केजरीवाल सत्ता के लालची हो सकते हैं: अन्ना

अन्ना, केजरीवाल
Image caption अन्ना के बयान पर फ़िलहाल केजरीवाल ने कुछ भी कहने से मना कर दिया है.

सामाजिक कार्यकर्ता और जनलोकपाल की मांग को लेकर सुर्खियों में आए अन्ना हज़ारे को लगता है कि एक समय में उनके सबसे क़रीबी सहयोगी रहे अरविंद केजरीवाल में सत्ता की भूख हो सकती है.

अन्ना ने एक भारतीय समाचार चैनल एनडीटीवी को दिए साक्षात्कार में कहा कि केजरीवाल को पैसे की लालच तो नहीं है लेकिन सत्ता का स्वार्थ ज़रूर हो सकता है.

केजरीवाल पर तमाम राजनैतिक पार्टियां आरोप लगाती रही हैं कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ उनका आंदोलन दर असल राजनैतिक आंदोलन था और वो सस्ती लोकप्रियता के लिए ये सब मुद्दे उठाते रहते हैं. लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि अन्ना हज़ारे ने ये बातें कहीं हैं.

पूरे साक्षात्कार के दौरान अन्ना ने कई मौक़ों पर केजरीवाल की जमकर तारीफ़ भी की.

अन्ना का कहना था, ''उनमें(केजरीवाल) में त्याग की भावना बहुत है. वो जितना समाज और देश के बारे में सोचते हैं उतना अपने परिवार के बारे में नहीं सोचते.''

लेकिन आगे अन्ना ने कहा कि उन्हें पैसे का लालच तो नहीं लेकिन राजनीति में जाने से दूसरी तरह का लालच हो सकता है.

एनडीटीवी ने जब उनसे पूछा कि क्या केजरीवाल आख़िरकार सत्ता के लालची हो सकते है, इस पर अन्ना का जवाब था, ''यह संभव है, लेकिन उन्हें और कोई दूसरी लालच नहीं है.''

एक-एक कर निशाना

केजरीवाल द्वारा हाल ही में कुछ राजनेताओं या औद्योगिक घरानों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए जाने पर अन्ना ने कहा कि केजरीवाल को आरोपों को एक-एक करके सामने लाना चाहिए और हर एक आरोप को निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहिए.

अन्ना के अनुसार केजरवील का एक के बाद एक सभी राजनेताओं को कठघरे में खड़ा करना ठीक नहीं.

अन्ना का कहना था, ''आप एक ही समय पर हर किसी को नहीं पकड़ सकते. आपको हर किसी को एक-एक करके निशाने पर लेना चाहिए. मैंने छह मंत्रियों को इस्तीफ़ा देने पर मजबूर किया और यह सब रणनीति के तहत हुआ. केजरीवाल को भी ऐसा ही करना चाहिए.''

अन्ना और केजरीवाल ने एक साथ मिलकर जनलोकपाल की मांग को लेकर दिल्ली में आंदोलन शुरू किया था.

बाद में जब केजरीवाल ने राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की तो अन्ना और केजरीवाल अलग हो गए.

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