आंध्र प्रदेश: एमआईएम ने समर्थन वापस लिया

 सोमवार, 12 नवंबर, 2012 को 15:13 IST तक के समाचार

हैदराबाद की ऐतिहासिक चार मीनार से लगे मंदिर परिसर में नई छत डाले जाने के बाद इलाक़े में फैले सांप्रदायिक तनाव के बाद मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन(एमआईएम) ने राज्य सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा की है.

एमआईएम के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को अपनी पार्टी की कार्यकारणी की बैठक बुलाई जिसमें राज्य और केंद्र में कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया गया.

बैठक के बाद ओवैसी ने कहा कि मुख्यमंत्री किरण कुमार रेडडी के 'मुस्लिम विरोधी' रवैये के कारण उनकी पार्टी ने राज्य सरकार से समर्थन वापसी का फ़ैसला किया है.

एमआईएम के इस फ़ैसले के बाद आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार की हालत नाज़ुक हो गई है.

बहुमत घटा

294 सदस्यों की विधान सभा में फ़िलहाल कांग्रेस के पास 152 विधायकों का समर्थन हासिल है लेकिन मजलिस के सात सदस्यों के समर्थन वापसी के बाद कांग्रेस सरकार का बहुमत बहुत कम हो गया है.

जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के 18 विधायक हैं लेकिन कांग्रेस के 152 विधायकों में से भी कई विधायक जगन रेड्डी के समर्थक माने जाते हैं.

उससे भी अहम बात यह है कि मजलिस के समर्थन वापस लेने से कांग्रेस को राज्य में अल्पसंख्यक मुसलमानों के समर्थन से भी हाथ धोना पड़ सकता है.

चार मीनार से लगे मंदिर पर गत दो सप्ताह से चल रहे विवाद ने रविवार को और गंभीर रूप ले लिया जब रविवार की सुबह उस मंदिर का विस्तार करते हुए उस पर एक और छत डाल दी गई.

"आज यह काम करके कांग्रेस ने 6 दिसम्बर 1992 की याद ताज़ा कर दी है. किरण कुमार रेड्डी ने मुसलमानों को अपने साम्प्रदायिक होने का तोहफा दिया है."

लोक सभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी

हालांकि पिछले सप्ताह ही आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि उस जगह की मौजूदा स्थिति बनाए रखी जाए और वहां कोई नया काम न किया जाए लेकिन पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर से सटा कर एक और छत डाल दी गई.

जिस समय यह काम किया जा रहा था पुलिस ने किसी भी विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए चार मीनार की ओर आने वाली तमाम सड़कों को कांटे दार तार लगाकर बंद कर दिया और पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया था.

कर्फ़्यू जैसी स्थिति

इस काम के विरोध की कोशिश करने वाले मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के पांच विधायकों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. बाद में दूसरे इलाकों से इसी पार्टी के दो और विधायकों को भी गिरफ्तार किया गया.

इन घटनाओं के बाद हैदराबाद में सांप्रदायिक तनाव और भी बढ़ गया और कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा हो गई. दुकानें बंद कर दी गईं और सड़कें वीरान हो गईं. पुलिस ने लोगों को घरों से निकलने से रोक दिया.

असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटना के लिए सीधे मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्होंने संघ परिवार को ख़ुश करने के लिए हाई कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन करते हुए पुलिस से यह काम करवाया.

उनका कहना था, "यह काम करके कांग्रेस ने छह दिसम्बर 1992 की याद ताज़ा कर दी है. किरण कुमार रेड्डी ने मुसलमानों को अपने सांप्रदायिक होने का तोहफ़ा दिया है".

लेकिन दूसरी ओर हैदराबाद पुलिस आयुक्त अनुराग शर्मा का कहना है कि चार मीनार के निकट जो काम हुआ है वो नागरिक प्रशासन ने करवाया है और उसका पुलिस से कोई संबंध नहीं है.

अधिकारियों का कहना है कि शेड डालने का काम हाई कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं है क्योंकि अदालत ने 31 अक्टूबर तक कि स्थिति को बनाए रखने के लिए कहा था जबकि वहां 30 अक्टूबर तक ऐसा एक पहले से मौजूद शेड था और नया शेड डालने के लिए उसे हटाया गया.

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