोदी के पास धन है और मेरे पास जन है."

केशुभाई यूं तो कहते हैं कि वो सरकार बनाने के लिए लड़ रहे हैं वोट काटने के लिए नहीं, लेकिन यहाँ हर कोई मानता है कि केशुभाई अगर किंगमेकर की भूमिका में हुए तो वो मोदी को हटाने की शर्त पर भाजपा को समर्थन देना पसंद करेंगे.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक अन्य संपादक अजय उमठ कहते हैं कि केशुभाई का कष्ट यह है कि उन्हें लगता है कि नरेन्द्र मोदी ने उन्हें वो सम्मान नहीं दिया जिस पर उनका हक़ था और उन्हें कदम-कदम पर अपमानित किया.

"मेरी उम्र नहीं लेकिन मेरा स्वास्थ्य देखिए. नरेन्द्र मोदी के पास धन है और मेरे पास जन है"

केशुभाई पटेल, नेता, गुजरात परिवर्तन पार्टी

संजय जोशी : एक ज़माने में नरेन्द्र मोदी और संजय जोशी दोनों दोस्त थे. पहले नरेन्द्र मोदी गुजरात भाजपा के संगठन महामंत्री बने बाद में संजय जोशी.

नरेन्द्र मोदी की ही तरह आरएसएस के प्रचारक संजय जोशी जो हाल ही मोदी की जिद के कारण पार्टी से निकाल फेंके गए हैं वो 14 -15 अक्टूबर को दक्षिणी गुजरात के उन इलाकों का दौरा करने वाले हैं जिन इलाकों से नरेन्द्र मोदी केशुभाई पटेल के काटे वोटों की भरपाई करना चाहते हैं.

नरेन्द्र मोदी की ही तरह संजय जोशी की भी गुजरात में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच खासी पकड़ मानी जाती है. जानकारों का मानना है कि मोदी उस समय से जोशी से नाराज़ हैं जब केशुभाई पटेल भाजपा में रहते हुए मोदी से लड़ रहे थे और जोशी पटेल के समर्थन में खड़े थे.

अजय उमठ, जो कि लंबे समय तक एक बड़े गुजराती दैनिक के संपादक थे, कहते हैं 2005 के मुंबई अधिवेशन के समय अचानक एक सीडी पत्रकारों को मिली जिसमें कथित रूप से संजय जोशी को किसी महिला के साथ आपत्तिजनक अवस्था में दिखाया गया था.

संजय जोशी को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और मध्य प्रदेश पुलिस ने जांच के बाद उस सीडी को फर्जी करार दिया.

अजय उमठ कहते हैं," पुलिस जांच में यह भी साबित हुआ था कि उस सीडी को बांटने में गुजरात पुलिस ने भूमिका निभाई थी."

जुलाई 2012 में दिल्ली के अखबारों में खबर छपी कि जोशी ने भारत के गृह मंत्री को पत्र लिख कर अपनी जान को ख़तरा होने की बात कही है.

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मोदी इन दिनों जमकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं

शंकरसिंह वाघेला : मोदी की तरह ही गुजरात भाजपा के एक कद्दावर नेता रहे वाघेला इन दिनों कांग्रेस में हैं. तेज़तर्रार वाघेला के बारे में भरत देसाई का कहना है, " वाघेला कांग्रेस में अकेले ऐसे नेता हैं जो मोदी और भाजपा को कमर के नीचे मार सकते हैं. चंद रोज़ पहले किसी पत्रकार ने उनसे पूछा की कांग्रेस ने राज्य में सत्ता में आने पर गाँवों में गरीबों को 100 गज का प्लॉट देने की बात कही है लेकिन ज़मीन आएगी कहाँ से. वाघेला ने कहा भाजपा के भ्रष्ट नेताओं की बेनामी ज़मीनों की कुर्की से. वाघेला सत्ता में आने के बाद अगर ऐसा कर दें अचरज नहीं होगा."

केशुभाई के मुख्यमंत्रित्व काल में नरेन्द्र मोदी के बढ़ते प्रभाव के कारण वाघेला ने विद्रोह कर दिया था जिसके कारण संजय जोशी को मोदी की जगह राज्य भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया. मोदी और वाघेला की दुश्मनी तब से चली आ रही है.

वाघेला पिछले लोकसभा चुनाव में हार गए थे और इस समय राज्य कांग्रेस की चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख हैं.

गोर्धन झड़फिया : गुजरात के पटेल नेता और केशुभाई पटेल और विश्व हिन्दू परिषद् के नेता प्रवीण तोगड़िया के बेहद नज़दीकी हैं. इन दिनों केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी के सदस्य हैं. झड़फिया साल 2002 में नरेन्द्र मोदी के पहले कार्यकाल में हुए दंगों के दौरान गृह राज्य मंत्री थे.

अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी ने उन्हें मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में नहीं लिया. करीब दो साल बाद एक विस्तार के दौरान उन्हें मोदी ने मंत्रिमंडल में शपथ ग्रहण के लिए बुलाया. जैसे ही उनका नाम पुकारा गया वो उठे और उन्होंने भरी सभा में सबके सामने हाथ जोड़ कर शपथ लेने से इनकार कर दिया और कहा कि उनके लिए मोदी के साथ काम करना असंभव है. भारत में यह शायद अपने किस्म का अकेला मामला है.

हरेन पंड्या : गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री रहे हरेन पंड्या एक ज़माने में नरेन्द्र मोदी के बेहद नज़दीकी थे. राजनीतिक पत्रकार अजय उमठ का कहना है कि पंड्या को पहला विधानसभा का टिकट दिलाने वाले मोदी थे. बाद में पंड्या केशुभाई पटेल और संजय जोशी के पक्के समर्थक हो गए और मोदी के राजनीतिक शत्रु.

साल 2003 में वो रहस्यमय हालात में अपनी कार में मृत पाए गए. कथित रूप से उनकी ह्त्या "चरमपंथियों" ने की थी, लेकिन उनकी हत्या के आरोप में पकड़े गए सभी लोगों को अदालत ने निर्दोष करार दे दिया. अभी तक यह नहीं पता लगा है कि उनकी हत्या के पीछे कौन था.

प्रमोद महाजन बीजेपी के ताकतवर नेता माने जाते थे

प्रवीण तोगड़िया : नरेन्द्र मोदी ही की तरह एक ज़माने में हिंदुत्व के पोस्टर ब्वॉय रहे प्रवीण तोगड़िया के बारे में भारत देसाई कहते हैं कि दोनों में अब बोलचाल भी नहीं है. तोगड़िया केशुभाई पटेल की ही तरह गुजरात के प्रभावशाली लेहुआ पटेल समुदाय से आते हैं.

भारत देसाई के अनुसार तोगड़िया मोदी से हिंदुत्व को छोड़ देने के कारण नाराज़ हैं और वो मानते हैं कि मोदी ने दंगों के बाद विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल कार्यकर्ताओं को दंगों के मुकदमों से निपटने के लिए अपने हाल पर छोड़ दिया और उनकी कोई मदद नहीं की.

प्रमोद महाजन : दिल्ली और अहमदाबाद का हर राजनीतिक पत्रकार मानता है कि अगर भारतीय जनता पार्टी के महासचिव रहे प्रमोद महाजन जीवित होते तो आज शायद मोदी पार्टी के भीतर इतने बड़े ना होते जितने की वो हैं. साल 2006 में महाजन के छोटे भाई प्रवीण ने उनकी हत्या कर दी.

मोदी की ही तरह महाजन संगठन पर बहुत मज़बूत पकड़ रखते थे और उनकी ही तरह वो भी देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होने की अभिलाषा रखते थे.

आज मोदी की बड़ी ताकत माने जाने वाले कई उद्योगपति महाजन के अभिन्न मित्र थे. जब तक महाजन जीवित रहे तब तक पार्टी के भीतर मोदी कभी पूरी तरह से अपने मन मुताबिक़ बर्ताव नहीं कर पाए.

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