अब क्या करेंगे राणा वीरेंद्र सिंह?

गुजराती किसान राणा विरेन्द्र सिंह
Image caption वीरेन्द्र सिंह की आशा है कि उन्हें कहीं नौकरी मिल जाए क्यों कि अकेले नौकरी से उनकी गुजर होगी नहीं

राणा वीरेंद्र सिंह के पिता इन्द्र सिंह ने इस साल 29 अगस्त को अपने खेत में फाँसी लगा ली. पिछले कई सालों से समय पर और भरपूर हो रही बारिश और अपने खेत में बनी नहर के कारण उत्साहित इंद्र सिंह ने एक पुराना ट्रैक्टर ख़रीदा और बेटी की शादी के लिए 10 लाख रूपए क़र्ज़ लिया था.

बारिश नहीं हुई तो उनके 20 बीघा के खेत के ऊपर बनी नहर में हज़ार मिन्नतों और कोशिशों के बावजूद नर्मदा का पानी नहीं आया. ऐसे में उन्हें अपने सामने कोई रास्ता बचता नहीं दिखा.

पीछे रह गए बेटे राणा वीरेंद्र सिंह के साथ एक विधवा माँ, छोटा भाई और 12 लाख रुपयों से ज़्यादा का क़र्ज़ है और सामने पूरी ज़िंदगी पड़ी है.

कुछ दिन पहले आख़िरकार उनकी नहर में पानी आया है. खेत में लगे कपास के बचने की उम्मीद कम है लेकिन मरता क्या ना करता. वीरेन्द्र सिंह ने 28 हज़ार का और क़र्ज़ लिया और एक डीज़ल पम्प भी लिया ताकि खेत को सींच सकें.

क़र्ज़ के बारे में पूछने पर वीरेंद्र सिंह कहते हैं "क्या करेंगे.. ज़मीन बेचेंगे और सबका क़र्ज़ लौटाएंगे."

गुजरात के सबसे चमकीले शहर अहमदाबाद के नज़दीक ही बसे सुरेंद्रनगर ज़िले में मुख्य सड़क से ज़रा अंदर जाते ही किसान का दर्द यह है कि नर्मदा की मुख्य नहरें तो किसी ना किसी तरीक़े से काम कर रही हैं. लेकिन छोटी नहरें नदारद हैं या फिर सूखी पड़ी हैं.

ये वो छोटी नहरें हैं जिन्हें मुख्य नहर से दोनों तरफ़ कई किलोमीटरों तक खेतों में पानी ले जाना था.

इसे आप नरेंद्र मोदी का भाग्य कहिये या किसानों का भाग्य कि सितंबर के अंत में गुजरात में कुछ बारिश हो गई. इसकी वजह से किसान कम से कम अपनी उपज से कुछ पा सकने की उम्मीद कर सकता है.

खुशहाल लोग

इससे अलग अहमदाबाद शहर में रहने वाले वकील इक़बाल सैयद कहते हैं, " गुजरात की सड़कें देखिए किसी भी शहर में चले जाइए. आम आदमी क्या चाहता है कि उसकी गाड़ी ढंग से निकल जाए. उसे बिजली मिले और उसे कोई परेशान ना करे. नरेंद्र भाई की वजह से यह सब होता है."

लेकिन गुजरात में नरेंद्र मोदी को जाना जाता है तमाम अनुमानों और तर्कों को पछाड़ कर जीतने के लिए. सुरेंद्र नगर ज़िले के वड़ोद पंचायत के पूर्व सरपंच झला भाई कहते हैं, "नरेंद्र मोदी की वाणी में जादू है. वो जब भी सामने मीटिंग में या टीवी पर बोलता है तो लोगों को आशा हो जाती है की वो कुछ करेगा."

गुजरात के लोगों को अपनी मंशा बताने का मौक़ा मिलेगा 13 और 17 दिसम्बर को. तब तक नरेंद्र मोदी के पास बहुत मौक़ा है लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का.

भारत बड़ी अनोखी जगह है. यहाँ लोगों ने नरेंद्र मोदी का जादू चलते देखा है तो इंदिरा गाँधी से लेकर लालू प्रसाद यादव का तिलिस्म बनते और बिखरते हुए भी देखा है.

संबंधित समाचार