खतना बना जानलेवा, जननांग काटने की नौबत

  • 23 नवंबर 2012
खतना
Image caption पुलिस ने गलत अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया है

खतने में कथित गलत ऑपरेशन से सात साल के एक बच्चे की जान पर बन आई है. राजस्थान के अलवर में इस बच्चे का जननांग भी काटना पड़ा है.

इस बच्चे के परिजनों और नाते-रिश्तेदारों ने इसके लिए अलवर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल को जिम्मेदार ठहराया है और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया.

अस्पताल के डॉक्टर ने इसे महज एक दुर्घटना बताया है. मगर इस घटना पर विलाप करते परिजनों ने कहा ये तो मौत से भी गंभीर घटना है.

इस पीड़ित बच्चे के चाचा फखरुद्दीन खान ने बीबीसी से कहा ''ये तो मौत से भी बदतर है. इससे तो खुदा मौत भी देता तो रो-रो कर दिल को दिलासा देने की कोशिश करते".

अलवर में पुलिस ने फखरुद्दीन खान की रिपोर्ट पर अस्पताल और डॉक्टर के विरुद्ध आपराधिक कृत्य का मामला दर्ज किया है.

अलवर में उत्तर पूर्वी पुलिस थाने के सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार कहते हैं, ''हम मामले के जांच कर रहे है. इस बारे में मेडिकल बोर्ड से राय मांगी है. पीड़ित का मेडिकल मुआयना करवाया जा रहा है."

आरोप

परिजनों के अनुसार बालक को 10 नवम्बर को अलवर के सानिया अस्पताल में खतने के लिए भर्ती कराया गया था.

फखरुद्दीन खान कहते हैं, "उसका खतने का ऑपरेशन डॉ तय्यब खान ने किया, फिर उसकी हालत बिगड़ गई तो हमसे कहा इसे जयपुर ले जाना होगा. हम इसे जयपुर के एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए. वहां कहा गया कि बच्चे की जान तभी बच सकती है जब इसका जननांग हटा दिया जाये, और फिर वो ही हुआ."

इस बच्चे को अभी वापस अलवर के सानिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. परिजनों का कहना है उसकी हालत गंभीर है लेकिन अस्पताल के डॉक्टर खान कहते हैं कि उसकी हालत सामान्य है.

डॉ खान ने बीबीसी से कहा, "ये एक हादसा है, हो गया. हमने बच्चे और उसके परिवार को पूरी मदद के लिए आश्वस्त किया है. बच्चा जब सोलह पार का होगा, प्लास्टिक सर्जरी से उसका लिंग ठीक कराया जाएगा. इसमें नपुसंकता नहीं आएगी, क्योंकि उसकी अंड ग्रन्थि को कोई नुकसान नहीं पंहुचा है."

पीड़ित के परिजनों का कहना है डॉक्टर खान एक फिजिशियन हैं. वो ऐसा ऑपरेशन करने के हक़दार नहीं थे.

सफाई

लेकिन डॉ खान कहते हैं कि ये ऑपरेशन उनके अस्पताल में एक सर्जन डॉक्टर हरिराम गुप्ता ने किया था.

Image caption इस घटना को लेकर लोगों में काफी रोष है

पर बालक के एक रिश्तेदार शेर मोहम्मद क्रोध के साथ कहते हैं, "डॉक्टर खान ने खुद खतने का ऑपरेशन किया है. ये घोर लापरवाही थी. उन्हें लगा सर्जन को पैसे देने होंगे, सो उन्होंने खुद ही ये ऑपरेशन किया है, हम उनकी गिरफ्तारी से पहले शांत नहीं होंगे."

अलवर में मेव बिरादरी के इमरान का ये सबसे बड़ा बेटा है जो गाँव में ही एक प्राइवेट स्कूल में तीसरे दर्जे का छात्र था. वैसे गाँवों में कुछ लोग अब भी पारम्परिक तरीके से खतना करते हैं.

मगर हाल के वर्षो में लोग ज्यादा निरापद और स्वास्थ्यप्रद तरीके से खतना करने के लिए डॉक्टरों की मदद लेने लगे है.

फखरुद्दीन बताते हैं, ''गाँव में खतना कराओ तो बच्चा थोड़ा ज्यादा दर्द महसूस करता है और हफ्ता दस दिन लगते हैं. यही सोच कर भाई साहब यानी बच्चे के पिता ने दीवाली की छुटियों में स्कूल बंद होने को देख कर प्राइवेट हॉस्पिटल में खतना कराना ठीक समझा. मगर हमें क्या पता था कि डॉक्टर ऐसा कर देंगे ۔"

फखरुद्दीन कहते हैं, ''आप सोचिए, उस बच्चे का क्या भविष्य होगा. हमारे समाज में कितना मुश्किल होता है ऐसी हालत में एक इन्सान के लिए. पूरे घर के लोग सो नहीं पा रहे हैं. कल ये बच्चा अपने वालिद का सहारा होता, अब खुदा जाने क्या होगा."

वहीं मेंव बिरादरी के शेर मोहम्मद कहते हैं कि पहले गाँव में इस काम के लिए सिद्घहस्त नाई होते थे. ''आजकल सब डॉक्टरो के पास आते हैं. मेरे दो बच्चो का खतना डॉक्टर की मदद से हुआ मगर कोई दिक्कत नहीं आई. मेरे ख्याल में भारत में इस तरह का ये पहला वाकया है."

अस्पताल के संचालक डॉ खान कहते हैं, "बच्चा और उसके परिजनों को समझा दिया गया और वे संतुष्ट भी थे. मगर फिर एक स्थानीय नेता ने इन्हें भड़का दिया.

दीवाली की छुट्टियाँ खत्म हुईं और अलवर में बच्चे उमंग और उत्साह के साथ स्कूलों में जाने लगे. मगर इस तीसरी कक्षा के नौनिहाल बालक की तो जान पर बन आई है.

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