अब ठाकरे के स्मारक पर विवाद

  • 22 नवंबर 2012
बाल ठाकरे
Image caption बॉम्बे हाईकोर्ट ने साल 2010 में शिवाजी पार्क को 'साइलेंस ज़ोन' घोषित कर दिया था.

शिवसेना के पूर्व प्रमुख दिवंगत बाल ठाकरे की राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्ठि के बाद मुंबई के शिवाजी पार्क में उनका स्मारक बनाने को लेकर एक नया विवाद पैदा हो गया है.

शिवसेना के समर्थक चाहते हैं कि ठाकरे का स्मारक शिवाजी पार्क में ही बनाया जाए, लेकिन स्थानीय लोग 28 एकड़ के एक मैदान का स्वरूप यथावत बनाए रखना चाहते हैं.

वॉकर्स इकोलॉजिकल मूवमेंट की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने साल 2010 में शिवाजी पार्क को 'साइलेंस ज़ोन' घोषित कर दिया था जहां शहरी निकाय ने बीते हफ्ते बाल ठाकरे का अंतिम संस्कार करने की मंजूरी दी थी.

वॉकर्स इकोलॉजिकल मूवमेंट से जुड़े अशोक रावत ने 'द हिंदू' अखबार को बताया, ''लोग शायद ये भूल गए हैं कि शिवाजी पार्क में शिवाजी महाराज का स्मारक पहले से है और आप एक स्मारक के भीतर दूसरा स्मारक नहीं बना सकते.''

उनका कहना है, ''‏हम शिवाजी पार्क में इस तरह का कोई स्मारक बनाने का विरोध करते हैं. हमारी आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार क्या करना चाहती है.''

ठाकरे को राजकीय सम्मान

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र अब्दुल हफीज गांधी का कहना है कि उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई एक्ट) के तहत महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से क्यों किया गया.

अब्दुल हफीज ने महाराष्ट्र सरकार ये भी जानना चाहा है कि शिवाजी पार्क जैसे सार्वजनिक स्थल पर बाल ठाकरे का अंतिम संस्कार करने की मंजूरी क्यों दी गई.

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से उन कानूनी प्रावधानों के बारे में भी पूछा है जिनकी बुनियाद पर राज्य सरकार ने ये निर्णय लिए. साथ ही ये भी जानना चाहा है कि जिस बैठक में ये निर्णय लिए गए, उसमें कौन-कौन शामिल था.

खबरों के मुताबिक, 17 नवम्बर को बाल ठाकरे ने निधन के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत और मुंबई महापौर सुनील प्रभु ने अपने नेता की राजकीय सम्मान से विदाई की मांग की थी.

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