सरहदों का भाषाई फेर और बच्चे

Image caption सरहद पार से आए इन हिंदू बच्चों की तालीमकी भाषा बदल गई है.

धरती पर खिंची एक लकीर कितना कुछ बदल देती है ये शायद उन बच्चों से पूछना चाहिए जो पाकिस्तान से पलायन कर हिंदुस्तान पहुंचे हैं और भाषा के अजीबोगरीब जाल में खुद को हर सुबह गूथते नजर आते हैं.

पाकिस्तान से पलायन कर भारत पहुंचे हिंदुओं के लिए भूगोल ही नहीं बदला, शिक्षा भी बदल गई.

पहले, वे उर्दू के साथ कागज पर दायें से बाएं लिखते थे, अब बाएं से दाएं लिखना पड़ता है.

अबोध बच्चे ककहरा सीख रहे हैं लेकिन मालूम पड़ता है कि सियासत में वैचारिक द्वन्द की मानिंद 'लेफ्ट और राईट' की भूल भूलैया में गुम हो गए हों.

बाल मन को ये बातें कहां समझ आती हैं कि वतन बदलने से स्कूलों की प्रार्थना भी बदल जाती है.

बच्चों को क्या पता हिंदुस्तान क्या और पाकिस्तान क्या वो तो बस गुनगुनाते हैं, ‘तुम्ही हो माता, पिता तुम ही हो’

तंबू में 'ककहरे की सीख'

जोधपुर शहर से दूर एक शिविर में गर्दो गुब्बार के बीच पाकिस्तानी हिन्दुओं के बच्चे हर रोज जमा होते है, वे जीवन की स्लेट पर इबारत लिखने का प्रयास करते रहते है.

सरहद के उस पार सिन्धी और उर्दू उनके लिए तालीम की भाषा थी अब, हिंदी उनका माध्यम बन गई है.

Image caption सरहद पार की तो बदल गई प्रार्थना भी.

सिंध के हैदराबाद से आया साजन तीसरी जमात का छात्र है, साजन बताता है कि वहां स्कूल में 'इसी दुनिया में अजब नजारा’ गाते थे, अब क से कमल और ख से खरगोश गा गा कर सीखते हैं.

इन बच्चों को सरकारी स्कूल नसीब नहीं है. निजी स्कूलों में पढ़ाई का सपना देखना तो बेईमानी ही होगी ऐसे में ले देकर मानसी बचती हैं जो इन बच्चों को तालीम देती हैं. मानसी खुद पाकिस्तान से आई हैं और सातवीं की छात्रा है.

लेकिन, मानसी की व्यथा अलग नहीं है, हिंदी, उर्दू का चक्कर उसे भई परेशान करता है. वो कहती हैं,

''सिंध में उलटी पढाई होती थी,यहाँ सीधी होती है. शुरू में बच्चे बहुत परेशान हुए, अब वे सीधी पढाई करने लगे है. पहले बार-बार बताने पर भी बच्चे नोट बुक पर दाएं से बाए लिखने लगते थे, बहुत मेहनत करनी पड़ी.”

इन बच्चों का स्कूल एक तम्बू की ओट में चलता है. कुछ बच्चे यहां अग्रेजी कविताएं पढ़ते हुए सुने जा सकते हैं.

लेकिन, इस ककहरे और अग्रेजी कविताओं के बीच ये बच्चे अपने उन दोस्तों को भी ढूंढते हैं जिन्हें छोड़कर वो अब हिंदुस्तान आ गए हैं. शायद सरहदों की लकीरें दिलों के बीच दीवार नहीं बन सकती.