कसाब को फांसी दिए जाने से मिला इंसाफ़

अरुण जाधव
Image caption अरुण जाधव की सूचना पर ही कसाब पकड़ा गया था

मुंबई में चार साल पहले हुए चरमपंथी हमलों के दोषी पाकिस्तानी नागरिक अजमल कसाब को बुधवार की सुबह फाँसी दिए जाने पर इन हमलों में मारे गए और घायल हुए परिवारों के सदस्यों ने राहत की सांस ली है. इन लोगों का कहना है कि उन्हें इंसाफ मिल गया.

मुंबई में आतंक निरोधी दस्ते में हेड कांस्टेबल अरुण जाधव 26 नवम्बर 2008 की उस रात को अजमल कसाब और उसके साथी इस्माइल का पीछा करते हुए घायल हो गए थे. उन्हें पांच गोलियां लगी थीं.

उनके छह साथी चरमपंथियों की गोलियों का निशाना बन चुके थे. इनमें जाधव के बॉस हेमंत करकरे भी शामिल थे. पांच गोलियां लगने के बाद भी जाधव बीस मिनट तक कसाब का पीछा करते रहे. उन्होंने वायरलेस पर अपने साथियों को ख़बर दी और उनकी सूचना पर ही कसाब पकड़ा गया.

इंसाफ़ मिलने की ख़ुशी

कसाब को फांसी दिए जाने पर जाधव बहुत खुश हैं. बीबीसी से बातें करते हुए उन्होंने कहा, “आज इंसाफ़ मिल गया. कसाब के पकड़े जाने से पाकिस्तान बेनकाब हो गया था और उसको पकड़वाने में मेरा हाथ था.”

अरुण जाधव की तरह ही शोलापुर के सब्जी बेचने वाले शब्बीर सलाम दलाल को भी उस रात पांच गोलियां लगी थीं. शब्बीर उस समय छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन (सीएसटी) में हज से लौटे अपने दस रिश्तेदारों के साथ शोलापुर की ट्रेन का इंतज़ार कर रहे थे. उनके दो रिश्तेदार मारे गए.

शब्बीर ने बताया, “मुझे पांच गोलियां लगीं. छह ऑपरेशन हुए लेकिन आज भी मेरी हड्डियों में दर्द होता है. मैं बहुत खुश हूँ कसाब को फँसी दिए जाने पर.”

शब्बीर सलाम दलाल यह भी कहते हैं कसाब के शव को भारत में दफनाने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए. शब्बीर ने कहा, “वो एक आतंकवादी था और उसके शव को हमारे देश में दफ़न करने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए.”

पहले तो यकीन ही नहीं हुआ

वैसे अरुण जाधव और शब्बीर दोनों की पहली प्रतिक्रिया थी कि उन्हें इस ख़बर पर यकीन नहीं आया लेकिन जब ख़बर की पुष्टि हुई तो उन्हें राहत मिली.

राकेश शाह सीएसटी स्थित एक दुकान के मालिक हैं. उस रात वो जिंदा बच जाने वाले खुशनसीब लोगों में एक थे. वो कहते हैं, “उसे तो पहले ही फँसी दे देनी चाहिए थी. लेकिन ख़ुशी है की आखिर हमें इन्साफ मिला.”

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