2-जी के नुक़सान पर राजनीतिक घमासान

 शुक्रवार, 23 नवंबर, 2012 को 13:36 IST तक के समाचार
बीजेपी

बीजेपी ने इस मामले को लेकर कई दफा संसद की कार्रवाई नहीं चलनी दी है

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की वजह से ख़ज़ाने को हुए नुक़सान को लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है जिसमें सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी विपक्षी दलों पर हावी होने की कोशिश कर रही है.

गुरूवार को 2 जी मामले में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट तैयार करने वाले एक पूर्व अधिकारी आरपी सिंह ने बयान दिया कि वो उसके विवादित निष्कर्षों से समहत नहीं थे और रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर दबाव पूर्वक लिए गए थे.

2जी पर सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी न होने की वजह से सरकार को 1.76 लाख करोड़ के राजस्व का नुक़सान हुआ.

क्लिक करें आरपी सिंह के बयान के बाद कांग्रेस के इस बात को अधिक बल मिला है कि वो स्पेक्ट्रम की नीलामी न होने की वजह से दिए गए नुक़सान के आंकड़े पर शुरू से ही सवाल उठाती रही है.

वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता मुरली मनोहर जोशी का कहना है कि पूर्व अधिकारी का बयान सरकार की उस मुहिम का हिस्सा है जो नियंत्रक एंव महालेखा परीक्षक और लोक लेखा समिति जैसी संस्थाओं को बदनाम करने के लिए चलाई जा रही है.

कांग्रेस का हमला

"आरपी सिंह ने इससे पहले ये बातें क्यों नहीं कहीं? रिपोर्ट उन्होंने ही तैयार की और उस पर दवाब डालकर दस्तख़त कौन करवा सकता है. अगर दबाव डाला गया तो इसका सबूत उन्हें दिखाना चाहिए. उनके मुखरविंद से ये ये अनुपम शब्द पहली बार सुनने को मिले हैं"

मुरली मनोहर जोशी

सीएजी के सेवानिवृत्त अधिकारी आरपी सिंह ने कहा है, "रिपोर्ट में दिखाया गया 1.76 करोड़ रूपए के नुक़सान का आंकड़ा मेरी प्राथमिक रिपोर्ट का हिस्सा नहीं है. मैंने पूछा कि आप नुक़सान का ये आंकड़ा किस आधार पर दिखा रहे हैं, क्या आपके पास इससे संबंधित क़ाग़ज़ात है. उन्होंने कहा, ये हमारा अनुमान है. जिसपर मैंने जवाब दिया कि लेखा-परीक्षा में अनुमान जैसी कोई चीज़ नहीं होती. मैंने अपनी रिपोर्ट से इस संख्या को हटा दिया था लेकिन लगता है कि जब ये लेखा परीक्षक के यहां पहुंची तो उसमें आंकड़े फिर से डाल दिए गए."

सूचना एंव प्रसारण राज्य मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि हालांकि आरपी सिंह ने संयुक्त संसदीय समिति के सामने जो कुछ कहा था वो खुले आम नहीं बता सकते हैं लेकिन उनके ताज़ा बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि पहले स्पेक्ट्रम नीलामी और अब समाचार पत्रों में जो छप रहा है कि उम्मीद है कि अदालत इसका संज्ञान लेगी.

मीडिया ने आरपी सिंह के हवाले से कहा है कि लेखा परीक्षक कार्यालय के कर्मचारी छुट्टी का दिन होने के बावजूद मुरली मनोहर जोशी के घर गए जो टू-जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर लोक लेखा समिति की रिपोर्ट तैयार कर रहे थे.

मुरली मनोहर जोशी विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और वो लोक लेखा समिति के अध्यक्ष थे.

लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती की आवंटन में भूमिका को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए गए थे.

ए राजा (फ़ाइल)

टू-जी मामले में पूर्व दूर संचार मंत्री ए राजा को जेल जाना पड़ा.

केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अधिकारियों का लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के घर जाना और रिपोर्ट तैयार करना आम तौर पर नहीं होता लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो ये कई सवाल खड़े करता है.

भारतीय जनता पार्टी

मुरली मनोहर जोशी ने इस आरोप को निराधार बताया है कि उन्होंने किसी भी तरह से लोक लेखा समिति की रिपोर्ट को प्रभावित करने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा कि ये सीएजी और पीएसी जैसी संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साज़िश का हिस्सा दिखता है.

शुक्रवार को आरपी सिंह के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, "आरपी सिंह ने इससे पहले ये बातें क्यों नहीं कहीं? रिपोर्ट उन्होंने ही तैयार की और उस पर दवाब डालकर दस्तख़त कौन करवा सकता है. अगर दबाव डाला गया तो इसका सबूत उन्हें दिखाना चाहिए. उनके मुखरविंद से ये ये अनुपम शब्द पहली बार सुनने को मिले हैं."

संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व अधिकारी अवकाश प्राप्ति के एक साल बाद ये सवाल क्यों उठा रहे हैं?

उन्होंने दावा किया कि आरपी सिंह के हवाले से पहले भी कुछ बयान छपे थे लेकिन जब उनसे ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने ऐसे किसी बयान से मना कर दिया.

मुरली मनोहर जोशी का कहना था कि आरपी सिंह जेपीसी के सामने किसी तरह के आरोपों को साबित नहीं कर पाए थे.

उधर बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने भी सवाल उठाया है कि आरपी सिंह इस मामले को रिटारमेंट के एक साल बाद क्यों बता रहे हैं?

उन्होंने कहा कि सीएजी ने सरकार को कई मामलों पर बुरी तरह से घेरा है इसलिए वो तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर संस्था पर ही सवाल करने की कोशिश कर रही है.

भ्रष्टाचार-विरोधी-मुहिम

लेखा परीक्षक के एक अधिकारी की तरफ़ से आई रिपोर्ट विपक्ष के पूरी सरकार विरोधी भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को नुक़सान पहुंचाएगी.

विपक्ष और भ्रष्टाचार के मामले पर सरकार के विरोध में खडे़ हुए अन्ना हज़ारे और अरविंद केजरीवाल ने सरकार को टू-जी सपेक्ट्रम मामले में खासतौर पर इसलिए घेरा था कि ये नुक़सान भारत के इतिहास में बहुत बड़ा था.

अदालत ने भी इस मामले पर सरकार के खिलाफ कार्रवाई की थी. अदालत के आदेश के बाद स्पेक्ट्रम के आवंटन भी रद्द हुए.

हालांकि हाल में हई टू-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी ने पहले ही इस पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए थे क्योंकि इसमें ख़ज़ाने को महज़ नौ हज़ार करोड़ रूपए के आसपास ही हासिल हो पाए.

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