नारी कब तक तुम श्रद्धा हो.....

  • 1 नवंबर 2012
शशि थरूर और सुनंदा

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के धुर विरोधी आइपीएस अफसर संजीव भट्ट ने ट्विटर पर सवाल पूछा –क्या किसी और ने भी आत्मविश्वास भरी महिलाओं के खिलाफ न.मो. के युद्ध पर ध्यान दिया? तीस्ता, सोनिया, ज़किया, कमला ...अब सुनंदा.

केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर को जबसे नरेंद्र मोदी ने ‘50-करोड़ की गर्लफ्रेंड’ का खिताब दिया, तभी से ये सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या मोदी अपने विरोधियों में से सिर्फ महिलाओं को चुन-चुन कर निशाना बनाते हैं?

गुजरात के दंगों के लिए नरेंद्र मोदी की जिम्मेदारी तय करने के लिए अदालती लड़ाई लड़ रही कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़, दंगों में मारे गए काँग्रेसी सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़किया जाफ़री, गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल के साथ साथ सोनिया गाँधी के खिलाफ नरेंद्र मोदी के तीखे बयान आते रहे हैं.

पर महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक बयान देने वाले नरेंद्र मोदी अकेले राजनेता नहीं हैं.

अभी हाल ही में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने खाप नेताओं के इस विचार का समर्थन किया था कि लड़कियों को बलात्कार से बचाने के लिए उनकी शादी 16 वर्ष की उम्र में ही कर देनी चाहिए.

माफीनामा

कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को भी महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बयान देने के बाद माफी माँगनी पड़ी थी. पिछले दिनों टी-20 क्रिकेट में मिली जीत की तुलना उन्होंने नई नई पत्नी से कर दी.

उन्होने कहा, “नई नई जीत और नई नई शादी, इसका अपना अलग महत्व होता है. जैसे जैसे समय बीतेगा, जीत की यादें पुरानी होती जाएंगी. जैसे जैसे समय बीतता है पत्नी पुरानी होती जाती है, वो मज़ा नहीं रहता है.”

महिलाओं के बारे में विवादास्पद बयान देने वालों में महिला नेता भी शामिल हैं.

महिलाओं के साथ बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने फेसबुक पर ये टिप्पणी की थी: “पहले लड़के-लड़कियाँ अगर एक दूसरे के हाथों में हाथ लेते थे तो उनके माता पिता उन्हें पकड़ लेते थे और डाँटते थे पर अब सब कुछ खुला है, खुले बाज़ार में खुले विकल्पों की तरह.”

कई साल पहले जनता दल (यूनाइटेड) के नेता शरद यादव ने भारत की राजनीतिक शब्दावली में सड़कछाप शब्द “परकटी” का इस्तेमाल करके विवाद पैदा कर दिया था.

उन्होंने छोटे बाल रखने वाली आधुनिक महिलाओं को इस विशेषण से पुकारा था और संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया था.

बाल कटाने वाली महिलाओं को “परकटी” कहने के लिए उनकी काफी आलोचना हुई थी. लेकिन फिर 5 जून 2009 को इंडियन एक्सप्रेस अखबार में रिपोर्ट छपी कि शरद यादव ने संसद में बाकायदा ऐलान कर दिया कि अगर महिला आरक्षण विधेयक को पारित किया गया तो वो “ज़हर खा लेंगे.”

पुरुषवादी मानसिकता

Image caption सुनंदा थरूर पर टिप्पणी के लिए नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना हो रही है.

महिलाओं के प्रति भारतीय पुरुष राजनेताओं की राय को लेकर कई बार विवाद हो चुका है. माना जाता है कि वो महिलाओं को सिर्फ़ माँ, बहिन और पत्नी की भूमिका में ही देखना चाहते हैं.

मुंबई में रहने वाले विज्ञापन फिल्म निर्देशक और ऐक्टर गजराज राव इस मानसिकता को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं.

वो कहते हैं, "जिस क्षेत्र में इंदिरा गाँधी, बेनज़ीर भुट्टो, ख़ालिदा ज़िया, शेख हसीना, सिरिमावो भंडारनायके या मायावती, जयललिता, ममता बनर्जी जैसी महिला राजनेता हों, वहाँ महिलाओं के प्रति राजनीतिज्ञों की शर्मनाक टिप्पणियों से जाहिर होता है कि हम किस मानसिकता में जी रहे है. ये देवियों के उन कैलेंडरों की तरह हैं जिन्हें हर घर में टाँग दिया जाता है और मान लिया जाता है कि महिलाओं को सामाजिक प्रतिष्ठा दे दी गई है."

सबसे दिलचस्प एक वीडियो है जिसे ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड की हाल की भारत यात्रा के दौरान फिल्माया गया था. इसमें जूलिया गिलार्ड के भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी घड़ी देखते हुए दिखाया गया है.

जूलिया गिलार्ड इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की संसद में अपने एक ऐतिहासिक भाषण में विपक्ष के नेता को महिलाओं को नीची नज़र से देखने का आरोप लगा चुकी थीं. इसमें उन्होंने ठीक वही उदाहरण दिया जो मनमोहन सिंह कर रहे थे.

उन्होंने पुरुषवादी मानसिकता का उदाहरण देते हुए कहा था कि ऐसे लोग “उस वक़्त अपनी घड़ियाँ देखने लगते हैं जब कोई महिला अपनी बात विस्तार से रखती है.”

गिलार्ड की मौजूदगी में मनमनोहन सिंह के घड़ी देखने पर इंटरनेट पर बहुत चर्चा हुई.

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