अल्लाह माफ़ करे मुझे: कसाब

मुंबई हमलों के एक मात्र जीवित हमलावर अजमल आमिर कसाब के लिए बुधवार की सुबह आखिरी और काली थी.

आपरेशन एक्स के तहत बेहद गोपनीय तरीके से कसाब को मुंबई की आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल ले जाया गया और इस अभियान को अंजाम दिया पुलिस के चंद आला अफसरों ने. ऑपरेशन एक्स की इस टीम में शामिल थे 17 अफसर.

किसी को कानो कान खबर न हो इसलिए सुरक्षा के बेहद कड़े मानकों का पालन किया गया.

कब क्या हुआ: हमले से लेकर फाँसी तक

यरवडा जेल की जिस सेल में कसाब को रखा गया था वहाँ तक सभी अधिकारी नही जा सकते थे. बताया जा रहा है कि सिर्फ दो अधिकारियों को ही कसाब तक पहुंच हासिल थी.

कानो कान खबर नहीं

सब कुछ योजना के मुताबिक ही हुआ. फांसी का समय भी तय था और दो दिन पहले ही कसाब को उसकी फांसी के बारे में बता दिया गया था.

कसाब को बताया गया था कि राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी है और उसकी ओर से खुद को बचाने के लिए की गई सभी अपीलें पूरी हो चुकी हैं. 19 नवंबर को कसाब से डेथ वारेंट पर हस्ताक्षर कराए गए.

बुधवार सुबह पौ फटने से पहले ही कसाब को फांसी दिए जाने की सारी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी थीं.

इस दौरान फांसी के तख्ते की भी सावधानी से जाँच की गई.

सामाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जब कसाब से उनकी आखिरी इच्छा पूछी गई तो उन्होंने कहा, 'मेरी मौत की खबर मेरी अम्मी तक पहुंचा देना.'

आखिरी सलाम

सुबह सवा सात बजे जेल के अधिकारी कसाब को लाने के लिए जब उसकी सेल में गए तो कसाब ने उन्हें देखते ही सलाम किया.

फांसी पर चढ़ाए जाने से पहले यरवडा जेल के प्रमुख मेडिकल ऑफिसर ने कसाब की जाँच की. इस दौरान कसाब मुस्कुरा रहा था.

अब कसाब को उस तख्ते तक ले जाने की बारी थी जहाँ फांसी दी जानी थी.

कसाब का चेहरा काले कपड़े से ढक दिया गया और कसाब के हाथ पीछे की ओर से बंधे थे.

'अल्लाह माफ करे'

बताया जा रहा है कि फांसी से ठीक पहले कसाब अपने गुनाह पर शर्मिंदा हुआ और फांसी के तख्ते पर खड़ा किए जाने से पहले कसाब को ये कहते हुए सुना गया कि "अल्लाह कसम, अल्लाह कसम ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी. अल्लाह माफ करे मुझे".

सुबह के साढ़े सात बज चुके थे.

इसके बाद एक अधिकारी ने फंदा कसाब के गले में डाल दिया.

बटन दबा और कसाब का शरीर पहले थोड़ा सा ऊपर की ओर उछला और फिर नीचे आकर झूलने लगा.

कसाब की नब्ज रुक चुकी थी. डॉक्टरों ने कसाब को मृत घोषित कर दिया.

ऑपरेशन एक्स पूरा

इस पूरी प्रक्रिया में मात्र सात से आठ मिनट लगे. इस दौरान आपरेशन एक्स में शामिल अधिकारियों के फोन बंद करा दिए गए.

चूंकि यरवडा जेल में कोई जल्लाद नही था इसलिए एक अधिकारी ने इस काम को अंजाम दिया

कसाब को फांसी दिए जाने के 15 मिनट बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री के पास एक संदेश गया कि ऑपरेशन एक्स पूरा हुआ.

कसाब को फांसी दिए जाने को जिस तरह गुप्त रखा गया वैसा इससे पहले कभी नहीं हुआ.

मीडिया से कोसो दूर देश के गृह मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और पुलिस और जेल के चुनिंदा अधिकारियों के अलावा किसी को हवा तक नहीं था कि कसाब को फांसी दी जा रही है.

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