लक्ष्मी यानि 'बही-खाता'

 मंगलवार, 13 नवंबर, 2012 को 10:40 IST तक के समाचार
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कंप्यूटर ने भले ही भारत में पारंपरिक बही-खातों के व्यापार को सतह से ओझल कर दिया हो लेकिन दिवाली पूजन में व्यापारी अब भी बही-खातों की ही पूजा करते हैं.

हालांकि इसमें कुछ कमी आई है क्योंकि नयी पीढ़ी के कुछ लोग आधुनिक लैपटॉप और कंप्यूटर की भी पूजा करने लगे हैं.

लेकिन जो व्यापारी अब भी बही-खातों से ही दिवाली पूजन करते हैं. बही-खातों के साथ व्यापारी तराज़ू और नाप-माप के औजारों की भी पूजा करते हैं.

तराज़ू अब डिजिटल हो गए हैं. व्यापार में उतार-चढ़ाव और लाभ-हानि के सौदे साल भर कंप्यूटर के पर्दे पर दर्ज होते रहते हैं लेकिन जब दिवाली के मौके पर व्यापार से जुड़े लोगों ने पारंपरिक बही-खातों के आगे श्रद्धा से सिर झुका दिया.

हाथ में बही-खाता थामे जयपुर के व्यापारी महेश अग्रवाल कहते हैं, ''कंप्यूटर अपनी जगह है बही-खाते अपनी जगह है. ये पुरखों की बताई पूजा की विधि है जो बेहद ज़रूरी है. वे कहते हैं बही-खातों के साथ दवात, कलम, नापने के गज और कैंची की भी पूजा होती है. जिसका जैसा व्यवसाय होता है, वैसी ही पूजा होती है.''

परंपरा

अग्रवाल कहते हैं कि कंप्यूटर पर आप स्वास्तिक नहीं बना सकते. बही-खाते के साथ विधि-विधान से पूजा की जा सकती है.

"देखो व्यापारी वैसे भी बही-खाते रखते हैं. क्योंकि दो नंबर के हिसाब हाथ से ही बही-खातों में लिखे जाते हैं. इस समय 20 लाख के आस-पास जयपुर में बही-खातों की बिक्री होती है"

अक्षय गुप्ता, बही-खातों के व्यापारी

भारत में मारवाड़ी व्यापारी इन्हीं बही-खातों और मुनीमों की मदद से सदियों तक अपनी कामयाबी की कहानी सुनाते रहे हैं.

जयपुर में बही-खातों के व्यापारी अक्षय गुप्ता कहते हैं, ''देखो व्यापारी वैसे भी बही-खाते रखते हैं. क्योंकि दो नंबर के हिसाब हाथ से ही बही-खातों में लिखे जाते हैं. पूजा में रोकड़, बही-खाते, लेजर और कलम इन्हीं की पूजा होती है. इस समय 20 लाख के आस-पास जयपुर में बही-खातों की बिक्री होती है''

सुर्ख आवरण, पन्नों पर स्वास्तिक और अक्षत-मौली व्यापारी को ये यकीन दिलाते हैं कि उसके व्यापार का विस्तार होगा.

जयपुर में बही-खातों के पुराने व्यापारी विष्णु भार्गव कहते हैं, ''कंप्यूटर के आने से बही-खातों की बिक्री पर फर्क पड़ा है. कंप्यूटर की पूजा करने वाला बही-खातों की भी पूजा करेगा, ये शगुन है. पूजा सार्थक बही-खातों से ही होती है. ऐसा व्यापारी मानते हैं.''

बही खाता

बही खातों के पन्नों पर स्वास्तिक और अक्षत-मौली से पूजा की जाती है

भारत में बहुतेरे लोग बेतरतीब ज़िंदगी जीते हैं मगर व्यापार तो नाप-तौल है. जयपुर में तराज़ू, कांटे और बाट के बड़े व्यापारी धीरेन्द्र कांटेवाला कहते हैं, ''तराजू का व्यापार में बड़ा महत्व है. ये उसका मुख्य आधार होता है. पूजा के लिए तराज़ू पर मौली बांधते हैं और व्यापारी इस मौके पर नया कांटा खरीदकर पूजा करते हैं. कुछ लोग अब भी तागड़ी का प्रयोग करते है और उसकी भी पूजा भी करते हैं.''

की-बोर्ड पर सरपट दौड़ती अंगुलियां कंप्यूटर के पर्दे पर एक मोहक संसार रचती है. बही-खातों में कागज़ और स्याही का समागम है जो समय के साथ धुंधली तो पड़ सकती है लेकिन डिलीट नहीं हो सकती.

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