आम आदमी पार्टी का मजबूरी में गठन: केजरीवाल

 शनिवार, 24 नवंबर, 2012 को 17:29 IST तक के समाचार
अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कई जाने-माने लोगों को घेरने की कोशिश की है.

सामाजिक कार्यकर्ता से राजनीतिक नेता बनने की तैयारी में जुटे अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में अपने सहयोगियों के साथ हुई एक बैठक के बाद अपने दल का नाम 'आम आदमी पार्टी' रखा है.

इस बैठक में लगभग 300 लोगों ने भाग लिया और राजनीतिक दल का नाम आम आदमी पार्टी रखने का प्रस्ताव केजरीवाल ने ही रखा.

इसी बैठक में पार्टी के संविधान को भी अपनाया गया.

गौरतलब है कि कांग्रेस ने पिछले आम चुनावों में 'कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ' का नारा दिया था और आम आदमी के लिए विभिन्न योजनाओं को शुरु करने आधार पर ही चुनाव लड़ा था.

"जनता की मांग थी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार ऐसा कानून पारित करे कि यदि कोई भ्रष्टाचार करे तो उसे जेल हो, उसकी संपत्ति जब्त की जाए...लेकिन ये पार्टी (कांग्रेस) नहीं मानी और फिर सभी पार्टियों ने हमें धोखा दिया. सारी पार्टियाँ पर्दे के पीछे एक दूसरे की मदद करती हैं. जब तक ये राजनीति नहीं बदलेगी तब तक भ्रष्टाचार से मुक्ति नहीं मिल सकती. इसीलिए हमने मजबूरी में आम आदमी पार्टी का गठन किया है"

अरविंद केजरीवाल

पर्यवेक्षकों का मानना है कि केजरीवाल का प्रयास कांग्रेस के आम आदमी के नारे पर सीधा प्रहार करने का है हालाँकि एक साल बाद चुनावों के समय ही पता चलेगा कि केजरीवाल के प्रयासों में कितना दम है.

'सभी पार्टियों ने धोखा दिया'

महत्वपूर्ण है कि केजरीवाल भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबा अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से ये कहते हुए अलग हुए थे कि देश में सशक्त लोकपाल कानून बनाने के लिए राजनीति में जाना जरूरी है.

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में भाग लेने वाले कई सदस्य और अन्ना हजारे सक्रिय राजनीति का रास्ता अपनाए जाने से सहमत नहीं थे.

शनिवार को बैठक के बाद केजरीवाल ने कहा, "जनता की मांग थी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार ऐसा कानून पारित करे कि यदि कोई भ्रष्टाचार करे तो उसे जेल हो, उसकी संपत्ति जब्त की जाए...लेकिन ये पार्टी (कांग्रेस) नहीं मानी और फिर सभी पार्टियों ने हमें धोखा दिया. सारी पार्टियाँ पर्दे के पीछे एक दूसरे की मदद करती हैं. जब तक ये राजनीति नहीं बदलेगी तब तक भ्रष्टाचार से मुक्ति नहीं मिल सकती. इसीलिए हमने मजबूरी में आम आदमी पार्टी का गठन किया है."

उनका कहना था, "हम नेता नहीं है, हमें राजनीति नहीं आती है...हम इस देश के आम आदमी हैं...आम आदमी वोट डालेगा, आम आदमी प्रचार करेगा और आम आदमी ही चुनकर आएगा. जो-जो सोमवार को जंतर मंतर पर आएगा, उसे इस पार्टी का संस्थापक सदस्य माना जाएगा. हम दूसरी पार्टियों से अलग है."

अरविंद केजरीवाल ने जोर देकर कहा, "न्याय हमें अधिकार के तौर पर मिलना चाहिए. यदि पैसा हो और अच्छा वकील मिल जाए या फिर कोई वकील दया कर ले तो आपको आज न्याय मिल सकता है...ये बदलना होगा. लोगों को सरकार के कामकाज और कानून बनाने की प्रक्रिया में और अधिकार होने चाहिए. इस पार्टी का लक्ष्य है कि एक परिवार से एक सदस्य कार्यकारिणी या फिर चुनाव में भाग ले सकता है."

उनका कहना था कि पार्टी को चंदा देने वालों और उसके खर्चे की सूची वेबसाइट पर डाली जाएगी और हर राज्य-जिले में लोकायुक्त और लोकपाल होंगे जो इसकी स्वतंत्र तौर पर समीक्षा करते रहेंगे.

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