डॉ. चिश्ती भारत लौटे, 21 नवंबर को सुनवाई

Image caption खलील चिश्ती पर हत्या का आरोप है.

80 पार कर चुके पाकिस्तानी वैज्ञानिक डॉक्टर खलील चिश्ती भारत लौट आए हैं, उन्हें जमानत पर रिहा करते हुए भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने घर कराची जाने की इजाजत दी थी.

खलील चिश्ती पर 1992 में अजमेर में रहते हुए एक हत्या में शामिल होने का आरोप है और अजमेर की अदालत ने 2011 में उन्हें उम्र कैद की सज़ा सुनाई है.

हालांकि, डॉ चिश्ती खुद को बेक़सूर बताते रहे है. इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील की सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था.

21 नवंबर को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.

डॉ. चिश्ती कोई दो दशक तक अपने घर कराची नहीं जा सके थे, लिहाजा उन्होंने अदालत से एक बार घर जाने की इजाजत मांगी थी.

भारत की सर्वोच्च अदालत ने कुछ शर्तो के साथ उन्हें जमानत पर रिहा करते हुए छह महीने के लिए पाकिस्तान जाने की अनुमति दे दी थी.

जुबान के पक्के हैं ‘अब्बा’

सर्वोच्चय न्यायालय की शर्तों का पालन करते हुए चिश्ती 10 दिन पहले ही भारत लौट आए हैं. उनके साथ पत्नी मेहरुन्निसा और बेटे तारिक भी आये है.

तारिक ने बीबीसी से कहा कि उनके अब्बा जबान के बड़े पाबंद हैं, उन्होंने कहा,

' देखिये डॉ चिश्ती उम्रदराज है, वो अस्सी पार कर चुके हैं. हालांकि, आने में तकलीफ तो बहुत हुई, लेकिन अदालत के आदेश की पालना जरूरी है. इसलिए वो भारत आए.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक डॉ चिश्ती 1992 में अजमेर आये थे जहाँ उनके छोटे भाई जमील चिश्ती का परिवार रहता था. लेकिन हत्या विवाद में फंस गए और उन पर हत्याकाण्ड में शामिल होने का आरोप लगाया गया.

इसकी वजह से चिश्ती बीस साल तक कराची अपने घर नहीं जा सके. इस दौरान उनके परिजनों को जब भी इजाजत मिली वो उनसे मिलने भारत आते रहें.

हालांकि, चिश्ती अजमेर में ही पैदा हुए थे और बंटवारे के वक्त कराची जा बसे थे.

चिश्ती की रिहाई के लिए भारत के कई मानव अधिकार संगठनों ने भी मुहिम चलाई और साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल से इस बाबत सिफ़ारिश भी की. हालांकि तत्कालीन राज्यपाल शिवराज पाटिल ने इस सिफारिश को नकार दिया.

डॉ चिश्ती अजमेर में ही पैदा हुए और बंटवारे के समय कराची जा बसे. चिश्ती की रिहाई की लिए भारत के कई मानवाधिकार संगठनों ने मुहीम चलाई۔

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