पर्यावरण पर मनमोहन के बयान का विरोध

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
Image caption प्रधानमंत्री ने माना है कि देश मुश्किल आर्थिक हालात का शिकार है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरण की मंजूरी लेने को निवेश की राह में रुकावट बताया है.

जानी मानी पर्यावरणविद् वंदना शिवा ने प्रधानमंत्री के इस बयान पर कड़ा विरोध जताया है.

मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद गुरुवार को अपने मंत्रियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी विकास के ढांचे में निवेश बढ़ावा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. सरकार ने इससे जुड़े क्षेत्रों पर बारहवीं पंचवर्षीय योजना में एक खरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया है.

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें कई तरह की बाधाओं को दूर करना होगा, जो निवेश को रोक रही हैं या उनकी रफ्तार को धीमा कर रही हैं. इनमें ईंधन आपूर्ति व्यवस्था, सुरक्षा और पर्यावरण मंजूरियां शामिल हैं. साथ ही वित्तीय मुश्किलें भी बाधक बन रही है.”

बयान पर नाराजगी

पर्यावरणविद वंदना शिवा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “पर्यावरण मंजूरी को जो वो बाधा बता रहे हैं, वो हमारे जीवन का बुनियादी ढांचा है. ये पारिस्थितिकीय का बुनियादी ढांचा है जो हमें पानी देता है, हवा देता है. इससे हमारे किसानों और आदिवासियों को जीविका मिलती है.”

किसी भी औद्योगिक या व्यावसायिक परियोजना के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी हासिल करनी जरूरी होती ताकि पर्यावरण पर उसके असर को नियंत्रित किया जा सके.

वंदना शिवा के अनुसार, “पर्यावरण मंजूरी इसलिए भी जरूरी है कि कहीं पैसा बनाने के लिए हम अपने जंगलों, नदियों और अपने जीवन के आधार को खत्म न कर दें. ऐसा होगा तो इससे समाज को भी हानि है और भविष्य को भी हानि है.”

वंदना शिवा ने कहा है कि अगर वाणिज्य पर्यावरण या पारिस्थितिकी को कमजोर करता है तो ये संविधान में दिए गए जीवन के अधिकार से जुड़े अनुच्छेद 21 पर एक हमला है.

Image caption भारत में कुलनकुलम जैसी कई परियोजनाओं का खासा विरोध होता रहा है

वहीं एक अन्य मशहूर पर्यावरणविद् सुनीता नारायण का कहना है कि आज जो पर्यावरण मंजूरियां दी जा रही हैं, उनका पर्यावरण पर अच्छा असर नहीं हो रहा है.

लेकिन वो प्रधानमंत्री के बयान से सहमति जताते हुए कहती हैं कि पर्यावरण मंजूरियों में सुधार की जरूरत है ताकि उनके पर्यावरणीय प्रभाव का भी आकलन किया जा सके.

'मुश्किल आर्थिक हालात'

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा, “पूरी दुनिया में आर्थिक हालात मुश्किल हो रहे हैं. परिणाम स्वरूप हमारी वृद्धि दर भी घट रही है, हमारा निर्यात कम हो रहा है और वित्तीय घाटा बढ़ रहा है.”

मनमोहन सिंह के अनुसार बढ़ते घाटे के कारण देश में होने वाले घरेलू और विदेशी निवेश पर बुरा असर हो रहा है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि निराश होने की जरूरत नहीं, सरकार तमाम चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है.

वंदना शिवा पर्यावरण मंजूरियों के बारे में प्रधानमंत्री के बयान को पूरी तरह उद्योगपतियों की तरफदारी मानती हैं, उनका कहना है, “पर्यावरण ही हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है. जिसे ये रुकावट कह रहे है, उसे बचाकर ही इनकी अर्थव्यवस्था भी चल सकती है.”

लेकिन सुनीता नारायण इसे उद्योगपतियों के हक दिया बयान नहीं मानतीं. वो कहती हैं, “प्रधानमंत्री सही कह रहे हैं कि इन मंजूरियों को न सिर्फ उद्योगतियों बल्कि पर्यावरण के लिए भी प्रभावी बनाना है.”

मनमोहन सिंह की सरकार पर देश की गिरती विकास दर के कारण बहुत दवाब है. बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सरकार अपनी नीतियों में नई जान फूंकना चाहती है.

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