बॉयो-डाइवर्सिटी के सरंक्षण लिए पांच करोड़

 मंगलवार, 16 अक्तूबर, 2012 को 22:41 IST तक के समाचार
मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह ने जैव विवधता को एक पूंजी निवेश बताया है.

भारत ने ये घोषणा की है कि वो जैव विविधता की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आगामी दो वर्षों में पांच करोड़ डॉलर का निवेश करेगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये घोषणा हैदराबाद में हो रहे संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता सम्मेलन के अधिवेशन में की.

इस उच्च स्तरीय अधिवेशन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि यह राशि न केवल देश के अंदर जैव विवधता के संरक्षण बल्कि दूसरे विकसित देशों में भी इस की क्षमता को बढा़ने पर खर्च की जाएगी.

जैव विविधता सम्मेलन के सचिव ब्राउलियो फ़ेरेरिया डिसूज़ा ने भारत की ओर से पांच करोड़ डॉलर खर्च किए जाने की घोषणा का स्वागत किया और कहा की इससे दूसरे देशों को एक स्पष्ट संदेश मिलेगा.

कदम

उन्होंने कहा की जैव विविधता के संरक्षण पर होने वाले खर्च को एक बोझ नहीं समझना चाहिए बल्कि वो एक पूंजी निवेश है जो भविष्य में लाभ पहुंचाएगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में जैव विविधता का संरक्षण लोगों की आजीविका या रोज़गार से जुड़ा हुआ है और यह भारत की संस्कृति का एक भाग रहा है.

उन्होंने कहा की देश में कृषि और दवाओं के पारंपरिक तरीके पौधों और पशुओं की जैव विविधता पर निर्भर है.

"एक ओर सरकार कह रही है की जैव विवधता का संरक्षण केवल सरकार नहीं कर सकती और इसमें हर एक को भाग लेना होगा लेकिन दूसरी ओर ऐसा काम करने वाले समुदायों को सरकार उन का कोई हिस्सा नहीं देना चाहती. "

पी वी सतीश

उन्होंने 193 देशों से आए 5,000 से ज़्यादा प्रतिनिधियों को यह भी बताया की जैव विविधता के संरक्षण के लिए उनकी सरकार क्या प्रयास कर रही है. इनमें जंगल में रहने वालों को उनके साधनों पर अधिकार देने जैसे कदम उठाना भी शामिल है.

कथनी और करनी में अंतर

लेकिन इस अधिवेशन में भाग लेने वाली कई गैर सरकारी संगठनों ने कहा है की सरकारें जैव विवधता के संरक्षण के संबंध में बातें तो बहुत करती हैं लेकिन उनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर दिखाई देता है.

भारत में जैव विवधता संरक्षण अभियान के प्रमुख नेता और दक्कन डेवलपमेंट सोसाइटी के निदेशक पी वी सतीश ने कहा है की भारत सरकार की नीतियां उसकी इस वचनबद्धता के बिल्कुल विपरीत हैं की वो जैव विविधता के संरक्षण के मामले में गंभीर है.

उनका कहना था, "एक ओर सरकार कह रही है की जैव विवधता का संरक्षण केवल सरकार नहीं कर सकती और इसमें हर किसी को भाग लेना होगा लेकिन दूसरी ओर ऐसा काम करने वाले समुदायों को सरकार उनका कोई हिस्सा नहीं देना चाहती और न उनकी बात सुनना चाहती है. सरकार केवल वित्तीय हितों के अनुसार नीतियां बनाना चाहती है चाहे उसका जैव विविधता पर कुछ भी असर पड़े".

नुकसान

गैर सरकारी संगठन भारत जनविज्ञान जत्था के सौम्य दत्ता ने कहा की सरकार जैव विवधता के संरक्षण के विषय पर केवल बात कर रही है और उसकी नीतियां जैव विवधिता को नुकसान पहुंचा रही हैं.

उन्होंने कहा की हरियाणा में एक बहुत ही संवेदनशील इलाके में परमाणु बिजली केंद्र बनाया जा रहा है जिससे न केवल कृषि क्षेत्र को ज़बरदस्त नुकसान होगा बल्कि वन्य जीवन भी नष्ट हो जएगा.

दत्ता ने कहा की बाँध बनाए जाने के कारण हिमालय के क्षेत्रों में नदियां सूख रही हैं और कच्छ के इलाके में कोयले से बिजली बनाने के प्लांट से मछुवारों की आजीविका खतरे में पड़ गई है.

आगामी तीन दिनों में इस अधिवेशन में इसी सवाल पर सबसे ज़्यादा चर्चा होगी की कितने देश जैव विविधता के संरक्षण की लिए केवल बातें करने नहीं बल्कि पैसा लगाने के लिए तैयार हैं.

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