जैव विधिधता के लिए पैसे देने पर मतभेद

बायो
Image caption जैव विविधता सम्मेलन पर विश्व दो हिस्सों में बंटा

हैदराबाद में चल रहा संयुक्त राष्ट्र का जैव विविधता सम्मेलन गुरूवार को विकसित और विकासशील देशों के बीच गतिरोध के साथ खत्म हो गया.

गतिरोध इस बात पर था कि जैव विविधता के संरक्षण के लिए विकसित और विकासशील देशों की ओर से कितनी आर्थिक सहायता दी जा सकती है.

इस सम्मेलन में जैव विविधता के भविष्य के लिए 30 प्रस्तावों पर विचार हुआ. इनमें से 28 पर सभी ने अपनी मुहर लगा दी. जिन दो पर सहमति नहीं बन पाई वे दोनों जैव विविधता को आर्थिक सहायता देने से संबंधित थे.

अगला सम्मेलन 2014 में दक्षिण कोरिया में होगा.

आर्थिक मदद की मांग

19 दिनों से चली इस कांफ्रेंस में विकासशील देशों के ग्रुप -77 की मांग थी कि विकसित देश आर्थिक योगदान बढ़ाए. लेकिन विकसित देश और विशेषकर यूरोपियन यूनियन के सदस्य इसे मानने के लिए तैयार नहीं हुए.

विकसित देशों के कुछ प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि वे आर्थिक सहायता में और बढ़ावा नहीं कर सकते क्योंकि वे खुद इस समय आर्थिक कठिनाइयों से गुज़र रहे हैं.

इस कांफ्रेंस के प्रवक्ता डेविड ऐनस्वर्थ ने पत्रकारों से कहा है कि आखिरी क्षण तक भी सदस्य देशों के बीच अनौपचारिक बातचीत जारी थी और इस गतिरोध को दूर करने के प्रयास किए गए.

गतिरोध

इस गतिरोध के चलते ही इस कांफ्रेंस का अंतिम सेशन निर्धारित समय से काफ़ी देर बाद शुरु हुआ लेकिन इसे फिर रोक देना पड़ा.

अब तक केवल भारत और जर्मनी ने ही स्पष्ट घोषणा की है कि वे कितना पैसा खर्च करने के लिए तैयार हैं.

भारत ने कहा है कि वे देश के अन्दर जैव विविधता संरक्षण पर और इस काम के लिए विकासशील देशों की सहित के लिए पाँच करोड़ डॉलर खर्च करेगा.

जबकि जर्मनी ने कहा है कि वो 2013-14 के दौरान विश्व भर में जंगलों के संरक्षण के लिए 50 करोड़ डॉलर देगा.

भारत ने सुझाव रखा है कि 2015 तक के लिए विकसित देश जैव विविधता के संरक्षण के लिए अपनी सहायता दोगुनी कर दें.

भारत अब इस 'कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़' का अध्यक्ष बन गया है और आगामी दो वर्ष तक यह पद संभालेगा.

भारत का कहना है कि इस के लिए 2006 से 2010 देश के बीच दी गई सहायता के अवसत या मध्यमान को आधार बनाया जाए. लेकिन इस का अर्थ यह होगा कि विकसित देशों को फिर 2020 तक हर दो वर्ष बाद अपनी सहायता बढ़ानी होगी और वे देश उस के लिए तैयार नहीं हैं.

इस के बदले में भारत ने अपने सुझाव में ने कहा है कि खुद विकासशील देश भी कुछ कड़े कदम उठाते हुए इस काम के लिए अपना खुद का खर्च भी बढ़ाएंगे.

लक्ष्य निर्धारित करने की मांग

विकसित देशों की एक और मांग को पूरा करते हुए भारत ने यह सुझाव भी रखा है कि विकासशील देश 2014 तक यह लक्ष्य निर्धारित करें कि वे जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने वाली सब्सिडी को कब तक ख़त्म करेंगे.

विकसित देश मांग कर रहे हैं कि पहले विकासशील देश जैव विविधता के संरक्षण के कामों की निगरानी के लिए एक शक्तिशाली नियंत्रण व्यवस्था बने और यह भी बताएँ कि उन्हें मिलने वाली सहायता कहाँ खर्च की जा रही है.

इस कांफ्रेंस में जैव विविधता संरक्षण के लिए 2020 तक के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ज़रूरी आर्थिक साधन जुटाने पर ही सब का ध्यान केंद्रित रहा लेकिन इतनी लम्बी बातचीत के बाद भी उस का कोई हल सामने नहीं आया है.

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