नॉर्वे वाले बच्चे लौटेंगे माँ के पास

  • 9 नवंबर 2012
Image caption इन भारतीय बच्चों को नार्वे के शिशु कल्याण विभाग ने उनके माता पिता से ले लिया था.

नार्वे में अपने मां बाप से अलग कर के रखे गए दोनों भारतीय बच्चों की देखरेख के बारे में पश्चिम बंगाल के एक न्यायाधिकरण ने आदेश दिया है कि ये बच्चे उनकी माँ को सौंप दिए जाएं.

मई 2011 में नार्वे मे तीन वर्षीय अभिज्ञान और एक साल की ऐश्वर्या को उस समय उनके भारतीय मां बाप से दूर कर दिया गया था, जब नार्वे के शिशु कल्याण विभाग ने कहा था कि इनके मां बाप अपने बच्चों की ठीक से देखभाल नहीं कर पा रहे थे.

काफी विवाद और अदालती कार्रवाई के बाद अप्रैल 2012 नॉर्वे के स्टावांगर कोर्ट ने इन बच्चों को भारत वापस भेजे जाने की अनुमति दे दी थी और उनकी देखरेख का जिम्मा उनके चाचा को सौंप दिया था.

भारतीय न्यायाधिकरण ने कहा है कि वह उन बच्चों के प्रति अपने दायित्वों का पालन करने मे विफल रहे है.

चाचा की विफलता

इन बच्चों के माता पिता अलग हो चुके हैं और इनकी माँ वापस भारत आ चुकी है. इन बच्चों की माँ ने इनकी बच्चो की देखरेख की जिम्मेदारी सौपे जाने के लिए याचिका दायर की थी.

पश्चिम बंगाल में बर्दवान की बाल कल्याण समिति का कहना है कि उसने विशेषज्ञ की मदद से उस घर जहाँ इन बच्चों का लालन पालन हो रहा है वहाँ के हालात के साथ साथ उनकी माँ की क्षमता का मूल्यांकन किया था.

समिति ने कहा," हमने पाया कि चाचा को इन बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी सौपी गई थी वो अपने कर्तव्यों में विफल रहे हैं और उनकी माँ उनका ख्याल रखने के लिए सक्षम है."

न्यायाधिकरण का कहना था कि बच्चों को उनके चाचा को सौंपे जाने संबंधी नार्वे की अदालत के आदेश के बाद 26 साल के अविवाहित चाचा इस दायित्व को निभा पाने में सफल नही रहे हैं. साथ ही इनको माता- पिता से पूरी तरह अलग किया जाना न्यायसंगत नही है.

न्यायाधिकरण ने ये भी कहा कि इन बच्चों को अपनी मां से कोई खतरा नही है.

संवाददाताओं का कहना है कि अभी ये साफ नही है कि बच्चों को उनकी माँ को सौंप दिए जाने का अदालती आदेश कब लागू होगा.

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