ज़मीन घोटाले में पूर्व और वर्तमान आईएएस को सज़ा

बहुचर्चित नोएडा भूमि आवंटन घोटाले मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव और भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी राजीव कुमार को तीन-तीन साल की कैद और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.

हांलाकि सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस लाल ने सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया.

इससे पहले, अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद फैसले की तारीख 20 नवम्बर तय की थी.

इस मामले में सीबीआई ने दो आरोप पत्र दाखिल किए थे जिनमें नीरा यादव पर 1994 में नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रहते हुए आईएएस राजीव कुमार और अपनी दोनों पुत्रियों के नाम नियमों को ताक पर रखकर भूखंड आवंटन का आरोप लगाया गया था.

इससे पहले, नीरा यादव को सीबीआई अदालत ने एक अन्य भूखंड मामले में वर्ष 2010 में चार साल की सजा सुनाई थी.

कौन हैं नीरा यादव ?

1971 बैच की भारतीय प्रशानिक सेवा की अधिकारी रही नीरा यादव उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के फिरोजपुर गांव की रहने वाली हैं. नीरा यादव के पति महेंद्र सिंह यादव भी आइपीएस अधिकारी थे, जिन्होंने बाद में राजनीतिक कारणों से इस्तीफा दे दिया था.

नीरा यादव को उत्तार प्रदेश के लगभग सभी महत्वपूर्ण जगहों पर काम करने का मौका मिला. भ्रष्ट अधिकारी के रुप में कुख्यात नीरा यादव यूपी की मुख्य सचिव बनने में सफल रहीं.

हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें पद से हटना पड़ा.

सेवानिवृत्त होने के बाद नीरा यादव वर्ष 2009 में भाजपा में शामिल हुईं. लेकिन मीडिया के दबाव की वजह से राजनीति में पहचान नहीं बना पाईं.

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