कौन देता है कृत्रिम अंगों का सहारा?

 शनिवार, 27 अक्तूबर, 2012 को 10:13 IST तक के समाचार
शैलेश श्रीवास्तव

शैलेश श्रीवास्तव ने देश-विदेश में कई जगहों पर काम किया है

पिछले कुछ समय से बीबीसी हिंदी सेवा आपकी मुलाकात कुछ ऐसे पेशेवर लोगों से करवा रही है जो लीक से हटकर काम करते हैं या वे ऐसे पेशे से जुड़े हैं जिनके बारे में आम लोगों के पास काफी कम जानकारी है लेकिन ये काम काफी महत्वपूर्ण होते हैं.

इसी कड़ी में बीबीसी संवाददाता स्वाति अर्जुन ने बातचीत की पेशे से प्रोस्थेटिस्ट और ऑर्थोटिस्ट शैलेश श्रीवास्तव से-

शैलेश विस्तार से बताएं कि एक प्रोस्थेटिस्ट या ऑर्थोटिस्ट का मूल काम क्या होता है और किन-किन जगहों पर उनकी ज़रुरत होती है?

मैं ये बताना चाहूँगा कि जो प्रोस्थेटिस्ट शब्द है उसे आम बोल-चाल की भाषा में कृत्रिम अंग कहा जाता है और ऑर्थोटिस्ट एक्सटर्नल सपोर्ट सिस्टम को बोला जाता है.

ये एक्सटर्नल डिवाइस या उपकरण होते हैं जो हमारे शरीर की विकृति या विकलांगता को सहारा देती है. इस काम में हम उन लोगों की मदद करते हैं जो किसी हादसे की वजह या जन्म से ही शारीरिक विकृति का शिकार हो जाते हैं और उनके शरीर को ऑपरेट कर यंत्र लगाते हैं ताकि वो सामान्य जीवन जी सकें.

ऑर्थोटिस्ट प्रक्रिया के दौरान हम मरीज़ के शरीर के बाकी बचे हिस्सों का माप लेते हैं और उन्हें एक्सटर्नल सपोर्ट देते हैं. जैसे किसी पोलियोग्रस्त व्यक्ति को कृत्रिम कैलिपर्स लगाना. ये पूरी प्रक्रिया मेज़रमेंट, फैब्रीकेशन और फिटिंग में पूरी होती है.

एक प्रोस्थेटिस्ट या ऑर्थोटिस्ट के तौर पर आपने कहां-कहां काम किया है?
मैंने सरकारी संस्था डिस्ट्रिक्ट डिसअबिलिटी रिहैबिलिटेशन सेंटर में काम किया है. कुछ गैर-सरकारी संस्था, कॉरपोरेट हाउस और अंतरराष्ट्रीय संस्था हैंडीकैप इंटरनेश्नल में रहकर देश-विदेश में कई जगहों पर काम किया है.

आपने कब और कैसे तय किया कि आपको प्रोस्थेटिस्ट या ऑर्थोटिस्ट ही बनना है?
जब मैं 12वीं की परीक्षा पास कर के प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी कर रहा था तब ही मुझे इस पढ़ाई की जानकारी हुई. चूंकि ये एक बहुत ही अच्छा करियर ऑपशन था और इसमें सामान्य क्षेत्र से कुछ अलग था इसलिए मैंने इसमें ही करियर बनाने का फैसला कर लिया.

क्या इस पेशे में इतना पैसा है कि आप आत्मनिर्भर हो सके?

निश्चित रूप से इस पेशे में इतना पैसा है कि आप अच्छी तरह से आत्मनिर्भर हो सके. इसमें नौकरी तो मिलती ही है, आप प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर सकते हैं. सरकारी नीतियां भी इन कामों को बढ़ावा दे रही है. दुनियाभर में जो तरह-तरह की आपदा आती है, लड़ाईयां होती हैं और जो लोग सामाजिक कुरीतियों के शिकार होते हैं उस कारण एक प्रोस्थेटिस्ट और ऑर्थोटिस्ट की काफी मांग है.

"इस पेशे में इतना पैसा है कि आप अच्छी तरह से आत्मनिर्भर हो सके. इसमें नौकरी तो मिलती ही है, आप प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर सकते हैं. सरकारी नीतियां भी इन कामों को बढ़ावा दे रही है."

शैलेश श्रीवास्तव, ऑर्थोटिस्ट व प्रोस्थेटिस्ट

एक मरीज़ या क्लाईंट जब आपके पास आता है तब आप कैसे तय करते हैं कि उसको आपकी कितनी हद तक और किस तरह की मदद की ज़रुरत है. सबसे ज़्यादा किस बात का ध्यान रखते हैं आप?

किसी भी मरीज़ का इलाज शुरु करने से पहले हम सबसे ज्य़ादा जिस चीज़ पर ध्यान देते हैं वो होता है उनका भोगौलिक और सामाजिक वातावरण एवं पृष्टभूमि. इसके अलावा हमें एक और चीज़ जिस पर ध्यान देता है वो होता है उनकी एक्टिविटी लेवल या क्रियाशीलता का स्तर. इन तीनों बिंदुओं के आधार पर ही हम ये तय करते हैं कि हमें क्लाईंट का इलाज आगे किस तरह से करना है.

एक प्रोस्थेटिस्ट या ऑर्थोटिस्ट बनने के लिए किस तरह के गुण या शिक्षा की ज़रुरत होती है?
सबसे पहले तो इसमें साइंस बैकग्राउंड की शिक्षा होनी बेहद ज़रुरी होती है क्योंकि पैरामेडिकल स्तर की पढ़ाई होती है. इसके लिए हमारी सोच तकनीकी होनी चाहिए. इसके अलावा बेहतर तार्किक और संवाद शक्ति भी ज़रूरी है.

क्या कोई कॉलेज या संस्थान किसी इंसान को ये काम सिखा सकती है या ये एक स्वाभाविक कला है जो सिखाई नहीं जा सकती..या फिर दोनों का मिश्रण?
जी हां, दिल्ली..मुंबई..कोलकाता और कटक में ऐसी कई राष्ट्रीय संस्थाएं हैं जहां इसकी शिक्षा दी जाती है. कुछ निजी संस्थाएं भी इस क्षेत्र में आई हैं. इसके अलावा कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनका प्रशिक्षण भी दिया जाता है. ये ट्रेनिंग ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रैजुएशन स्तर पर दी जाती है.

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