2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आंकड़ों से इनकार

 शुक्रवार, 23 नवंबर, 2012 को 11:13 IST तक के समाचार
ए राजा (फ़ाइल)

टू-जी मामले में पूर्व दूर संचार मंत्री ए राजा को जेल जाना पड़ा.

2 जी स्पेक्ट्रम मामले में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट तैयार करने वाले एक अधिकारी ने कहा है कि वो उसके विवादित निष्कर्षों से समहत नहीं थे और रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर दबाव पूर्वक लिए गए थे.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्पेक्ट्रम की नीलामी न होने की वजह से सरकार को 1.76 लाख करोड़ के राजस्व का नुक़सान हुआ.

मीडिया ने आरपी सिंह के हवाले से कहा है कि लेखा परीक्षक कार्यालय के कर्मचारी छुट्टी का दिन होने के बावजूद मुरली मनोहर जोशी के घर गए जो टू-जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर लोक लेखा समिति की रिपोर्ट तैयार कर रहे थे.

मुरली मनोहर जोशी विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और वो लोक लेखा समिति के अध्यक्ष थे.

लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती की आवंटन में भूमिका को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए गए थे.

मुरली मनोहर जोशी ने इस आरोप को निराधार बताया है कि उन्होंने किसी भी तरह से लोक लेखा समिति की रिपोर्ट को प्रभावित करने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी तरह से सीएजी को बदनाम करना चाहती है.

विवाद

लोक लेखा समिति की रिपोर्ट को समिति के तक़रीबन आधे सदस्यों ने मानने से मना कर दिया था. इसमें कांग्रेस के सदस्य भी शामिल थे.

"रिपोर्ट में दिखाया गया 1.76 करोड़ रूपए के नुक़सान का आंकड़ा मेरी प्राथमिक रिपोर्ट का हिस्सा नहीं है. मैंने पूछा कि आप नुक़सान का ये आंकड़ा किस आधार पर दिखा रहे हैं, क्या आपके पास इससे संबंधित क़ाग़ज़ात है. उन्होंने कहा, ये हमारा अनुमान है. जिसपर मैंने जवाब दिया कि लेखा-परीक्षा में अनुमान जैसी कोई चीज़ नहीं होती. मैंने अपनी रिपोर्ट से इस संख्या को हटा दिया था लेकिन लगता है कि जब ये लेखा परीक्षक के यहां पहुंची तो उसमें आंकड़े फिर से डाल दिए गए"

आरपी सिंह, सीएजी के अधिकारी

बाद में लोकसभा अध्यक्ष ने भी रिपोर्ट को वापस कर दिया था.

हालांकि समाचारपत्र इंडियन एक्सप्रेस ने आरपी सिंह के हवाले से कहा है कि उन्हें ये पता नहीं कि मुरली मनोहर जोशी के घर पर किस तरह की बातें हुईं.

आरपी सिंह ने कहा है, "रिपोर्ट में दिखाया गया 1.76 करोड़ रूपए के नुक़सान का आंकड़ा मेरी प्राथमिक रिपोर्ट का हिस्सा नहीं है. मैंने पूछा कि आप नुक़सान का ये आंकड़ा किस आधार पर दिखा रहे हैं, क्या आपके पास इससे संबंधित क़ाग़ज़ात है. उन्होंने कहा, ये हमारा अनुमान है. जिसपर मैंने जवाब दिया कि लेखा-परीक्षा में अनुमान जैसी कोई चीज़ नहीं होती. मैंने अपनी रिपोर्ट से इस संख्या को हटा दिया था लेकिन लगता है कि जब ये लेखा परीक्षक के यहां पहुंची तो उसमें आंकड़े फिर से डाल दिए गए."

भ्रष्टाटार-विरोधी-मुहिम

लेखा परीक्षक के एक अधिकारी की तरफ़ से आई रिपोर्ट विपक्ष के पूरी सरकार विरोधी भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को नुक़सान पहुंचाएगी.

विपक्ष और भ्रष्टाचार के मामले पर सरकार के विरोध में खडे़ हुए अन्ना हज़ारे और अरविंद केजरीवाल ने सरकार को टू-जी सपेक्ट्रम मामले में खासतौर पर इसलिए घेरा था कि ये नुक़सान भारत के इतिहास में बहुत बड़ा था.

अदालत ने भी इस मामले पर सरकार के खिलाफ कार्रवाई की थी. अदालत के आदेश के बाद स्पेक्ट्रम के आवंटन भी रद्द हुए.

हालांकि हाल में हई टू-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी ने पहले ही इस पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए थे क्योंकि इसमें ख़ज़ाने को महज़ नौ हज़ार करोड़ रूपए के आसपास ही हासिल हो पाए.

मौक़ा

कांग्रेस ने इस मौक़े को हाथ से नहीं जाने दिया है.

सूचना एंव प्रसारण राज्य मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि आरपी सिंह ने संयुक्त संसदीय समिति के सामने जो कुछ कहा था वो खुले आम नहीं बता सकते हैं लेकिन उनके ताज़ा बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि पहले स्पेक्ट्रम नीलामी और अब समाचारपत्रो में जो छप रहा है कि उम्मीद है कि अदालत इसका संज्ञान लेगी.

उधर बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने सवाल उठाया है कि आरपी सिंह इस मामले को रिटारमेंट के एक साल बाद क्यों बता रहे हैं?

उन्होंने कहा कि सीएजी ने सरकार को कई मामलों पर बुरी तरह से घेरा है इसलिए वो तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर संस्था पर ही सवाल करने की कोशिश कर रही है.

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