राजनेताओं को चाहिए 'प्रेम की पाठशाला'

 बुधवार, 31 अक्तूबर, 2012 को 15:23 IST तक के समाचार
शशि थरूर-सुनंदा

हाल ही में शशि थरूर की केंद्रीय मंत्रिमंडल में दोबारा वापसी हुई है

केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी पर गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी और फिर थरूर का मोदी को दिया गया जवाब आजकल न सिर्फ राजनीतिक हलकों में बल्कि सोशल मीडिया में भी चर्चा का अहम मुद्दा बना हुआ है.

नरेंद्र मोदी ने शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर को एक चुनावी सभा में 50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड करार दिया था, तो थरूर ने भी ट्विटर के जरिए मोदी को सलाह दे दी कि प्रेम की कोई कीमत नहीं होती.

थरूर ने ये भी कहा है कि इस बात को वो व्यक्ति कैसे समझ सकता है जिसने कभी प्रेम ही नहीं किया है.

ट्विटर में शशि थरूर ने मोदी को प्रेम करने की नसीहत भी दी है. गौरतलब है कि गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र अविवाहित हैं.

"इस बारे में मोदी की भाषा पर सवाल जरूर उठ सकते हैं, लेकिन उन्होंने कुछ ग़लत कहा हो, मैं ये नहीं मानता."

पुष्पेश पंत, राजनीतिक विश्लेषक

लेकिन सवाल उठता है कि इस तरह की व्यक्तिगत बातों पर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा करना क्या उचित है.

राजनीतिक विश्लेषक पुष्पेश पंत का कहना है, “इस बारे में मोदी की भाषा पर सवाल जरूर उठ सकते हैं, लेकिन उन्होंने कुछ ग़लत कहा हो, मैं ये नहीं मानता.”

पुष्पेश पंत तो खुद नरेंद्र मोदी से आगे बढ़कर गालिब के एक शेर की पैरोडी के ज़रिए थरूर पर टिप्पणी करते हैं, “इश्क ने इनको निकम्मा कर दिया, वरना शशि थरूर आदमी थे काम के. बस हमसे ये न पूछिए कि किस काम के थे और किसके काम के थे.”

पुष्पेश पंत कहते हैं कि राजनीतिक व्यक्ति के बारे कुछ भी ‘निजी’ कहना ठीक नहीं. ये उस व्यक्ति के जीवन का हिस्सा है, उसे आप अलग नहीं कर सकते.

प्रेम की पाठशाला

ये तो रही पुष्पेश पंत की बात, जो थरूर पर मोदी की टिप्पणी को गलत नहीं मानते. लेकिन दूसरा सवाल है जो थरूर ने मोदी के लिए उठाया है कि उन्हें प्रेम की पाठशाला में दाखिला लेने की जरूरत है, उस पर भी सोशल मीडिया में जमकर चर्चा हो रही है.

थरूर की इस नसीहत के बारे में जब बीबीसी ने प्रेमी जोड़ों को सुरक्षा मुहैया कराने वाले एक संगठन ‘लव कमांडो’ के संयोजक संजय सचदेवा से बात की तो उन्होंने बेहद दिलचस्प जवाब दिया.

"भारत के किसी भी राजनीतिक दल के चुनावी एजेंडे में प्रेमियों के अधिकारों के संरक्षण की बात नहीं है. इसका दुष्परिणाम ये है कि नौजवानों का राजनीति से मोह भंग हो रहा है"

संजय सचदेवा, लव कमांडो के संयोजक

सचदेवा का कहना था कि सिर्फ नरेंद्र मोदी को ही नहीं बल्कि हिन्दुस्तान के सभी नेताओं को प्रेम के प्रशिक्षण की जरूरत है.

सचदेवा का संगठन ऐसे प्रेमी जोड़ों को सुरक्षा और कानूनी सहायता मुहैया कराता है जो प्रेम विवाह तो कर लेते हैं लेकिन सामाजिक तौर पर इसके लिए उन्हें धमकियां दी जाती हैं.

वो कहते हैं, "भारत के किसी भी राजनीतिक दल के चुनावी एजेंडे में प्रेमियों के अधिकारों के संरक्षण की बात नहीं है. इसका दुष्परिणाम ये है कि नौजवानों का राजनीति से मोह भंग हो रहा है."

संजय सचदेवा कहते हैं कि अगर नरेंद्र मोदी प्रेम के बारे में ऐसी टिप्पणी कर रहे हैं और उसकी कीमत लगा रहे हैं तो इससे ये साबित होता है कि उनका गुजरात की जनता से कोई प्रेम है ही नहीं.

वो कहते हैं कि जब तक मोदी प्रेम के गहरे अर्थ को नहीं जानते तब तक वो जनता की सेवा नहीं कर सकते. गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में एक जनसभा के दौरान मोदी ने कहा था कि यूपीए के एक मंत्री को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड के कारण पद छोड़ना पड़ा था. आज भी आरोप कायम हैं, लेकिन उन्हें फिर मंत्री बना दिया गया.

हालांकि मोदी ने शशि थरूर का नाम नहीं लिया था, लेकिन इस बात को समझने में किसी को परेशानी नहीं हो सकती कि ये टिप्पणी शशि थरूर पर की गई थी.

शशि थरूर ने इसके जवाब में ट्विटर पर लिखा, “मेरी पत्नी बेशकीमती हैं, आपके अनुमान से कहीं ज्यादा. लेकिन इसे समझने के लिए आपको किसी से प्रेम करना होगा.'”

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