सत्यम घोटाला: राजू के 822 करोड़ ज़ब्त

राजालिंगा राजू
Image caption राजू का कहना है कि उन्होंने कंपनी को बचाने के लिए खातों में हेरफेर किया.

चार साल पुराने सत्यम कंप्यूटर घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने कंपनी के संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष रामालिंगा राजू और उनके परिवार के 822 करोड़ रूपए की राशि ज़ब्त करने के आदेश दिए हैं.

यह राशि सत्यम कंप्यूटर्स एंड सर्विसेस लिमिटेड के नाम पर चार बैंकों में जमा थी.

गुरुवार को हैदराबाद में प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है की ये राशि इसलिए ज़ब्त की जा रही है कि इसे अपराध द्वारा हासिल किया गया था.

निदेशालय के आदेश में कहा गया है कि रामालिंगा राजू और उनके परिवार ने सत्यम कंप्यूटर्स की आर्थिक स्थिति के बारे में झूठा प्रचार कर इस कंपनी के शेयर बहुत ज्यादा कीमत पर लोगों को बेचे या दूसरी कंपनियों के पास रखवाए.

इस तरह राजू और उनके परिवार ने कुल 2171.45 करोड़ रूपए हासिल किए और उस का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के खर्चों और कर्मचारियों के वेतन के लिए इस्तेमाल किया गया.

'खातों में हेराफेरी'

7 जनवरी 2009 को रामालिंगा राजू को उस समय गिरफ्तार किया गया था जब उनकी कंपनी में लगभग 8,000 करोड़ रूपए का घपला सामने आया था.

राजू ने कंपनी के अध्यक्ष के पद से ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि उन्होंने कंपनी को डूबने से बचाने के लिए उसके मुनाफे को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया और इसके लिए खातों में हेराफेरी की.

राजू के साथ उनके भाई रामा राजू और कंपनी के दूसरे कई लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया. हालांकि नवंबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने रामालिंग राजू को जमानत पर छोड़ दिया लेकिन उनकी परेशानियां अभी ख़त्म नहीं हुई हैं.

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने राजू और उनके परिवार की 34 जायदादों को ज़ब्त कर लिया जिनकी कीमत 250 करोड़ रूपए हैं. अब जो राशि जब्त की गई है वो सत्यम कंप्यूटर्स के नाम पर आंध्र बैंक, बैंक ऑफ बरोड़ा और कई दूसरे बैंकों में रखी गई थी.

इस घोटाले के बाद सत्यम कंपनी को महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप ने खरीद लिया था जिसके बाद उसका नाम महिंद्रा सत्यम हो गया. लेकिन अभी वो उस ऊंचाई को छू नहीं सकी है जहां वो इस घोटाले से पहले थी.

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