सोनिया ने ली मंत्रियों और नेताओं की क्लास

कॉंग्रेस नेता

रामलीला मैदान से चुनावी तैयारी में आई दिख रही कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा है कि सरकार और पार्टी दोनों को एक दूसरे की मजबूरियाँ समझना चाहिए.

सोनिया गाँधी ने दिल्ली से सटे सूरजकुंड में पार्टी के चुनिंदा नेताओं और मंत्रियों की मौजूदगी में यह बात कही.

इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा राहुल गाँधी भी मौजूद हैं.

बैठक से आ रही ख़बरों के अनुसार सोनिया गाँधी ने इस बात पर ज़ोर दिया की पार्टी को 2009 के चुनावी घोषणापत्र के वादों को पूरा करना चाहिए.

एक साथ सफर

इस बैठक के लिए प्रधानमंत्री मममोहन सिंह को छोड़ कर सभी नेताओं को पार्टी कार्यालय से बसों में बैठ कर आना पड़ा.

लाल बत्ती विहीन इन नेताओं के साथ सोनिया और राहुल गाँधी भी बस में ही बैठ कर आए. इस बैठक में आने के पहले सभी नेताओं को पार्टी का 2009 का घोषणापत्र भी पढ़ कर आने को कहा गया.

कांग्रेस अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि इस बैठक से पार्टी और सरकार के बीच की दूरी को कम करने में मदद मिलेगी.

Image caption मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी दोनों इस बैठक में मौजूद हैं.

सोनिया ने बैठक में कहा कि कांग्रेस विरोधी किसी भी कीमत पर सत्ता हथियाना चाहते हैं. कांग्रेस नेता, खास तौर पर वो नेता जो केवल पार्टी में काम कर रहे हैं, वो सरकार के निर्णयों से गाहे बगाहे असहमति जताते रहे हैं.

सोनिया गाँधी ने फिर एक बार कहा कि पार्टी नेताओं को कार्यकर्ताओं को अहमियत देना ही होगा. इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष ने फिर एक बार दोहराया की मंत्रियों को दिल्ली के बाहर अपने दौरे के दौरान पार्टी कार्यालयों में जाने का समय निकालना चाहिए ख़ास तौर पर विपक्ष शासित राज्यों में.

स्थायी समस्या

यूं तो यह बात कांग्रेस पार्टी के दिशा निर्देशों में दशकों से लिखी हुए है और लगभग हर पार्टी अध्यक्ष इस बात पर जोर देता रहा है लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं की इस शिकायत का कभी अंत हो पाया.

पेट्रोलियम की कीमतों को बढाने से लेकर कम कीमतों पर उपलब्ध रसोई गैस की टंकियों की संख्या को सीमित करने जैसे सरकार के कई निर्णयों से पार्टी में काफी परेशानी थी.

इन दो निर्णयों से पार्टी में इसलिए और भी अधिक नाराजगी थी क्योंकि यह निर्णय हिमाचल और गुजरात चुनावों के ठीक पहले घोषित किए गए थे.

पार्टी को इस बात का पूरा भान है कि संसद का आने शीतकालीन सत्र पार्टी के लिए बड़ी मुश्किलों से भरा होगा.

एक तरफ सरकार पर ऐसा प्रदर्शन करने की ज़िम्मेदारी होगी जो आने वाले समय में पार्टी को चुनावों में जाने में मदद कर सके, दूसरी तरफ मायावती और मुलायम सिंह यादव जैसे सहयोगी हैं जिन्हें लंबे समय तक एक साथ साधे रखना किसी करिश्मे से कम नहीं.

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