एक फिल्म जिस पर गिरी ममता की 'गाज'

 रविवार, 4 नवंबर, 2012 को 17:58 IST तक के समाचार

इस फिल्म में कोलकाता के पार्क स्ट्रीट में हुए बलात्कार कांड का विस्तार से जिक्र किया गया है.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सरकार के सहयोग से चलने वाले स्टार थिएटर ने शनिवार को एक बांग्ला फिल्म का प्रदर्शन यह कहते हुए बंद कर दिया कि यह फिल्म सरकार-विरोधी संदेश देती है.

समझा जाता है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर ही इसका प्रदर्शन रोका गया है. दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने भी इस फिल्म में काम किया है.

"स्टार थिएटर प्रबंधन ने दलील दी कि यह फिल्म सरकार की छवि को खराब करती है. इसलिए हमने इसका प्रदर्शन रोकने का फैसला किया है."

फिल्म के निर्माता-निर्देशक अग्निदेव चटर्जी

‘तीन कन्या’ नामक इस फिल्म में जानी-मानी अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने भी अभिनय किया है. यह फिल्म शुक्रवार को ही रिलीज हुई थी. फिल्म को सेंसर बोर्ड पास कर चुका है. दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इसका प्रदर्शन रोकने में अपना हाथ होने की खबरों का खंडन किया है.

सरकार की किरकिरी

दरअसल इस साल की शुरूआत में महानगर के पार्क स्ट्रीट इलाके में हुई बलात्कार की एक घटना की वजह से ममता बनर्जी और उनकी सरकार की काफी किरकिरी हुई थी.

इस फिल्म में उस बलात्कार कांड का विस्तार से जिक्र किया गया है. शायद इसी वजह से सरकारी सिनेमा हाल ने ऊपर के इशारे पर आखिरी मौके पर फिल्म का प्रदर्शन रोक दिया.

फिल्म के निर्माता-निर्देशक अग्निदेव चटर्जी कहते हैं, ''स्टार थिएटर प्रबंधन ने दलील दी कि यह फिल्म सरकार की छवि को खराब करती है. इसलिए हमने इसका प्रदर्शन रोकने का फैसला किया है.''

'तीन कन्या' की कहानी

"वह सिनेमाहाल कोलकाता नगर निगम की संपत्ति है. उसे लीज पर एक निजी कंपनी को दिया गया है. इसलिए फिल्म दिखाने या नहीं दिखाने का फैसला उस कंपनी का है."

राज्य के गृह सचिव बासुदेव बनर्जी

तीन कन्या एक ऐसी युवती की कहानी है जिसके साथ तीन लोग बलात्कार करते हैं. लेकिन उसे न्याय तभी मिलता है जब यह मामला एक टीवी चैनल की सुर्खियां बनता है. इस साल पार्क स्ट्रीट कांड में भी ऐसा ही हुआ था. इसलिए सरकार मानती है कि फिल्म से उसकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है.

दरअसल, उस घटना के बाद ममता बनर्जी ने जांच पूरी होने से पहले ही उसे मनगढ़ंत करार दिया था. इसके लिए बाद में उनकी काफी फजीहत हुई थी.

निर्माता-निर्देशक चटर्जी कहते हैं, ''कई लोग कह रहे हैं कि मेरी फिल्म उनको पार्क स्ट्रीट बलात्कार कांड की याद दिलाती है. इसलिए इसके सरकार-विरोधी होने की अफवाह फैलाई गई है. लेकिन यह एक सामाजिक फिल्म है और किसी भी पार्टी या सरकार के खिलाफ नहीं है.''

उनका सवाल है कि अगर यह फिल्म सरकार विरोधी होती तो क्या ब्रात्य बसु, जो तृणमूल नेता और शिक्षा मंत्री हैं, कभी इसमें काम करने के लिए सहमत होते ?

वह कहते हैं कि फिल्म में बलात्कार की घटना में एक ऐसे नेता का पुत्र शामिल है जो तीस वर्षों से मंत्री है. जबकि तृणमूल कांग्रेस सरकार तो पिछले साल ही सत्ता में आई है. ऐसे में यह फिल्म उसके खिलाफ कैसे हो सकती है ?

राज्य के गृह सचिव बासुदेव बनर्जी कहते हैं, ''वह सिनेमाहाल कोलकाता नगर निगम की संपत्ति है. उसे लीज पर एक निजी कंपनी को दिया गया है. इसलिए फिल्म दिखाने या नहीं दिखाने का फैसला उस कंपनी का है.''

"मुझे कभी नहीं लगा कि इस फिल्म के जरिए कोई राजनीतिक संदेश दिया गया है. जिन लोगों ने इसका प्रदर्शन रोकने का फैसला किया है उको पहले इसे देखना चाहिए था. दर्शकों से हमें काफी बढ़िया रिसपांस मिल रहा था. शनिवार के शो की पूरी बुकिंग हो गई थी."

अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता

वह कहते हैं कि सरकार किसी भी फिल्म पर पाबंदी नहीं लगाना चाहती. सरकार पर इस बारे में लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं. इस मामले में सरकार का कोई हाथ नहीं है.

'असहिष्णुता का सबूत'

ध्यान रहे कि कोलकाता नगर निगम पर भी तृणमूल कांग्रेस का ही कब्जा है.

कोलकाता नगर निगम के मेयर परिषद के सदस्य अतीन घोष भी यही दलील देते हैं. वो कहते हैं कि स्टार के मामलों में हमारा कोई दखल नहीं है. वह काम निजी कंपनी को सौंपा गया है. फिल्मों का चयन वही करती है, हम नहीं.

निगम के मेयर शोभन चटर्जी ने भी इस मामले में निगम का हाथ होने से इंकार कर दिया है. वह कहते हैं, ‘इस मामले से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. यह फैसला थिएटर के प्रशासन से जुड़े लोगों का है.’

अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता को भी इस फैसले से सदमा लगा है. वह कहती हैं, ‘मुझे कभी नहीं लगा कि इस फिल्म के जरिए कोई राजनीतिक संदेश दिया गया है. जिन लोगों ने इसका प्रदर्शन रोकने का फैसला किया है उको पहले इसे देखना चाहिए था. दर्शकों से हमें काफी बढ़िया रिसपांस मिल रहा था. शनिवार के शो की पूरी बुकिंग हो गई थी.’

तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद कबीर सुमन ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि यह ममता बनर्जी सरकार की बढ़ती असहिष्णुता का सबूत है.

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