कश्मीर: सरपंचों का सरकार को अल्टीमेटम

  • 3 नवंबर 2012
सुरक्षा बल
Image caption सरकार अब तक सुरक्षा मुहैया कराने की सरपंचों की मांग को टालती रही है.

भारत प्रशासित कश्मीर के गाँवों के सरपंचों ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर उन्हें जल्द सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई तो वो सामूहिक रुप से इस्तीफा दे देंगे.

तीस हज़ार से ज्यादा गांवों के सरपंच चरमपंथी संगठन हिजबुल के कंमाडर सैयद सलाहुद्दीन की ओर से दी गई धमकी के मद्देनज़र अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.

सैयद सलाहुद्दीन ने कहा है कि जब तक भारत सरकार सरपंचों के चुनाव और गांव में मौजूद पंचायत व्यस्था को अपनी कामयाबी के रुप में पेश करती रहेगी तब तक पंचों पर हमले जारी रहेंगे.

'सरकार का मुखौटा हैं सरपंच'

समाचर पत्रिका तहलका को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ''पंचायत के सदस्यों का शोषण किया जा रहा है. सरकार उन्हें कश्मीर में अपने मुखौटे की तरह इस्तेमाल कर रही है.''

पिछले दिनों सरपंचों पर हुए हमले और कुछ सरपंचों की मौत के बाद सुरक्षा की मांग लगातार की गई है लेकिन सरकार अब तक इन मांगों को टालती रही है. इस बीच पंचायत के सदस्यों के भी सुरक्षा के मसले पर अलग-अलग राय रही है.

राजौरी के सरपंच शफ़ीक मीर का कहना है कि सैयद सलाहुद्दीन हिजबुल कमांडर हैं और उनकी इस धमकी को सरकार किसी भी कीमत पर अनदेखा नहीं कर सकती.

'जन प्रतिनिधि सुरक्षित नहीं'

इस मसले पर आम राय बनाने के लिए शनिवार को जम्मू-कश्मीर प्रांत में मौजूद गांवों के पंचायत सदस्यों ने एक बैठक की. बैठक में शामिल हुए इमतियाज़ अफ़ज़ल बेग ने बैठक के बाद कहा, ''जनता के प्रतिनिधि जनता के लिए कैसे काम करेंगे अगर उनकी अपनी जान सुरक्षित नहीं होगी.''

हालांकि पंचायत के कई सदस्यों का मानना है कि सरपंचो को सुरक्षा दिए जाने से उनका रोज़मर्रा काम काज प्रभावित होगा. कोकेरनाग इलाके के सरपंच खुर्शीद मलिक कहते हैं, ''हमें सरकार की ओर से कोई तनख्वाह नहीं मिलती. हम काम धंधा करके अपना घर चलाते हैं एक दुकानदार अपनी दुकान के सामने सुरक्षा गार्ड कैसे रख सकता है. हमारी पंचायतों में 33 फीसदी महिलाएं हैं, ये औरतें अपने साथ पुरुष सुरक्षा कर्मियों को कैसे रखेंगी.''

2011 में जम्मू कश्मीर में हुए चुनावों में 30,000 से ज्यादा पंचायत सदस्यों की चुनाव किया गया था.

सैयद सलाहुद्दीन की धमकी के बाद हुए हमलों में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य लोग घायल हुए हैं. इन हमलों के बाद कई सौ पंचायत सदस्य पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं.

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