बिना सेट टॉप बॉक्स टीवी पर छाएगा अंधेरा

  • 30 अक्तूबर 2012
टीवी देखते लोग

डिजिटल होइए या फिर टीवी मत देखिए! यही वो संदेश है जो भारत सरकार देश के लाखों-करोड़ों टीवी दर्शकों को पिछले कुछ दिनों से देती आ रही है.

टीवी पर आनेवाले विज्ञापन से लेकर मोबाइल संदेशों में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई को दर्शकों को लगातार ये बताया जा रहा है कि एक नवंबर, 2012 से भारत डिजिटल हो जाएगा. ये भारत सरकार की योजनाओं का पहला चरण है जिसके तहत देश को दिसंबर 2014 तक पूरी तरह डिजिटल बना दिया जाना है.

भारत दुनिया के सबसे बड़े टीवी बाज़ारों में से एक है लेकिन घरों में जिन केबल के ज़रिए टेलीविज़न सिग्नल पहुंचाए जाते हैं उनमें से ज्यादातर एनालॉग हैं.

लेकिन भारत सरकार के नए क़ानून - द केबल टेलीविज़न नेटवर्क्स (नियमन) संशोधन बिल 2011 में ये प्रावधान किया गया है कि सभी टीवी ऑपरेटरों को टीवी सिग्नलों को डिजिटल स्वरूप में घरों तक पहुंचाना होगा.

टीवी देखने के लिए दर्शकों के लिए ये ज़रूरी हो जाएगा कि या तो वो केबल ऑपरेटर से सेट टॉप बॉक्स लगवाएं या फिर डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) सेवा लें.

मुंबई के जितेंद्र घोसालकर जैसे लाखों टीवी दर्शकों के लिए अब ज़रूरी हो जाएगा कि वो ऐसा सेट टॉप बॉक्स ख़रीदें जो डिजिटल सिग्नल को स्वीकार कर सके.

Image caption नए क़ानून के अंतर्गत डीटीएच के ज़रिए भी टीवी देखा जा सकेगा

मुंबई के जोगेश्वरी इलाक़े में रहनेवाले जितेंद्र सालों से टीवी देखने के लिए केबल का इस्तमाल करते हैं लेकिन मानते हैं कि सेट टॉप बॉक्स की क़ीमत लगभग एक हज़ार रूपए है जो वो आमतौर पर व्यय करना पसंद नहीं करते.

“हमारे पास और कोई विकल्प ही नहीं है. सरकार हमें बाध्य कर रही है कि हम न चाहते हुए भी सेट टॉप बॉक्स ख़रीदें. ये ठीक नहीं है क्योंकि इसके लिए हमें अलग से पैसे ख़र्च करने होंगे.”

डिजिटल होना ज़रूरी क्यों?

ग्राहकों के लिए डिजिटल होने का सीधा मतलब है ज्यादा सामग्री का उपलब्ध होना. सरकारी नियामक के मुताबिक़ डिजिटाइज़ेशन के बाद टीवी दर्शकों को सौ रुपए में कम से कम सौ 'फ्री टू एयर' चैनल देखने को मिलेंगे.

टीवी उद्योग में जिन लोगों का पैसा लगा है उनके लिए सेट टॉप बॉक्स अपनाने के कई कारोबारी फ़ायदे हैं. डिजिटल प्लैटफॉर्म से उद्योग में ज्यादा पारदर्शिता आएगी. सरकार, ऑपरेटर और प्रसारक - इन सभी को ये आसानी से पता चल सकेगा कि कितने लोग टीवी देख रहे हैं और वो क्या देख रहे हैं. इसका सीधा मतलब है कि इन सभी को ज्यादा राजस्व मिल सकेगा.

'इनकेबल' जैसी कंपनियां इस बदलाव की तैयारी कई वर्षों से करती आ रही हैं.

कंपनी ने मुंबई के अपने मुख्य नियंत्रण कक्ष में इस बदलाव के लिए एक नया उपकरण 'डिजिटल हेडएंड्स' लगाया है ताकि प्रसारकों ने जो सिग्नल उपग्रह तक भेजा है उसे डाउनलोड किया जा सके.

तकनीक में बदलाव

तकनीक में इस बदलाव का मतलब ये होगा कि वर्तमान में 100 चैनलों के मुक़ाबले ऑपरेटर अब हज़ार तक चैनल दिखा सकेंगे जो कि केबल ऑपरेटरों के लिए भी मुनाफ़े का सौदा होगा. इनकेबल के माधव बेटगेरी कहते हैं,"अभी हम ग्राहकों की संख्या के बारे में कुछ नहीं कह सकते. डिजिटाइजेशन के बाद हर घर में एक सेट टॉप बॉक्स लग जाएगा. एक बार जब सेट टॉप बॉक्स लग जाएगा तो हमें पता लग जाएगा कि ग्राहक सक्रिय है और उसके बाद हम उसकी ज़रूरत के मुताबिक़ उससे चार्ज करेंगे."

एक शिकायत ये भी की जाती है कि स्थानीय केबल ऑपरेटर प्राय: ग्राहकों की संख्या की सही जानकारी नहीं देते ताकि फीस की रक़म और सरकारी कर से बचा जा सके.

सेट टॉप बॉक्स का सबसे ज़्यादा फ़ायदा प्रसारकों का होगा जो अपनी कमाई के लिए पूरी तरह विज्ञापन पर निर्भर करते हैं.

Image caption मौजूदा व्यवस्था में ज्यादातर घरों में एनालॉग तकनीक के ज़रिए टीवी देखा जाता है

डिजिटाइजेशन के बाद केबल ऑपरेटरों को अपनी कमाई साझा करनी हो पड़ेगी.

लेकिन जो लोग वहन कर सकते हैं उनके लिए 'डायरेक्ट टू होम' एक और विकल्प है.

फ़ायदा

भारत में 15 करोड़ से ज़्यादा टेलीविज़न देखने वाले घर हैं जिनमें से 25 फीसदी घरों में डीटीएच लगा है जबकि 51 फीसदी घरों में लोग केबल टीवी के ज़रिए कार्यक्रम देखते हैं.

Image caption एक नवंबर से घरों तक टीवी कार्यक्रम डिजिटल हेडएंड्स के ज़रिए पहुंचेंगे

ऐसे में डीटीएच ऑपरेटर ये मानते हैं कि डिजिटाइजेशन के बाद उनकी ग्राहक संख्या बढ़ जाएगी. शशि अरोड़ा एयरटेल डीटीएच के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं. वो कहते हैं, " हमारी लागत में जो असंतुलन था वो अब बराबर हो जाएगा. हम लाइसेंस फीस और कर के रूप में सरकार को ज्यादा राशि देते हैं जबकि केबल टीवी कंपनियां हमारे मुक़ाबले काफ़ी कम पैसे की अदायगी करती हैं. ये जो असंगति है वो अब शायद ख़त्म हो जाएगी."

एक आकलन के मुताबिक़ डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया में क़रीब पांच अरब डॉलर का ख़र्च आएगा.

लेकिन सरकार को लगता है कि टीवी दर्शक अगर आज एक छोटा सा निवेश करेंगे तो भविष्य की तस्वीर काफ़ी सुनहरी होगी.

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