2जी नीलामी में ज्यादा उत्साह नहीं

 मंगलवार, 13 नवंबर, 2012 को 01:04 IST तक के समाचार

भारत सरकार को इस नीलामी से करीब 40,000 करोड़ रूपये कमाने की उम्मीद थी.

लाखों करोड़ रुपयों के आंकड़ों को आम लोगों के मन में उतारने देने वाले 2जी स्पैक्ट्रम की नीलामी की हवा निकलती दिख रही है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रद्द हुए 2जी स्पेक्ट्रम की सोमवार को हुई नीलामी के प्रति टेलिकॉम कंपनियों ने वैसी रुचि नहीं दिखाई जैसी सरकार ने उम्मीद की थी.

पहले दिन 22 सर्किलों के 176 ब्लॉक के लिए हुई नीलामी में केवल 9,200 करोड़ रुपए की बोली लगी जबकि पर्यवेक्षकों के अनुसार सरकार ने खाली हुए स्पेक्ट्रम की नीलामी से 40,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद बांध रखी है. नीलामी बुधवार को भी जारी रहेगी.

पहले दिन दिल्ली, मुंबई, राजस्थान और कर्नाटक सर्किल के लिए एक भी बोली नहीं लगाई गई.

इस नीलामी से ये साफ पता चल रहा है कि स्पेक्ट्रम के 14,000 करोड़ के ऊंचे आधार मूल्य की वजह से दूरसंचार कंपनियां इसमें अधिक रुचि नहीं दिखा रही हैं.

अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम: एक भी बोली नहीं

अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम के लिए तो एक भी बोली नहीं लगी. जिन सर्किलों के लिए सबसे ज़्यादा बोली लगी उनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश (पूर्व) और उत्तर प्रदेश (पश्चिम) महत्वपूर्ण थे.

उत्तर प्रदेश (पश्चिम) और उत्तर प्रदेश (पूर्व) में स्पेक्ट्रम की मांग तो पेशकश से भी अधिक रही.

सभी बोलियां जीएसएम एयरवेव्स के लिए लगीं. सीडीएम के लिए कोई बोली नहीं लगी.

जिन ब्लॉक्स के लिए बोली लगाई गई उनमें नौ उत्तर प्रदेश (पूर्व) के लिए, 10 उत्तर प्रदेश (पश्चिम) के लिए, गुजरात और बिहार के आठ-आठ ब्लॉक के लिए, असम के सात, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, ओडिशा, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश और उत्तर पूर्व के छह-छह ब्लॉक के लिए, महाराष्ट्र के पांच, आंध्र प्रदेश, कोलकाता, तमिलनाडु के लिए चार-चार और हिमाचल प्रदेश, केरल और पंजाब के एक-एक ब्लॉक के लिए बोली लगी.

जिन सर्किलों के लिए बोली नहीं लगाई गई है उनमें कंपनियों को दोबारा बोली लगाने का मौक़ा प्रारंभिक बोली लगाने की प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद ही मिल सकेगा.

सरकार ने सभी 22 दूरसंचार सर्किलों के 5 मेगाहर्ट्ज वाले स्पेक्ट्रम के लिए न्यूनतम आधार मूल्य 14,000 करोड़ रुपये रखा है. लेकिन 2008 में इन स्पेक्ट्रमों के लिए कंपनियों ने जो आधार मूल्य अदा किया था, उससे मौजूदा मूल्य क़रीब सात गुना ज़्यादा है.

मौजूदा नीलामी में पांच कंपनियां - भारती एयरटेल, वोडाफ़ोन, आइडिया सेल्युलर, टेलेनॉर और वीडियोकॉन - जीएसएम (ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल्स) एयरवेव्स के लिए बोली लगा रही हैं.

दूरसंचार मंत्रालय ने डीएसएम और सीडीएमए (कोड डिविज़न मल्टीपल एक्सेस) एयरवेव्स के लिए अलग-अलग बोली की योजना बनाई थी.

लेकिन टाटा टेलिसर्विस और वीडियोकॉन के पिछले हफ्ते बोली से बाहर हो जाने से सीडीएमए स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगानेवाली अब कोई कंपनी नहीं बची है. लेकिन वीडियोकॉन जीएसएम एयरवेव्स के लिए बोली लगाना जारी रखेगी.

कंपनियों की समस्या

नॉर्वे की कंपनी टेलेनॉर के लिए स्पेक्ट्रम हासिल करना बेहद ज़रूरी है

नॉर्वे की कंपनी टेलेनॉर के लिए इस नीलामी में स्पेक्ट्रम हासिल करना बेहद ज़रूरी है वरना उसके लिए भारत में अपनी सेवा देना मुश्किल हो जाएगा.
उसी तरह आइडिया सेल्युलर को अपनी अखिल भारतीय मौजूदगी बनाए रखने के लिए 2 जी स्पेक्ट्रम के सात लाइसेंस हासिल करना बेहद ज़रूरी है.

सुप्रीम कोर्ट ने जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए थे उनमें यूनीनॉर, लूप टेलिकॉम, सिस्टेमा श्याम, आइडिया सेल्युलर, वीडियोकॉन, एतिस्लात डीबी, एस टेल और टाटा टेलिसर्विस शामिल थे.

लेकिन इनमें से केवल वीडियोकॉन और टेलीनॉर ने ही दोबारा हुई नीलामी में भाग लिया. एतिस्लात डीबी, लूप टेलीकॉम, एस टेल और एमटीएस ने नए सिरे से इन लाइसेंसों को लेने में कोई रूचि नहीं दिखाई.

भारत की दो बड़ी टेलिकॉम कंपनियां भारती एयरटेल और वोडाफ़ोन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अप्रभावित रही थीं हालांकि मौजूदा नीलामी में नए क्षेत्र हासिल करने के लिए वे एक टेलिकॉम क्षेत्र के अधिकतम दो ब्लॉक्स के लिए बोली लगा रही हैं.

पृष्ठभूमि

सीएजी ने तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में 1.76 लाख करोड़ के राजस्व घाटे का आकलन दिया था

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन का सारा झगड़ा उस समय शुरू हुआ था जब भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि केंद्रीय दूर संचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में हुए स्पेक्ट्रम आवंटन में देश को एक लाख 76 हज़ार करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हुआ है.

संसद इस मुद्दे पर ठप्प हो गई थी और ए राजा को इस्तीफा देना पड़ा था.

कैग का दिया आंकड़ा हमेशा विवादित रहा जबकि ए राजा के बाद दूर संचार मंत्री बने कपिल सिब्बल ने कहा कि देश को 'जीरो लॉस' ह्आ.

सीबीआई ने अदालत में इस घोटाले की जांच के बाद जो चार्जशीट पेश की उसमे दावा किया कि देश को करीब 31000 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है.

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने भी कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन में कहीं कोई नुकसान नहीं हुआ है.

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने दो फ़रवरी 2012 को सारे आवंटन रद्द कर दिए और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया को कड़े शब्दों में गलत ठहराया.

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