रिलायंस को ऑडिट करवाना जरूरी: मोइली

Image caption तेल मंत्री का कहना है कि रिलायंस को काम करने का मौका देना चाहिए.

तेल मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को केजी बेसिन के गैस फील्ड का ऑडिट यानी लेखापरीक्षा करवाना करार के अनुसार जरूरी है.

उन्होंने कहा, "मैनें पहले भी कहा है कि सरकार और उसके बिज़नेस पार्टनर के बीच करार के तहत कुछ बाध्यताएँ होती हैं. तेल और गैस की खदानों पर खर्च का ऑडिट करवाना भी उसी अनुबंध की दायित्व का हिस्सा है."

इससे पहले शनिवार को रिलायंस ने कहा था कि उसने कभी भी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी कैग की ओर से उसके केजी-डी6 गैस भंडार में खर्च की लेखापरीक्षा पर कोई आपत्ति नहीं जताई है.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक मोइली ने संवाददाताओं से कहा, "इस बात पर हमें तुरंत कोई नतीजा नहीं निकालना चाहिए बल्कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को काम करने का समय देना चाहिए. हम न तो रिलायंस, न सरकार और न ही कैग के लिए किसी तरह की परेशानी पैदा करना चाहते हैं."

विवाद

केजी बेसिन क्षेत्र की कैग की ओर से दूसरे दौर की लेखापरीक्षा को लेकर विवाद उस समय पैदा हुआ जब पेट्रोलियम मंत्रालय ने पिछले सप्ताह इस मुद्दे पर बुलाई गई विशेष बैठक को रद्द कर दिया.

इस 'प्रवेश बैठक' के तहत साल 2008-09 से 2011-12 तक खर्च का आडिट होना था.

पेट्रोलियम मंत्रालय चाहता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ अपने खातों जांच के सामने रखे.

केजी डी 6 गैस बेसिन से उत्पादन लगातार घटा है जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने उस पर खर्च में लगातार बढ़त दिखाई है.

केजरीवाल का निशाना

इससे पहले पिछले बुधवार को इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर कई बार रिलायंस की तरफदारी करने का आरोप लगाया था और कहा था कि पूर्व तेल मंत्री जयपाल रेड्डी को मंत्रालय से हटाने का कारण यह था कि वे कंपनी का साथ नहीं दे रहे थे.

वहीं मुकेश अंबानी की आरआईएल ने एक बयान जारी कर कहा है, "इंडिया एगेंस्ट करप्शन ने जो आरोप लगाए हैं उनमें कोई सच्चाई नहीं है. हम सब आरोपों से इनकार करते हैं. केजी-डी6 बेसिन योजना पर भारत को गर्व होना चाहिए."

केजरीवाल ने कहा था कि साल 2004 में यह तय हुआ था कि रिलायंस सवा दो अरब डॉलर पर गैस का यह काम करेगी.

लेकिन इस कीमत को बढ़ाया गया और दो साल में चार गुना दाम बढ़ाए गए.

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