कानून रोकेगा कामकाजी महिलाओं का यौन उत्पीड़न?

 शनिवार, 20 अक्तूबर, 2012 को 05:57 IST तक के समाचार

सुप्रीम कोर्ट काम के स्थान पर यौन शोषण की घटनाओं से परेशान है.

सुप्रीम कोर्ट ने भारत की सभी राज्य सरकारों को काम के स्थान पर यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए जारी किए गए निर्देशों को लागू करने और उसके लिए उचित कानूनी तंत्र बनाने को कहा है.

15 वर्ष पहले यौन उत्पीड़न के एक मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों को रोकने और ऐसी शिकायतों की सुनवाई के लिए कुछ निर्देश बनाए थे जिन्हें विशाखा निर्देश के नाम से जाना जाता है.

शुक्रवार को तीन सदस्यीय पीथ के जस्टिस आरएम सोधा ने कहा कि, “दिखावटी बातें, खोखले बयान और अपर्याप्त कानून महिलाओं के उत्थान के लिए काफी नहीं हैं, इसके लिए राज्य सरकारों को कानून में बदलाव लाना होगा.”

एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, “विशाखा निर्देश केवल उस समय तक के लिए थे जब तक सरकारें यौन उत्पीड़न पर कानून नहीं लातीं, लेकिन निर्देशों के भी लागू ना होने की वजह से महिलाओं को अपने कार्यस्थलों पर मूल अधिकार भी नहीं मिल रहे.”

शिकायत समिति

विशाखा निर्देश

  • हर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने और ऐसे मामलों की सुनवाई का प्रबंध करने की ज़िम्मेदारी मालिक और अन्य ज़िम्मेदार या वरिष्ठ लोगों की हो.
  • निजी कंपनियों के मालिकों को अपने संस्थानों में यौन शोषण पर रोक के विशेष आदेश दें.
  • यौन उत्पीड़न की सुनवाई के दौरान पीड़ित या चश्मदीद के खिलाफ पक्षपात या किसी भी तरह का अत्याचार ना हो.
  • इस सबके लिए एक महिला की अध्यक्षता में एक शिकायत समिति बने जिसके सदस्यों में महिला संगठनों के प्रतिनिधि भी हों.

वर्ष 1997 में राजस्थान सरकार के एक कल्याणकारी कार्यक्रम में काम करनेवाली भंवरी देवी ने जब बाल विवाह का विरोध किया तो गूजर समुदाय ने उनकी आवाज़ दबाने के लिए उनका सामूहिक बलात्कार किया था.

इस मामले पर फैसला सुनाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों और उपक्रमों में यौन उत्पीड़न के अपराधों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे.

ताज़ा याचिका में इन दिशा-निर्देशों का दायरा बढ़ाने की मांग की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने अब अलग-अलग पेशों को नियंत्रिक करने वाले नियामकों से यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने के लिए शिकायत समितियां बनाने को कहा है.

कोर्ट ने कहा, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नाते हमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा से लड़ना होगा, घर और बाहर, सभी जगह उनकी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए संसद को कानून में ज़रूरी बदलाव लाने चाहिएं.”

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