पटना में छठ के दौरान भगदड़, 17 लोगों की मौत

पटना का गंगा घाट
Image caption पटना में छठ पूजा में भगदड़, 14 की मौत.

पटना में छठ पूजा के दौरान सोमवार शाम हुई भगदड़ में 17 लोगों की मौत हो गई है जबकि काफी लोगों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है.

मारे जाने वाले लोगों में नौ बच्चे शामिल हैं. अपुष्ट खबरों के अनुसार मृतकों की संख्या 21 तक हो सकती है.

हालांकि, मंगलवार सुबह अर्घ्य देने के लिए पटना के घाटों पर भारी भीड़ जमा हुई. जिस अदालत गंज घाट पर हादसा हुआ था वहां भी हज़ारों की संख्या में पुरुष और महिलाएं पहुंचीं. घाट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसे पर शोक जताया है और मृतकों के परिवार को दो लाख रुपये मुआवज़े की घोषणा की है.

पटना में देर रात 11 बजे एक संवाददाता समेल्लन में मुख्यमंत्री ने कहा कि पुल टूटने से हादसा नहीं हुआ बल्कि भीड़ का रास्ता दूसरे पुल की तरफ कर देने से मची भगदड़ में ये हादसा हुआ. उन्होंने कहा, "भगदड़ क्यों मची और बिजली के तार के गिरने की बात की जांच राज्य के गृह सचिव से कराई जा रही है."

घायलों को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, अरविंद अस्पताल, मगध अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं. लेकिन 'पीएमसीएच' में घायलों के तुरंत इलाज की पूरी व्यवस्था नहीं थी. भीड़ के गुस्से को देखकर कुछ चिकित्सक भी वहां से हट गए जिस कारण कुछ घंटों तक इलाज संभव नहीं हो सका.

अव्यवस्था को देखकर लोग रोष में आ गए और भीड़ ने वहां मौजूद पुलिस बल पर पथराव किया जिसके बाद पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा.

लेकिन इस बीच पटना में माहौल तनावपूर्ण हो गया है. कई युवक सड़कों पर निकल आए है और हादसे के विरोध में नारेबाज़ी कर रहे हैं. पटना के अशोक राजपथ रोड पर युवकों की भारी भीड़ जमा हो गई है जो हंगामा मचा रही है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निजी अस्पतालों में भर्ती लोगों लोगों की संख्या का भी पता लगाने का आदेश दिया है ताकि उनका इलाज और उनकी सही जानकारी सरकार के पास रहे.

कमज़ोर पुल

Image caption पुल बांस और लकड़ी का बना हुआ था

पटना शहर के पुलिस कप्तान जयंत कांत का कहना है कि वहां बनाया गया बांस का पुल कमजोर था जो धंस गया. जिसके बाद लोगों को लिए दूसरा रास्ता तैयार किया गया था लेकिन जब लोग वहां से जा रहे थे कि भगदड़ मच गई.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को बताया कि बांस का पुल बहुत कमज़ोर होने कारण टूट कर धसने लगा, जिसके चलते लोगों में हड़कंप मच गया. इसके बाद लोग इधर-उधर भागने लगे.

पटना के लोहानीपुर इलाके की एक महिला प्रीति कुमारी, जिसका बच्चा इस भगदड़ में मर गया, ने रोते हुए बीबीसी संवाददाता से कहा, “कोई यहां सुरक्षा की तैनाती नहीं थी. इतनी ज्यादा भगदड़ मची की बच्चों को लेकर कई महिलाएं गिर गईं, मैनें खुद कई महिलाओं को गिरते हुए देखा.”

लोगों का कहना है कि प्रशासन बिजली का तार गिरने को वजह बताकर मामले पर पर्दा डाल रहा है.

हादसा शहर के अदालतघाट पर हुआ. लोग छठ पूजा के लिए शाम का अर्घ्य देने घाट पर पहुंचे थे.

उस क्षेत्र में बिजली के इंतजाम भी पुख्ता नहीं थे और अंधेरा होने की वजह से लोग ज्यादा परेशान गए और एक दूसरे पर गिरने लगे.

लापरवाही

राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू प्रसाद यादव ने घटना पर दुख जताया.

पत्रकारों से उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार ने पुख्ता इंतजाम की गारंटी दी थी और करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी ये हादसा हो गया.

उन्होंने कहा कि, "नीतीश कुमार ने लोगों को राम भरोसे छोड़ दिया."

इससे पहले, राजद प्रवक्ता रामकृपाल यादव ने भारतीय टेलीविजन चैनल आजतक पर नीतीश सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा “एक दिन पहले नीतीश खुद घाट का मुआयना करने आए थे इसके बावजूद उन्होंने नहीं देखा और इतना बड़ा हादसा हो गया. इसके लिए सरकार जिम्मेदार है.”

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