कांग्रेस की मान्यता रद्द हो: सुब्रमण्यम स्वामी

जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने चुनाव आयोग के समक्ष कांग्रेस पार्टी की मान्यता रद्द करने की अर्ज़ी दाखिल कर दी है.

सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक कांग्रेस पार्टी ने माना है कि उसने नेशनल हेरल्ड अखबार की मदद के लिए एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटिड को 90 करोड़ रुपए का ब्याज़ मुक्त कर्ज दिया था. इस अखबार को भारत के पहले प्रधामंत्री जवाहरलाल नेहरू ने शुरु किया था.

सुब्रमण्यम स्वामी की मांग है कि इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी की मान्यता रद्द की जाए. अर्ज़ी दाखिल करने के बाद सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर स्वामी में लिखा, “कल कांग्रेस पार्टी द्वारा कर्ज देने की बात स्वीकार करने के बाद मैंने आज चुनाव आयोग के सामने पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग रखी है. इस मांग से जुड़ी जानकारी कुछ समय बाद ट्विटर पर जारी कर दी जाएगी.”

गुरुवार को एक पत्रकार सम्मेलन में सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया था कि सोनिया और राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक ट्रस्ट को निजी संपत्ति में बदल दिया.

मुख्य विपक्षी दल भाजपा कह चुकी है कि पार्टियों का फंड राजनीतिक गतिविधियों के लिए होता है और कानून के तहत उसे व्यावसायिक या वित्तीय काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

'हम तय करेंगे राजनैतिक मकसद'

शनिवार को स्वामी के ट्वीट के बाद कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "जब ब्याज़ ही नहीं लिया तो ये व्यावसायिक मकसद कहां से हो गया. ये हम निर्धारित करेंगे कि राजनीतिक गतिविधियाँ क्या हैं, ये भाजपा तय नहीं करेगी कि हमारी राजनीतिक गतिविधियां क्या होंगी. नेशनल हेरल्ड जिस लक्ष्य के लिए शुरु किया गया वो उसी लक्ष्य के लिए काम करेगा. ऐसा दिखाया जा रहा है कि जैसे इस टेकओवर से बहुत बड़ा व्यावसायिक फायदा हुआ पर ऐसा कुछ नहीं है. "

द्विवेदी का कहना था कि एसोसिएटिड प्रेस एक अलग संस्था है जिसके व्यावसायिक हित हो सकते हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए ये एक भावनात्मक मुद्दा है क्योंकि नेशनल हेरल्ड की स्थापना आज़ादी की लड़ाई को ताकत देने के लिए जवाहर लाल नेहरु ने की थी.

उनका कहना था कि नेशनल हेरल्ड किसी व्यवसाय के लिए नहीं बना था और जवाहर लाल नेहरु सिर्फ कांग्रेस के ही नेता नहीं थे.

कांग्रेस ने शुक्रवार को स्वीकार किया था कि पार्टी की ओर से नेशनल हेरल्ड अखबार को बिना ब्याज का कर्ज दिया गया था, लेकिन पार्टी को इसके बदले कोई व्यावसायिक लाभ नहीं हुआ.

क्या है मामला?

इससे पहले गुरुवार को नई दिल्ली में एक पत्रकार सम्मेलन में सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया था कि सोनिया और राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक ट्रस्ट को निजी संपत्ति में बदल दिया.

स्वामी के मुताबक राहुल और सोनिया गांधी की यंग इंडियन नाम की निजी कंपनी में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी जिसका इस्तेमाल उन्होंने एसोसिएटेड जर्नल्स के टेकओवर और हेरल्ड हाउस को हासिल करने के लिए किया.

Image caption जवाहर लाल नेहरू ने एसोसिएटेड जर्नल्स कंपनी की स्थापना की थी.

एसोसिएटेड जर्नल्स कंपनी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्थापित की थी और ये 'नेशनल हैरल्ड' और 'क़ौमी आवाज़' अख़बार छापती थी. अंग्रेज़ी भाषा का अखबार नेशनल हेरल्ड अब बंद हो गया है.

लेकिन राहुल गांधी के कार्यालय ने एक वक्तव्य जारी कर स्वामी के आरोपों को बेबुनियाद और अपमानजनक बताया था और उनके खिलाफ अदालत जाने की बात कही है.

सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि सोनिया और राहुल गांधी ने पार्टी नियमावली के अधीन सेक्शन 25 के तहत यंग इंडियन नामक कंपनी बनाई थी जिसने एसोसिएटेड जर्नल्स को खरीदा.

कांग्रेस पार्टी ने एसोसिएटेड जर्नल्स कंपनी को 90 करोड़ से ज़्यादा का कर्ज़ दिया था. स्वामी का कहना है कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत इस तरह का कर्ज़ ग़ैरक़ानूनी है क्योंकि एक राजनीतिक पार्टी व्यवसायिक काम के लिए कर्ज़ नहीं दे सकती.

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