बिहार: रैली एक पर नीतीश के मकसद अनेक

पटना में अधिकार रैली
Image caption पटना में आयोजित अधिकार रैली में बड़ी तादाद में लोग पहुँचे

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की अधिकार रैली में रविवार को पटना में भीड़ खूब जुटी थी. सत्ता के प्रभाव या दबदबा वाला यह आयोजन काफी ख़र्चीला-भड़कीला नज़र आ रहा था.

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले न मिले, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह पॉलिटिकल मेगा शो, यानी बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन उनकी हालिया अधिकार यात्रा के दर्द को ज़रूर कम कर गया.

भले ही इस रैली के साथ कुछ अवैध कारनामों वाले विवाद भी जुड़ गए लेकिन पिछली कुछ घटनाओं से जदयू के मलिन पड़ते मनोबल को रविवार की भीड़ ने अच्छा सहारा दे दिया.

पार्टी के बाहुबली विधायकों के हौसले इस रैली में काफी बुलंद दिखे. खासकर पटना को पाट देने वाले बड़े- बड़े होर्डिंग, बैनर-पोस्टर और महाभोज को इन्हीं दबंगों का कमाल बताया जा रहा था.

चुनावी मक़सद ज़ाहिर

वैसे गांधी मैदान में बने विशालकाय रैली-मंच से भाषण करते समय नीतीश कुमार अपने इस आयोजन के चुनावी मक़सद को छिपा नहीं सके.

उन्होंने अंत में बोल ही दिया की 2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार के लोगों को क्या करना चाहिए.

उन्होंने कहा, " दो हज़ार चौदह में आप सबको इस प्रकार का फैसला देना होगा कि हम लोगों के बिना दिल्ली में किसी की सरकार न बने. और जो वहां सरकार बने, वह बिहार को विशेष राज्य का दर्जा सुनिश्चित करे, ऐसा संकल्प आपको लेना होगा."

Image caption राज्य में सत्ता में भागीदार भारतीय जनता पार्टी को इस रैली से अलग ही रखा गया

लगे हाथ नीतीश कुमार ने ये भी घोषणा कर दी कि यही विशेष राज्य वाला मुद्दा लेकर वह आगामी मार्च में दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली बुलाएँगे.

हाल में राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बिजली संकट और बढ़ते भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जनाक्रोश को भांपकर एक प्रादेशिक भावना से जुड़े मुद्दे पर रैली बुलाई गई.

भाजपा से धीरे-धीरे दूरी बनाकर जदयू को धर्मनिरपेक्ष छवि के साथ राष्ट्रीय सन्दर्भ में विकसित करने की रणनीति भी नीतीश की इस मुहीम का एक बड़ा कारण बनी.

लालू ने क्या कहा?

उधर इस रैली पर दिल्ली से ही नज़र रख रहे राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा, "यह अधिकार रैली नहीं, बल्कि अधिकारियों और अपराधियों द्वारा जुटाई गयी भीड़ की चुनावी रैली जैसी थी. नीतीश के इस राजनीतिक स्टंट को बिहार के लोग अब अच्छी तरह समझ गए हैं."

कांग्रेस, भाकपा माले और अन्य वामपंथी दलों ने इस रैली को सरकारी विफलता छिपाने और मौजूदा जनाक्रोश से ध्यान हटाने वाला राजनीतिक प्रपंच कहा है.

जदयू के अध्यक्ष शरद यादव समेत अन्य पार्टी नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद मानते हुए लोगों से ऐसे किसी बहकावे में नहीं आने की अपील की है.

भाजपा को दूर रखा

नीतीश कुमार ने विशेष राज्य वाली अपनी इस मुहिम से भारतीय जनता पार्टी को बिलकुल अलग रखा है. रैली के दौरान ये लग ही नहीं रहा था कि भाजपा यहाँ जदयू की सत्ता साझीदार है.

संभवतः यही कारण है कि नीतीश सरकार के एक मंत्री और भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने रैली पर इतने भारी खर्च को अनावश्यक माना है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के लिए बिहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 86 वर्षीय कैलाशपति मिश्र का शनिवार को पटना में निधन हो गया.

उनके अंतिम संस्कार के मौके पर जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को पटना पहुँचे तो रैली के दिन उनका यह आगमन भी चर्चा का विषय बन गया.

नरेंद्र मोदी बिहार में

हांलाकि नरेन्द्र मोदी ने यहाँ कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की और सिर्फ इतना कहा कि वो अपने श्रद्धेय कैलाशपति मिश्र के पार्थिव शरीर पर श्रद्धा-सुमन चढ़ाने आए हैं.

लेकिन जब वह पटना हवाई अड्डे पर थे, तब उनके समर्थकों ने "देश का प्रधानमंत्री कैसा हो - नरेंद्र मोदी जैसा हो" के नारे लगाए.

ज़ाहिर है कि नीतीश कुमार और नरेन्द्र मोदी के बीच की तल्ख़ी ही यहाँ इस नारे का कारण बनी थी .

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