ओबामा या रोमनी की जीत का भारत पर क्या असर होगा?

 बुधवार, 7 नवंबर, 2012 को 09:17 IST तक के समाचार
आऊटसोर्सिंग

अमरीका के साथ आऊटसोर्सिंग का मुद्दा भारत और चीन के लिए खासा महत्व रखता है.

अमरीका में हो रहे चुनावों का भारत के लिए क्या महत्व है. ओबामा या रोमनी के राष्ट्रपति बनने से क्या भारत को कोई फर्क पड़ता है?

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वरिष्ठ भारतीय पत्रकार इंदर मल्होत्रा मानते हैं कि ओबामा के आऊटसोर्सिंग पर लगातार बात करने से भारत में चिंता होगी.

उनका ये भी मानना है कि यदि मिट रोमनी जीतते हैं तो भारत-ईरान रिश्तों पर भारत खासी दिक्कत का सामना कर सकता है.

इंदर मल्होत्रा, वरिष्ठ पत्रकार

"यदि मिट रोमनी राष्ट्रपति बनते हैं तो भारत के लिए ईरान के मुद्दे पर मुश्किल खड़ी हो सकती है. भारत-ईरान रिश्तों पर इसका गहरा असर हो सकता है. कम से कम ओबामा ईरान पर जंग की हद तक तो नहीं गए लेकिन यदि रोमनी राष्ट्रपति बनते हैं तो रिपब्लिकन क्या करेंगे, कहा नहीं जा सकता है."

इंदर मल्होत्रा

इंदर मल्होत्रा ने बीबीसी से कहा, "चाहे ओबामा राष्ट्रपति बने या फिर रोमनी, भारत के लिए कोई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव नहीं होंगे. लेकिन ओबामा ने लगातार आऊटसोर्सिंग की बात कही है जिससे भारत में चिंता जरूर होगी.''

वे कहते हैं, ''लेकिन रोमनी ने जिस तरह से चीन के विरुद्ध बातें कही हैं और यदि वे राष्ट्रपति बनने के बात उस पर कायम रहते हैं तो उससे वैश्विक व्यापारिक जंग शुरु हो सकती है. मेरे हिसाब से अगले राष्ट्रपति की सबके बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था ही बनी रहेगी."

उनकी राय है, ''यदि मिट रोमनी राष्ट्रपति बनते हैं तो भारत के लिए ईरान के मुद्दे पर मुश्किल खड़ी हो सकती है. भारत-ईरान रिश्तों पर इसका गहरा असर हो सकता है. कम से कम ओबामा ईरान पर जंग की हद तक तो नहीं गए लेकिन यदि रोमनी राष्ट्रपति बनते हैं तो रिपब्लिकन क्या करेंगे, कहा नहीं जा सकता है."

वे कहते हैं, ''अधिकतर दक्षिण एशियाई लोग डेमोक्रेट राष्ट्रपति के पक्ष में वोट करते हैं. लेकिन मेरा अमरीका में पिछले तीन महीने का अनुभव बताता है कि जो दक्षिण एशियाई लोग व्यवसाय और उद्योग जगत में सक्रिय हैं, वो मानते हैं कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति अर्थव्यवस्था को बेहतर संभालते हैं. कहना मुश्किल है लेकिन दक्षिण एशियाओं लोगों के वोट में कुछ विभाजन संभव है."

डॉक्टर मुक़्तदर खान, डेलावेयर विश्वविद्यालय

डेलावेयर विश्वविद्यालय के शिक्षक मुक़्तदर खान कहते हैं कि आऊटसोर्सिंग पर बहस से ज्यादा फिक्र चीन को होनी चाहिए क्योंकि अमरीका चीन को कहीं अधिक आऊटसोर्सिंग करता है जो निर्माण क्षेत्र में होती है.

डॉक्टर मुक़्तदर खान ने बीबीसी को बताया, "ओबामा के लिए आर्थिक स्थिति सुधरना एक महत्वपूर्ण मुद्दा था, लेकिन वो इस दिशा में ज्यादा कामयाब नहीं हो पाए हैं...एक राष्ट्रपति, कोई भी राष्ट्रपति अपने आप से ये बदलाव नहीं ला सकता है...ये बहुत ही धीमी प्रक्रिया होती है.''

वे कहते हैं, ''जहां तक आऊटसोर्सिंग का सवाल है तो भारत को अमरीका बीपीओ आऊटसोर्सिंग करता है, वहीं चीन को वह मैन्यूफैक्चरिंग आऊटसोर्स करता है. इस दिशा में पिछले दो साल में ओबामा ने काफी काम किया है और यदि ओबामा सत्ता में लौटते हैं तो आऊटसोर्सिंग पर बहस भारत से ज्यादा चीन पर असर करेगी."

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