मनमोहन मंत्रिमंडल पर दिखेगी राहुल की छाप?

मनमोहन सिंह और राहुल गाँधी
Image caption राहुल गांधी के भी कैबिनेट में शामिल होने की चर्चा थी

केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.

शुक्रवार को विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के त्यागपत्र से शुरू हुआ सिलसिला दूसरे दिन यानी शनिवार को भी जारी रहा और देर शाम तक कैबिनेट और राज्य मंत्रियों को मिलाकर सात मंत्रियो ने त्यागपत्र दे दिया है.

राष्ट्रपति कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रणव मुखर्जी ने सात मंत्रियों के इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए हैं.

शपथ-ग्रहण समारोह सुबह के साढ़े ग्यारह बजे दिन में है.

जिन मंत्रियों ने इस्तीफ़े सौंपे हैं वे हैं- विदेश मंत्री एसएम कृष्णा, सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक, पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय, आदिवासी मामलों को राज्य मंत्री माधव सिंह खंडेला, जल संसाधन और अल्पसंख्यक राज्य मंत्री विंसेंट पाला और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री अगाथा संगमा.

युवाओं को मौक़ा

शनिवार को दिए गए एसएम कृष्णा के बयान ने काफ़ी दिनों से राजनीतिक हलकों में चल रही इस चर्चा को और हवा दे दी है कि मंत्रिमंडलीय फेरबदल में युवाओं को और अधिक ज़िम्मेदारी सौंपी जाएगी.

एसएम कृष्णा ने कहा, "ये मौसम युवाओं का है. त्यागपत्र के पीछे भी मक़सद यही है कि युवा और अधिक ज़िम्मेदारी संभालें."

मध्य प्रदेश से आने वाले युवा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान के सांसद और संचार और सूचना राज्य मंत्री सचिन पायलट को और बड़ी ज़िम्मेदारी देने की अटकलें हैं.

राहुल गांधी की छाप

हालांकि पहले ये भी कहा जा रहा था कि पार्टी महासचिव और कांग्रेस अध्यक्ष के बेटे राहुल गांधी भी सरकार में शामिल होंगे लेकिन अब इस संभावना से इनकार किया जा रहा है.

समाचार पत्र बिजनेस स्टैंडर्ड की राजनीतिक संपादक अदिति फड़नीस का कहना है कि राहुल गांधी के सरकार में शामिल होने की बात मुमकिन नहीं है.

अदिति फड़नीस ने कहा, "राहुल गांधी के सरकार में शामिल होने से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए दिक्क़तें पैदा हो जाएंगी. मान लें कि राहुल गांधी किसी योजना को लागू करना चाहते हैं लेकिन मनमोहन सिंह को वो ठीक नहीं लगता तो उनके लिए राहुल गांधी को मना करने में मुश्किल होगी."

उनका मानना है कि "वो सरकार में तभी शामिल होंगे जब सरकार की बागडोर उनके हाथों में होगी."

लेकिन विश्लेषकों का एक वर्ग ऐसा भी है जो मान रहा है कि युवाओं को आगे बढ़ाने का मतलब है राहुल के आगमन की तैयारी क्योंकि युवाओं को आगे बढ़ाने में उनकी हामी शामिल है.

सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक को पार्टी के कामों में लगाने की बात कही जा रही है.

इसे भी मिशन 2014 चुनाव के तौर पर देखा जा रहा है.

संबंधित समाचार