कसाब: पाकिस्तान के मीडिया में ज़्यादा तरज़ीह नहीं

  • 21 नवंबर 2012
कसाब का पुतला
Image caption भारत के तमाम टीवी चैनलों ने कसाब की खबर को प्रमुखता से दिखाया

मुंबई में 26/11 के हमलों के दोषी अजमल कसाब को पुणे की येरवडा जेल में फांसी और शव को जेल परिसर में ही दफ़नाए जाने की खबर पर भारतीय मीडिया बुधवार सुबह से ही जैसे टूट पड़ा जबकि पाकिस्तान के मीडिया में इस खबर को ज्यादा तरज़ीह नहीं दी गई.

यहां लगी थी कसाब को फांसी

पाकिस्तान के कुछ टीवी न्यूज़ चैनलों ने इस खबर को थोड़ा-बहुत दिखाया, वहीं कुछ चैनलों की हेडलाइंस तक से ये खबर नदारद रही.

जिन चैनलों पर खबर नज़र आ रही थी, वहां भी ऐसा था कि न्यूज़ रीडर बस न्यूज़ पढ़ रहा था और कहीं कोई इंटरव्यू या विशेषज्ञों के साथ किसी तरह का विमर्श नहीं दिखा जैसा कि भारतीय चैनलों पर हो रहा था.

सरकारी उर्दू टीवी चैनल पीटीवी न्यूज़ ने अपने सुबह को दो बुलेटिनों में इस खबर का ज़िक्र तक नहीं किया.

पीटीवी ने कसाब की बजाए इस्लामाबाद में विकासशील देशों के एक सम्मेलन, नाइजीरिया के राष्ट्रपति का आगमन और गज़ा पर जारी इसराइली हमले को अपनी लीड खबर बनाया.

जियो न्यूज़ का अलग रुख

पाकिस्तान के निजी चैनलों की बात करें तो डॉन ने सुबह के एक-दो बुलेटिनों में कसाब की खबर को तरज़ीह दी, लेकिन बाद के बुलेटिनों से ये खबर गायब होती गई.

डॉन ने इसके बजाए कराची में जारी अशांति, पेशावर में चरमपंथियों की गिरफ्तारी और नाइजीरिया के राष्ट्रपति के पाकिस्तान दौरे पर ध्यान केंद्रित किया.

अपवादों की बात करें तो निजी टीवी चैनल जियो न्यूज़ ने कसाब की खबर को बार-बार प्रमुखता से दिखाया.

वहीं पाकिस्तान के विपरीत भारत के तमाम टीवी चैनल सुबह से ही कसाब को फांसी की खबर दिखा रहे थे और हर नए बुलेटिन की शुरुआत कसाब से शुरू हो रही थी.

यहां कसाब को फांसी की सिर्फ खबर ही नहीं थी बल्कि विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श भी हो रहा था और अलग-अलग कोणों से इसके मायने तलाशे जा रहे थे.

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